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यूपीएससी में 93वीं रैंक : पहले प्रयास में असफल होने पर नहीं खाेया हौसला, घर पर ही पढ़ाई कर प्रतीक ने चमकाया नाम
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प्रतीक ने यूपीएससी में 93वीं रैंक पाई।
मंडी आदमपुर। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा 2022 का फाइनल परिणाम घोषित कर दिया है। टाॅपर्स की लिस्ट में 93वें स्थान पर आदमपुर क्षेत्र के गांव लाडवी के प्रतीक सिंह के घर जश्न का माहौल है। प्रतीक ने दूसरी बार में ही सफलता हासिल की है। पहले प्रयास में असफल होने पर उसने हौसला नहीं खोया और घर पर पढ़ाई की नया मुकाम पाया है।
प्रतीक के पिता राधा कृष्ण अपने बेटे की इस सफलता से काफी खुश है। प्रतीक सिंह के दादा भागीरथ किरडोलिया गांव लाडवी में रहते थे। बाद में सरकारी सेवा के चलते उनका बेटा राधाकृष्ण परिवार सहित गुरुग्राम में शिफ्ट हो गए। पीएफ कमिश्नर राधाकृष्ण बाहर चले जाने के कारण प्रतीक सिंह की पढ़ाई भी गुरुग्राम से ही हुई। प्रतीक सिंह के पिता राधाकृष्ण ने बताया प्रतीक ने खानपुर से 2020 में आईआईटी की परीक्षा पास की। इसके बाद वर्ष 2021 में यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन साक्षात्कार में असफल हो गए। इसके बाद से प्रतीक ने घर पर रह कर ही पढ़ाई जारी रखी और 2022 में फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी और मंगलवार को घोषित हुए परिणामों में पूरे देशभर में 93वां स्थान पाया।
प्रतीक के चाचा गुरुग्राम में डीसीपी क्राइम हैं
प्रतीक सिंह के चाचा विजय प्रताप सिंह आईपीएस है, वे पहले फतेहाबाद में एसपी भी रहे हैं और वर्तमान में गुरुग्राम में डीसीपी क्राइम के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रतीक सिंह के घर में सदा से ही पढ़ाई का माहौल रहा है। इनके दादा और उनके भाइयों का शुरुआती रुझान ही शिक्षा के तरफ रहा। उन्होंने अपनी संतानों को खूब अच्छी शिक्षा दी। इसके चलते लाडवी के किरडोलिया परिवार में आईपीएस, एडवोकेट से लेकर कई सरकारी अधिकारी निकले। अब प्रतीक सिंह ने बेहतर रैंक हासिल कर न केवल परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है।
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हिसार के भावेश ख्यालिया ने यूपीएससी में पाई 280वीं रैंक
हिसार। पीएलए हिसार निवासी 23 वर्षीय भावेश ख्यालिया ने मंगलवार को जारी हुए यूपीएससी के परीक्षा परिणाम में 280वीं रैंक हासिल की है। यह रैंक प्राप्त कर भावेश ख्यालिया ने इंडियन रिवेन्यू सर्विसेस में अपनी जगह पक्की कर ली है, लेकिन भावेश ख्यालिया का सपना आईएएस अधिकारी बनना है। इसके लिए वह 28 मई को होने वाले यूपीएससी की परीक्षा फिर से देंगे। भावेश ख्याालिया फिलहाल के एचसीएस अधिकारी की अंडर ट्रेनिंग है।
भावेश ख्याालिया के पिता प्रो. राजकुमार ख्यालिया सिवानी गवर्नमेंट कॉलेज से प्राचार्य सेवानिवृत्त हैं। इसे पहले प्रो. राजकुमार ख्यालिया गवर्नमेंट कॉलेज हिसार अपनी सेवाएं दे चुके हैं। भावेश की माता सुशीला ख्यालिया शिक्षिका हैं। प्रो. ख्यालिया ने बताया कि आईएसएस अधिकारी बनने की प्रेरणा भावेश को उनके ताऊ आईएएस अधिकारी युद्धवीर सिंह ख्यालिया से मिली है। प्रो. राजकुमार ख्यालिया ने बताया कि भावेश के चाचा राजेश ख्यालिया डीआरओ हैं, वे भी भावेश को आईएएस के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रतिदिन 15 घंटे की पढ़ाई कर पाया मुकाम
प्रो. राजकुमार ख्यालिया ने बताया कि उनके बेटे भावेश प्रतिदिन 15 घंटे पढ़ाई करते हैं। ताऊ व चाचा, माता-पिता की प्रेरणा से भावेश ने यह सफलता पाई है। लेकिन भावेश का सपना अभी अधूरा है। वह आईएसएस में 280 से अधिक टॉप रैंक प्राप्त करना चाहते हैं। इस लक्ष्य के लिए वह फिर से परीक्षा की तैयारी में जुट हुए हैं। भावेश ख्यालिया ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (हैदराबाद) से 2020 में ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने परिजनों से प्रेरित होकर कोरोना काल के दौरान समय का पूरा फायदा उठाते हुए घर पर ही यूपीएससी की तैयारी की।
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प्रतीक के पिता राधा कृष्ण अपने बेटे की इस सफलता से काफी खुश है। प्रतीक सिंह के दादा भागीरथ किरडोलिया गांव लाडवी में रहते थे। बाद में सरकारी सेवा के चलते उनका बेटा राधाकृष्ण परिवार सहित गुरुग्राम में शिफ्ट हो गए। पीएफ कमिश्नर राधाकृष्ण बाहर चले जाने के कारण प्रतीक सिंह की पढ़ाई भी गुरुग्राम से ही हुई। प्रतीक सिंह के पिता राधाकृष्ण ने बताया प्रतीक ने खानपुर से 2020 में आईआईटी की परीक्षा पास की। इसके बाद वर्ष 2021 में यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन साक्षात्कार में असफल हो गए। इसके बाद से प्रतीक ने घर पर रह कर ही पढ़ाई जारी रखी और 2022 में फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी और मंगलवार को घोषित हुए परिणामों में पूरे देशभर में 93वां स्थान पाया।
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प्रतीक के चाचा गुरुग्राम में डीसीपी क्राइम हैं
प्रतीक सिंह के चाचा विजय प्रताप सिंह आईपीएस है, वे पहले फतेहाबाद में एसपी भी रहे हैं और वर्तमान में गुरुग्राम में डीसीपी क्राइम के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रतीक सिंह के घर में सदा से ही पढ़ाई का माहौल रहा है। इनके दादा और उनके भाइयों का शुरुआती रुझान ही शिक्षा के तरफ रहा। उन्होंने अपनी संतानों को खूब अच्छी शिक्षा दी। इसके चलते लाडवी के किरडोलिया परिवार में आईपीएस, एडवोकेट से लेकर कई सरकारी अधिकारी निकले। अब प्रतीक सिंह ने बेहतर रैंक हासिल कर न केवल परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है।
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हिसार के भावेश ख्यालिया ने यूपीएससी में पाई 280वीं रैंक
हिसार। पीएलए हिसार निवासी 23 वर्षीय भावेश ख्यालिया ने मंगलवार को जारी हुए यूपीएससी के परीक्षा परिणाम में 280वीं रैंक हासिल की है। यह रैंक प्राप्त कर भावेश ख्यालिया ने इंडियन रिवेन्यू सर्विसेस में अपनी जगह पक्की कर ली है, लेकिन भावेश ख्यालिया का सपना आईएएस अधिकारी बनना है। इसके लिए वह 28 मई को होने वाले यूपीएससी की परीक्षा फिर से देंगे। भावेश ख्याालिया फिलहाल के एचसीएस अधिकारी की अंडर ट्रेनिंग है।
भावेश ख्याालिया के पिता प्रो. राजकुमार ख्यालिया सिवानी गवर्नमेंट कॉलेज से प्राचार्य सेवानिवृत्त हैं। इसे पहले प्रो. राजकुमार ख्यालिया गवर्नमेंट कॉलेज हिसार अपनी सेवाएं दे चुके हैं। भावेश की माता सुशीला ख्यालिया शिक्षिका हैं। प्रो. ख्यालिया ने बताया कि आईएसएस अधिकारी बनने की प्रेरणा भावेश को उनके ताऊ आईएएस अधिकारी युद्धवीर सिंह ख्यालिया से मिली है। प्रो. राजकुमार ख्यालिया ने बताया कि भावेश के चाचा राजेश ख्यालिया डीआरओ हैं, वे भी भावेश को आईएएस के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रतिदिन 15 घंटे की पढ़ाई कर पाया मुकाम
प्रो. राजकुमार ख्यालिया ने बताया कि उनके बेटे भावेश प्रतिदिन 15 घंटे पढ़ाई करते हैं। ताऊ व चाचा, माता-पिता की प्रेरणा से भावेश ने यह सफलता पाई है। लेकिन भावेश का सपना अभी अधूरा है। वह आईएसएस में 280 से अधिक टॉप रैंक प्राप्त करना चाहते हैं। इस लक्ष्य के लिए वह फिर से परीक्षा की तैयारी में जुट हुए हैं। भावेश ख्यालिया ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (हैदराबाद) से 2020 में ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने परिजनों से प्रेरित होकर कोरोना काल के दौरान समय का पूरा फायदा उठाते हुए घर पर ही यूपीएससी की तैयारी की।