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बीजोपचार द्वारा करें भूमि जनित व बीज जनित रोगों से बचाव: डॉ. आरके सैनी
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हिसार। एचएयू से कीट विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत्त डॉ. आरके सैनी का कहना है कि फसलों की कई बीमारियों के लिए जिम्मेदार जीवाणु भूमि में अथवा बीज के अंदर विद्यमान होते हैं। जैसे ही बीज बोया जाता है, ये जीवाणु क्रियाशील होकर पौधों पर आक्रमण करते हैं और फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे रोगों से फसलों को बचाने के लिए उपयुक्त दवाओं द्वारा बिजाई से पूर्व बीजोपचार एक कारगर व सस्ता उपाय है। डॉ. सैनी गांव मतानी में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तत्वावधान में आयोजित ग्वार जागरूकता शिविर में किसानों को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. सैनी ने कहा कि ग्वार फसल का जड़गलन उखेड़ा रोग एक भूमि जनित फंगस के कारण होता है। यदि बीज को तीन ग्राम कार्बनडाजिम (बाविस्टन) प्रति किलो बीज की दर से सूखा उपचारित कर बोया जाए तो इस रोग के प्रकोप से बचा जा सकता है। परंतु बहुत से किसान इस जानकारी से अनजान है तथा इसे लाइलाज रोग समझते हैं। इस रोग के प्रकोप से पौधे पीले पड़ने व मुरझाने लगते हैं तथा अंत में सूख जाते हैं। ऐसे पौधों को उखाड़ने पर पता चलता है कि उक्त फंगस के कारण जड़ें गल कर काली पड़ गई है। अगर किसान बीज पर दवाई मलना चूक जता है तो बाद में स्प्रे द्वारा इसकी सफल रोकथाम बहुत मुश्किल होगी। उन्होंने गवार की अच्छी पैदावार लेने के लिए एचजी 365, एचजी 563 तथा एच जी 2-20 से बिजाई करने तथा बिजाई पूर्व प्रति एकड़ 35 किग्रा डीएपी डालने की सलाह दी। कृषि विकास अधिकारी डॉ मांगेराम ने कपास, बाजरा व अन्य फसलों से संबंधित किसानों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। इस मौके पर सरपंच धर्मसिंह, कृष्ण, सुनील, सुरेंद्र, मुकेश, पवन, राजकुमार, रोशनलाल, बनवारी, संदीप, दलबीर, रामसिंह, बिजेंद्र, कुलदीप सहित अन्य किसान मौजूद थे।
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डॉ. सैनी ने कहा कि ग्वार फसल का जड़गलन उखेड़ा रोग एक भूमि जनित फंगस के कारण होता है। यदि बीज को तीन ग्राम कार्बनडाजिम (बाविस्टन) प्रति किलो बीज की दर से सूखा उपचारित कर बोया जाए तो इस रोग के प्रकोप से बचा जा सकता है। परंतु बहुत से किसान इस जानकारी से अनजान है तथा इसे लाइलाज रोग समझते हैं। इस रोग के प्रकोप से पौधे पीले पड़ने व मुरझाने लगते हैं तथा अंत में सूख जाते हैं। ऐसे पौधों को उखाड़ने पर पता चलता है कि उक्त फंगस के कारण जड़ें गल कर काली पड़ गई है। अगर किसान बीज पर दवाई मलना चूक जता है तो बाद में स्प्रे द्वारा इसकी सफल रोकथाम बहुत मुश्किल होगी। उन्होंने गवार की अच्छी पैदावार लेने के लिए एचजी 365, एचजी 563 तथा एच जी 2-20 से बिजाई करने तथा बिजाई पूर्व प्रति एकड़ 35 किग्रा डीएपी डालने की सलाह दी। कृषि विकास अधिकारी डॉ मांगेराम ने कपास, बाजरा व अन्य फसलों से संबंधित किसानों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। इस मौके पर सरपंच धर्मसिंह, कृष्ण, सुनील, सुरेंद्र, मुकेश, पवन, राजकुमार, रोशनलाल, बनवारी, संदीप, दलबीर, रामसिंह, बिजेंद्र, कुलदीप सहित अन्य किसान मौजूद थे।
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