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प्रदेश में 2 लाख से ज्यादा आरएमपी अनुभव के आधार पर दे रहे चिकित्सा
Updated Mon, 12 Jun 2017 12:34 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
हरियाणा में 1973 से आरएमपी का रजिस्ट्रेशन बंद है। सरकार को रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी।
यह बात हरियाणा राज्य अनुभवी चिकित्सा संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. एलसी शर्मा ने रविवार को कुम्हार धर्मशाला में संगठन के राज्यस्तरीय सम्मेलन में कही। उन्होंने संबोधित किया कि हरियाणा में आरएमपी के रजिस्ट्रेशन 1973 से बंद हैं। अन्य राज्यों में भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया रुकी हुई है। रजिस्ट्रेशन से सरकार को करोड़ों का राजस्व प्राप्त हो रहा था। अब सरकार को इसका नुकसान हो रहा है। लाखों लोग बेरोजगार होने के कगार पर हैं। एक तरफ सरकार कहती है कि हम रोजगार देंगे। दूसरी तरफ रोजगार छीनने का काम कर रही है। जो लोग ग्रामीण अंचल या झुग्गी-झोपड़ी में सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग कर रहे हैं। सरकार उन्हीं पर डंडा चला रही है। उन्होंने कहा कि एक बार कांग्रेस सरकार के दौरान रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हुई थी और उस समय हरियाणा आयुर्वेदिक बोर्ड को 66 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था, लेकिन बाद में उस पर रोक लगा दी गई थी। आरएमपी साथियों के सहयोग से एक बार चौटाला सरकार में कामगार विधेयक पास कराया गया था, लेकिन उसको लागू करने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया।
डॉ. शर्मा ने कहा कि राज्य में दो लाख से ज्यादा आरएमपी अनुभव के आधार पर चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। आरएमपी दिन रात चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। वे अपनी सेवाएं बंद कर दें तो सरकार के पास कोई व्यवस्था नहीं है कि मरीजों को 24 घंटे सेवाएं दी जा सकें। इस मौके पर जिला प्रधान डॉ. उमेद खन्ना, डॉ. महेंद्र जुनेजा और काफी संख्या में आरएमपी मौजूद थे।
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फोटो 47 और 48
- प्रदेश सरकार से राज्य में आरएमपी डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन शुरू करने की मांग
- कुम्हार धर्मशाला में हुआ आरएमपी डॉक्टरों का राज्यस्तरीय सम्मेलन
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हिसार।
हरियाणा में 1973 से आरएमपी का रजिस्ट्रेशन बंद है। सरकार को रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी।
यह बात हरियाणा राज्य अनुभवी चिकित्सा संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. एलसी शर्मा ने रविवार को कुम्हार धर्मशाला में संगठन के राज्यस्तरीय सम्मेलन में कही। उन्होंने संबोधित किया कि हरियाणा में आरएमपी के रजिस्ट्रेशन 1973 से बंद हैं। अन्य राज्यों में भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया रुकी हुई है। रजिस्ट्रेशन से सरकार को करोड़ों का राजस्व प्राप्त हो रहा था। अब सरकार को इसका नुकसान हो रहा है। लाखों लोग बेरोजगार होने के कगार पर हैं। एक तरफ सरकार कहती है कि हम रोजगार देंगे। दूसरी तरफ रोजगार छीनने का काम कर रही है। जो लोग ग्रामीण अंचल या झुग्गी-झोपड़ी में सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग कर रहे हैं। सरकार उन्हीं पर डंडा चला रही है। उन्होंने कहा कि एक बार कांग्रेस सरकार के दौरान रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हुई थी और उस समय हरियाणा आयुर्वेदिक बोर्ड को 66 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था, लेकिन बाद में उस पर रोक लगा दी गई थी। आरएमपी साथियों के सहयोग से एक बार चौटाला सरकार में कामगार विधेयक पास कराया गया था, लेकिन उसको लागू करने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया।
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डॉ. शर्मा ने कहा कि राज्य में दो लाख से ज्यादा आरएमपी अनुभव के आधार पर चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। आरएमपी दिन रात चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। वे अपनी सेवाएं बंद कर दें तो सरकार के पास कोई व्यवस्था नहीं है कि मरीजों को 24 घंटे सेवाएं दी जा सकें। इस मौके पर जिला प्रधान डॉ. उमेद खन्ना, डॉ. महेंद्र जुनेजा और काफी संख्या में आरएमपी मौजूद थे।
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- प्रदेश सरकार से राज्य में आरएमपी डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन शुरू करने की मांग
- कुम्हार धर्मशाला में हुआ आरएमपी डॉक्टरों का राज्यस्तरीय सम्मेलन