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हिसार की बेटी शिवांगी ने की माउंट एवरेस्ट फतह
Updated Tue, 22 May 2018 01:48 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
ग्लोबल स्पेस हिसार निवासी शिवांगी पाठक ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के शिखर को मात्र 16 वर्ष की आयु में छू लिया। शिवांगी के परिजनों का दावा है कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली उत्तर भारत की सबसे कम उम्र की लड़की हैं। शिवांगी ने पांच अप्रैल को काठमांडू (नेपाल) से चढ़ाई शुरू की थी।
शिवांगी की माता आरती पाठक और पिता राजेश पाठक ने बताया कि जब शिवांगी 14 वर्ष की थी तो उसने एक प्रोत्साहित करने वाली वीडियो देखी थी, जिससे प्रभावित होकर शिवांगी ने कुछ ऐसा कार्य करने की ठान ली, जो सबसे अलग हो। इसी सोच के साथ उसने मेहनत व लगन के साथ पर्वतारोहण का प्रशिक्षण शुरू कर दिया। इस दौरान उसने केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि सहित कई कठिन पहाड़ियों पर चढ़ाई की। शिवांगी को ट्रैकिंग के दौरान सबसे अधिक समस्या अपने अधिक वजन को लेकर आ रही थी, जिसके लिए भी उसने कड़ी मेहनत कर और रिंकू पानू से प्रशिक्षण लेकर अपना वजन घटाया। एल्फा ग्रेड लेह लद्दाख 6053 मीटर की चढ़ाई पार करने के बाद शिवांगी ने माउंट एवरेस्ट को फतेह करने का संकल्प लिया। नेपाल की सात शिमटी एजेंसी ने उन्हें चढ़ाई की अनुमति प्रदान की। शिवांगी के माता-पिता ने बताया कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई का खर्च लगभग 35 लाख रुपये का था। बेटी की इच्छा को देखते हुए परिजनों को इसकी चिंता सताने लगी, क्योंकि इतना खर्च उठा पाना उनके सामर्थ्य से बाहर था। इसके लिए उन्होंने कई संस्थाओं से मदद की अपील भी की।
अनीता कुंडू को मानती हैं प्रेरणास्रोत
परिजनों ने बताया कि शिवांगी के जन्म पर उस समय कुछ महिलाओं ने काफी अफसोस जताया था। अब वही शिवांगी उनका नाम रोशन कर रही है। शिवांगी के मामा अमित मुंजाल और अनिल चौधरी ने प्रोत्साहित किया और उसकी हर संभव सहायता भी की। शिवांगी अनीता कुंडू को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। उन्हीं से प्रेरणा पाकर उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने का निर्णय लिया
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हिसार।
ग्लोबल स्पेस हिसार निवासी शिवांगी पाठक ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के शिखर को मात्र 16 वर्ष की आयु में छू लिया। शिवांगी के परिजनों का दावा है कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली उत्तर भारत की सबसे कम उम्र की लड़की हैं। शिवांगी ने पांच अप्रैल को काठमांडू (नेपाल) से चढ़ाई शुरू की थी।
शिवांगी की माता आरती पाठक और पिता राजेश पाठक ने बताया कि जब शिवांगी 14 वर्ष की थी तो उसने एक प्रोत्साहित करने वाली वीडियो देखी थी, जिससे प्रभावित होकर शिवांगी ने कुछ ऐसा कार्य करने की ठान ली, जो सबसे अलग हो। इसी सोच के साथ उसने मेहनत व लगन के साथ पर्वतारोहण का प्रशिक्षण शुरू कर दिया। इस दौरान उसने केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि सहित कई कठिन पहाड़ियों पर चढ़ाई की। शिवांगी को ट्रैकिंग के दौरान सबसे अधिक समस्या अपने अधिक वजन को लेकर आ रही थी, जिसके लिए भी उसने कड़ी मेहनत कर और रिंकू पानू से प्रशिक्षण लेकर अपना वजन घटाया। एल्फा ग्रेड लेह लद्दाख 6053 मीटर की चढ़ाई पार करने के बाद शिवांगी ने माउंट एवरेस्ट को फतेह करने का संकल्प लिया। नेपाल की सात शिमटी एजेंसी ने उन्हें चढ़ाई की अनुमति प्रदान की। शिवांगी के माता-पिता ने बताया कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई का खर्च लगभग 35 लाख रुपये का था। बेटी की इच्छा को देखते हुए परिजनों को इसकी चिंता सताने लगी, क्योंकि इतना खर्च उठा पाना उनके सामर्थ्य से बाहर था। इसके लिए उन्होंने कई संस्थाओं से मदद की अपील भी की।
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अनीता कुंडू को मानती हैं प्रेरणास्रोत
परिजनों ने बताया कि शिवांगी के जन्म पर उस समय कुछ महिलाओं ने काफी अफसोस जताया था। अब वही शिवांगी उनका नाम रोशन कर रही है। शिवांगी के मामा अमित मुंजाल और अनिल चौधरी ने प्रोत्साहित किया और उसकी हर संभव सहायता भी की। शिवांगी अनीता कुंडू को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। उन्हीं से प्रेरणा पाकर उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने का निर्णय लिया
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