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पिता के भरोसे पर अगले साल एसडीएम बनने जा रहा हांसी का बेटा
Updated Sun, 18 Jun 2017 12:39 AM IST
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विनय गंगवानी
हांसी।
किसी भी बच्चे की जिंदगी में मां-बाप किस कदर अहम रोल अदा करते हैं। इस बात का अंदाजा हांसी निवासी अमित यादव के जीवन को देखकर लगाया जा सकता है। हांसी में एसडीएम आवास के निकट निवासी अमित यादव के जीवन में उस समय एक बड़ा मोड़ आया, जब वह रोहतक में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स की तैयारी के दौरान अमित ने सिविल सर्विस की तैयारी की सोची।
उनकी इस सोच पर परिजनों से लेकर दोस्तों, रिश्तेदारों सहित सभी ने नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हेें सिविल सर्विस में जाने के लिए मना किया, लेकिन अमित के पिता सतपाल यादव को उन पर भरोसा था। उन्होंने अमित का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वह डटकर सिविल सर्विस की तैयारी करे, वह उनके साथ है। इस पर अमित ने वह मुकाम हासिल किया कि उसने वर्ष 2015 में आईएएस के एंट्रेंस एग्जाम में पूरे देश में 51वीं रैंक हासिल की। अमित का कहना है कि देश के लिए समर्पण और कुछ करने की भावना के चलते उन्होंने यह फैसला लिया, जिस पर वह खरे उतरे।
अमित ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पिता को दिया है। अमित का कहना है कि किसी भी बच्चे के लिए उसके पहले अध्यापक उसके मां-बाप ही होते हैं। उसके पिता ने ही उन्हें जीवन में अच्छा आचरण सिखाया। उनसे प्रेरणा लेकर ही अमित ने कड़ी मेहनत और परिश्रम से कार्य किया और यह मुकाम हासिल किया। अमित शुरुआत से ही पढ़ाई में होशियार रहे हैं। हांसी के एसडी मॉडर्न स्कूल में भी उसने 12वीं में पूरे हांसी ब्लॉक में टॉप किया था।
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राजस्थान में कार्यरत
अमित ने बताया कि फिलहाल वह राजस्थान के नागौर जिले में असिस्टेंट कलक्टर (एसडीएम अंडर ट्रेनिंग) के पद पर कार्यरत है। करीब एक साल बाद ट्रेनिंग का कार्यकाल पूरा होने पर अगस्त 2018 में उन्हें किसी भी जिले में एसडीएम के पद पर तैनात किया जाएगा। अमित के पिता सतपाल यादव एक कारोबारी है। उनकी माता सुमित्रा यादव हाउस वाइफ है। अमित के भाई अंशुल यादव ने हाल ही में एलएलबी पूरी की है और वह भी दिल्ली में सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे थे।
ब्लड बैंक में की नौकरी, ताकि परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े
अमित ने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान वह रोहतक के एक ब्लड बैंक में नौकरी कर रहे थे, ताकि उनके परिजनों को आर्थिक तौर पर कोई दिक्कत न हो। इस पर उनके पिता सतपाल ने उनकी नौकरी छुड़वाते हुए कहा कि वह डटकर अपनी पढ़ाई कर लक्ष्य हासिल करे।
टॉप बॉक्स ..... फादर्स-डे के लिए विशेष .... फोटो - 28 और 29 में एक
पिता के भरोसे पर अगले साल एसडीएम बनने जा रहा हांसी का बेटा
- आईएएस के एंट्रेंस एग्जाम में पूरे देश में अमित यादव ने हासिल की 51वीं रैंक
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हांसी।
किसी भी बच्चे की जिंदगी में मां-बाप किस कदर अहम रोल अदा करते हैं। इस बात का अंदाजा हांसी निवासी अमित यादव के जीवन को देखकर लगाया जा सकता है। हांसी में एसडीएम आवास के निकट निवासी अमित यादव के जीवन में उस समय एक बड़ा मोड़ आया, जब वह रोहतक में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स की तैयारी के दौरान अमित ने सिविल सर्विस की तैयारी की सोची।
उनकी इस सोच पर परिजनों से लेकर दोस्तों, रिश्तेदारों सहित सभी ने नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हेें सिविल सर्विस में जाने के लिए मना किया, लेकिन अमित के पिता सतपाल यादव को उन पर भरोसा था। उन्होंने अमित का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वह डटकर सिविल सर्विस की तैयारी करे, वह उनके साथ है। इस पर अमित ने वह मुकाम हासिल किया कि उसने वर्ष 2015 में आईएएस के एंट्रेंस एग्जाम में पूरे देश में 51वीं रैंक हासिल की। अमित का कहना है कि देश के लिए समर्पण और कुछ करने की भावना के चलते उन्होंने यह फैसला लिया, जिस पर वह खरे उतरे।
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अमित ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पिता को दिया है। अमित का कहना है कि किसी भी बच्चे के लिए उसके पहले अध्यापक उसके मां-बाप ही होते हैं। उसके पिता ने ही उन्हें जीवन में अच्छा आचरण सिखाया। उनसे प्रेरणा लेकर ही अमित ने कड़ी मेहनत और परिश्रम से कार्य किया और यह मुकाम हासिल किया। अमित शुरुआत से ही पढ़ाई में होशियार रहे हैं। हांसी के एसडी मॉडर्न स्कूल में भी उसने 12वीं में पूरे हांसी ब्लॉक में टॉप किया था।
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राजस्थान में कार्यरत
अमित ने बताया कि फिलहाल वह राजस्थान के नागौर जिले में असिस्टेंट कलक्टर (एसडीएम अंडर ट्रेनिंग) के पद पर कार्यरत है। करीब एक साल बाद ट्रेनिंग का कार्यकाल पूरा होने पर अगस्त 2018 में उन्हें किसी भी जिले में एसडीएम के पद पर तैनात किया जाएगा। अमित के पिता सतपाल यादव एक कारोबारी है। उनकी माता सुमित्रा यादव हाउस वाइफ है। अमित के भाई अंशुल यादव ने हाल ही में एलएलबी पूरी की है और वह भी दिल्ली में सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे थे।
ब्लड बैंक में की नौकरी, ताकि परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े
अमित ने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान वह रोहतक के एक ब्लड बैंक में नौकरी कर रहे थे, ताकि उनके परिजनों को आर्थिक तौर पर कोई दिक्कत न हो। इस पर उनके पिता सतपाल ने उनकी नौकरी छुड़वाते हुए कहा कि वह डटकर अपनी पढ़ाई कर लक्ष्य हासिल करे।
टॉप बॉक्स ..... फादर्स-डे के लिए विशेष .... फोटो - 28 और 29 में एक
पिता के भरोसे पर अगले साल एसडीएम बनने जा रहा हांसी का बेटा
- आईएएस के एंट्रेंस एग्जाम में पूरे देश में अमित यादव ने हासिल की 51वीं रैंक