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12 साल पहले मृत बलदेव के नाम दिखाई गांव मोहला में मनरेगा मजदूरी
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नारनौंद। गांव मोहला के पूर्व सरपंच के कार्यकाल में मनरेगा योजना के तहत कि गए कार्यों में गोलमाल के आरोप सही पाए गए हैं। मामले की जांच हिसार पंचायती राज के डिप्टी सीईओ ने की है। पूर्व सरपंच ने सरकारी व प्राइवेट नौकरी करने वालों को भी मनरेगा में काम करते दर्शाया है। वहीं 12 साल पहले मृत व्यक्ति से भी मनरेगा मजदूरी करवा दी। गांव के ही रामकुमार ने आरटीआई से रिकॉर्ड मांग कर इस पूरे मामले का खुलासा किया। हांसी द्वितीय के बीडीपीओ ने पूर्व सरपंच सुरेश कुमार के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश बास पुलिस को दिए थे। मगर पुलिस दो साल बाद जागी है। पुलिस ने अब आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
आरोप है कि पूर्व सरपंच सुरेश कुमार ने मरे हुए लोगों, सरकारी कर्मचारियों व अपने ही परिवार के गलत तरीके से मनरेगा में जॉब कार्ड तैयार करवाए। 2017 में आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी में इसका खुलासा हुआ। डिप्टी सीईओ की जांच में अनेक अनियमितताएं पाई गईं। पूर्व सरपंच ने खुद अपने जॉब कार्ड नंबर 19849 में मजदूरी की। साथ ही अपने भाई बलराज, नरेश व पिता रामा को भी मजदूरी करते दिखाया। जांच में आया कि इन लोगों ने कभी भी मजदूरी नहीं की। मस्ट्रोल नंबर 1161 में 17 मार्च 2011 से लेकर 23 मार्च 2011 तक बलदेव पुत्र लहरी को मनरेगा में मजदूरी करते दर्शाया है, जिसकी एवज में 1253 रुपये जारी किए गए जबकि 23 मार्च 2007 को बलदेव की मौत हो चुकी थी। इसी तरह 2011-2012 में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले मोनू को भी मजदूर दर्शाया है, इसी दौरान उसकी स्कूल में भी हाजिरी लगी हुई है। डिप्टी सीईओ ने जांच में सरपंच, ग्राम सचिव व मेट के खिलाफ आरोप सिद्ध पाए। डीसी ने 13 दिसंबर 2017 को हांसी द्वितीय खंड के बीडीपीओ को पत्र लिखकर इन सभी के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे। बीडीपीओ ने 6 मार्च 2018 को बास पुलिस को पत्र लिखकर केस दर्ज करने को कहा। मगर दो साल तक मामले में बास पुलिस ने शिकायत को दबाए रखा।
बीडीपीओ की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए जाएंगे। उसके बाद आरोपी को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - बिजेंद्र सिंह, प्रभारी, बास थाना।
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आरोप है कि पूर्व सरपंच सुरेश कुमार ने मरे हुए लोगों, सरकारी कर्मचारियों व अपने ही परिवार के गलत तरीके से मनरेगा में जॉब कार्ड तैयार करवाए। 2017 में आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी में इसका खुलासा हुआ। डिप्टी सीईओ की जांच में अनेक अनियमितताएं पाई गईं। पूर्व सरपंच ने खुद अपने जॉब कार्ड नंबर 19849 में मजदूरी की। साथ ही अपने भाई बलराज, नरेश व पिता रामा को भी मजदूरी करते दिखाया। जांच में आया कि इन लोगों ने कभी भी मजदूरी नहीं की। मस्ट्रोल नंबर 1161 में 17 मार्च 2011 से लेकर 23 मार्च 2011 तक बलदेव पुत्र लहरी को मनरेगा में मजदूरी करते दर्शाया है, जिसकी एवज में 1253 रुपये जारी किए गए जबकि 23 मार्च 2007 को बलदेव की मौत हो चुकी थी। इसी तरह 2011-2012 में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले मोनू को भी मजदूर दर्शाया है, इसी दौरान उसकी स्कूल में भी हाजिरी लगी हुई है। डिप्टी सीईओ ने जांच में सरपंच, ग्राम सचिव व मेट के खिलाफ आरोप सिद्ध पाए। डीसी ने 13 दिसंबर 2017 को हांसी द्वितीय खंड के बीडीपीओ को पत्र लिखकर इन सभी के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे। बीडीपीओ ने 6 मार्च 2018 को बास पुलिस को पत्र लिखकर केस दर्ज करने को कहा। मगर दो साल तक मामले में बास पुलिस ने शिकायत को दबाए रखा।
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बीडीपीओ की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए जाएंगे। उसके बाद आरोपी को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - बिजेंद्र सिंह, प्रभारी, बास थाना।
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