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कांग्रेसियों के लिए उम्मीदवारी के खुले रास्ते, गुटबाजी भुनाएगी भाजपा-इनेलो
Updated Fri, 30 Nov 2018 01:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। कांग्रेस का सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लेकर कांग्रेस हाईकमान ने अपने कई समर्थकों के लिए मेयर चुनाव में उम्मीदवारी के रास्ते खोल दिए हैं। अब अलग-अलग नेताओं के समर्थक खुले तौर पर मैदान में उतर सकेंगे। इससे मेयर पद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। दूसरी ओर भाजपा और इनेलो के अलावा दुष्यंत चौटाला खेमे के पास कांग्रेस की इस गुटबाजी को भुनाने का मौका होगा। बुधवार को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के निर्देश पर जिला प्रभारी बिजेंद्र कादियान के समक्ष बॉयोडाटा जमा करवाने वाले 11 दावेदारों में अधिकतर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे।
कांग्रेस को यह होगा फायदा और नुकसान
सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ने से कांग्रेस को फायदा और नुकसान दोनों होंगे। नुकसान यह होगा कि गुटों में बंटी कांग्रेस सिर्फ चुनाव निशान पर एक हो सकती थी। मगर अब पार्टी के मतदाता अलग-अलग प्रत्याशियों की तरफ बंट जाएंगे। इससे मेयर चुनाव में जीत हासिल करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। वहीं फायदा यह होगा कि अगर कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखने वाला प्रत्याशी चुनाव जीत जाता है तो पार्टी सीधे तौर पर विजयी उम्मीदवार पर अपना दावा जता सकेगी।
भाजपा को ऐसे मिलेगा फायदा, यह होगा नुकसान
कांग्रेस की इस गुटबाजी के कारण मेयर चुनाव में सिंबल पर चुनाव लड़ रही भाजपा को भी कुछ नुकसान और कुछ फायदा मिलेगा। नुकसान यह होगा कि भाजपा को अब सीधे तौर पर एक प्रत्याशी हराने के बजाय कई दिग्गजों को टक्कर देनी पड़ेगी। वहीं फायदा यह मिलेगा कि अलग-अलग प्रत्याशी बनने से कांग्रेस का वोट बैंक बंट जाएगा और भाजपा अगर एकजुटता बनाए रखती है तो मेयर पद पर जीतने में आसानी हो सकती है।
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इनेलो के सामने फूट के बाद ताकत दिखाने का मौका
ऐसे माहौल में अब इनेलो के सामने पारिवारिक फूट के बाद ताकत दिखाने का मौका है। अगर इनेलो सिंबल पर चुनाव लड़ती है तो कार्यकर्ताओं में उत्साह आएगा और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एकजुट का पता चलेगा। वहीं इनेलो के लिए चिंताजनक बात यह है कि हिसार में दुष्यंत समर्थकों की संख्या अधिक होने के कारण उसे नुकसान झेलना पड़ सकता है।
अब दुष्यंत खेमे के प्रत्याशी का भी इंतजार
वहीं धीरे-धीरे जोर पकड़ रहे चुनाव में मेयर पद पर दुष्यंत चौटाला खेमे के प्रत्याशी का भी शहरवासियों को इंतजार है। अब तक दुष्यंत ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि सूत्रों की मानें तो दुष्यंत खेमा भी शहर में ज्यादा वोट बैंक वाले पंजाबी या अग्रवाल समाज से ही कोई प्रत्याशी चुनने के मूड में हैं। मगर फिलहाल दुष्यंत की टीम के 9 दिसंबर की रैली में व्यस्त होने के कारण प्रत्याशी फाइनल करने में समय लग रहा है।
जिंदल हाउस का समर्थन लेना हो जाएगा जरूरी
वहीं मेयर पद का चुनाव लड़ने के इच्छुक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के लिए जिंदल हाउस का समर्थन लेना जरूरी हो जाएगा। पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल के हिसार से चुनाव लड़ने के कारण शहरी मतदाताओं में उनका सबसे अधिक प्रभाव है। उनके बाद आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई की भी अच्छी पकड़ है। ऐसे में जो भी उम्मीदवार मैदान में आएगा, उसे इन दोनों नेताओं के समर्थन की जरूरत रहेगी। पिछली बार भी निर्दलीय चुनाव लड़ रही शकुंतला राजलीवाला को जिंदल हाउस से समर्थन प्राप्त था।
कार्यकर्ताओं की भावना तो पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ने की थी। मगर केंद्रीय नेतृत्व ने जो फैसला किया है, उसके अनुसार ही चलेंगे। बाकी प्रदेशाध्यक्ष भी दिशानिर्देश देंगे, उसी अनुसार कार्यकर्ताओं को निगम चुनाव के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बिजेंद्र कादियान, जिला प्रभारी, कांग्रेस
इनेलो-बसपा गठबंधन की ओर से मेयर पद के लिए जल्द ही मजबूत प्रत्याशी दिया जाएगा। कई दावेदार सामने आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर निश्चित रूप से हम निगम चुनावों में विजयी भी होंगे।
-सतबीर सिसाय, जिलाध्यक्ष, इनेलो
कांग्रेस ने सिंबल पर चुनाव न लड़ने का फैसला लेकर चुनाव से पहले ही हार मान ली है। राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते सिंबल पर चुनाव लड़ना चाहिए था। जिसको हार का डर है, वह सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर कमल खिलाएगी।
-सुजीत कुमार, जिला महामंत्री, भाजपा
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हिसार। कांग्रेस का सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लेकर कांग्रेस हाईकमान ने अपने कई समर्थकों के लिए मेयर चुनाव में उम्मीदवारी के रास्ते खोल दिए हैं। अब अलग-अलग नेताओं के समर्थक खुले तौर पर मैदान में उतर सकेंगे। इससे मेयर पद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। दूसरी ओर भाजपा और इनेलो के अलावा दुष्यंत चौटाला खेमे के पास कांग्रेस की इस गुटबाजी को भुनाने का मौका होगा। बुधवार को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के निर्देश पर जिला प्रभारी बिजेंद्र कादियान के समक्ष बॉयोडाटा जमा करवाने वाले 11 दावेदारों में अधिकतर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे।
कांग्रेस को यह होगा फायदा और नुकसान
सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ने से कांग्रेस को फायदा और नुकसान दोनों होंगे। नुकसान यह होगा कि गुटों में बंटी कांग्रेस सिर्फ चुनाव निशान पर एक हो सकती थी। मगर अब पार्टी के मतदाता अलग-अलग प्रत्याशियों की तरफ बंट जाएंगे। इससे मेयर चुनाव में जीत हासिल करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। वहीं फायदा यह होगा कि अगर कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखने वाला प्रत्याशी चुनाव जीत जाता है तो पार्टी सीधे तौर पर विजयी उम्मीदवार पर अपना दावा जता सकेगी।
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भाजपा को ऐसे मिलेगा फायदा, यह होगा नुकसान
कांग्रेस की इस गुटबाजी के कारण मेयर चुनाव में सिंबल पर चुनाव लड़ रही भाजपा को भी कुछ नुकसान और कुछ फायदा मिलेगा। नुकसान यह होगा कि भाजपा को अब सीधे तौर पर एक प्रत्याशी हराने के बजाय कई दिग्गजों को टक्कर देनी पड़ेगी। वहीं फायदा यह मिलेगा कि अलग-अलग प्रत्याशी बनने से कांग्रेस का वोट बैंक बंट जाएगा और भाजपा अगर एकजुटता बनाए रखती है तो मेयर पद पर जीतने में आसानी हो सकती है।
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इनेलो के सामने फूट के बाद ताकत दिखाने का मौका
ऐसे माहौल में अब इनेलो के सामने पारिवारिक फूट के बाद ताकत दिखाने का मौका है। अगर इनेलो सिंबल पर चुनाव लड़ती है तो कार्यकर्ताओं में उत्साह आएगा और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एकजुट का पता चलेगा। वहीं इनेलो के लिए चिंताजनक बात यह है कि हिसार में दुष्यंत समर्थकों की संख्या अधिक होने के कारण उसे नुकसान झेलना पड़ सकता है।
अब दुष्यंत खेमे के प्रत्याशी का भी इंतजार
वहीं धीरे-धीरे जोर पकड़ रहे चुनाव में मेयर पद पर दुष्यंत चौटाला खेमे के प्रत्याशी का भी शहरवासियों को इंतजार है। अब तक दुष्यंत ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि सूत्रों की मानें तो दुष्यंत खेमा भी शहर में ज्यादा वोट बैंक वाले पंजाबी या अग्रवाल समाज से ही कोई प्रत्याशी चुनने के मूड में हैं। मगर फिलहाल दुष्यंत की टीम के 9 दिसंबर की रैली में व्यस्त होने के कारण प्रत्याशी फाइनल करने में समय लग रहा है।
जिंदल हाउस का समर्थन लेना हो जाएगा जरूरी
वहीं मेयर पद का चुनाव लड़ने के इच्छुक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के लिए जिंदल हाउस का समर्थन लेना जरूरी हो जाएगा। पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल के हिसार से चुनाव लड़ने के कारण शहरी मतदाताओं में उनका सबसे अधिक प्रभाव है। उनके बाद आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई की भी अच्छी पकड़ है। ऐसे में जो भी उम्मीदवार मैदान में आएगा, उसे इन दोनों नेताओं के समर्थन की जरूरत रहेगी। पिछली बार भी निर्दलीय चुनाव लड़ रही शकुंतला राजलीवाला को जिंदल हाउस से समर्थन प्राप्त था।
कार्यकर्ताओं की भावना तो पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ने की थी। मगर केंद्रीय नेतृत्व ने जो फैसला किया है, उसके अनुसार ही चलेंगे। बाकी प्रदेशाध्यक्ष भी दिशानिर्देश देंगे, उसी अनुसार कार्यकर्ताओं को निगम चुनाव के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बिजेंद्र कादियान, जिला प्रभारी, कांग्रेस
इनेलो-बसपा गठबंधन की ओर से मेयर पद के लिए जल्द ही मजबूत प्रत्याशी दिया जाएगा। कई दावेदार सामने आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर निश्चित रूप से हम निगम चुनावों में विजयी भी होंगे।
-सतबीर सिसाय, जिलाध्यक्ष, इनेलो
कांग्रेस ने सिंबल पर चुनाव न लड़ने का फैसला लेकर चुनाव से पहले ही हार मान ली है। राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते सिंबल पर चुनाव लड़ना चाहिए था। जिसको हार का डर है, वह सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर कमल खिलाएगी।
-सुजीत कुमार, जिला महामंत्री, भाजपा