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अनाज मंडी के हालात

Sun, 01 Apr 2018 01:05 AM IST
Updated Sun, 01 Apr 2018 01:05 AM IST
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अनाज मंडी के हालात
अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
दोपहर के 12 बजे हैं, अमर उजाला की टीम गेहूं खरीद की तैयारियों का जायजा लेने अनाज मंडी पहुंची। शेड नंबर एक के नीचे के हालात देखे तो वहां कुछ हिस्से में सरसों की ढेरियां थीं तो कुछ हिस्से में आढ़तियों की सरसों से भरी बोरियां रखी थीं। दुकान नंबर 112 के सामने शेड के साथ लगती जगह पर सरसों की ढेरियों की सफाई में मजदूर जुटे थे। थोड़ा सा आगे चलने पर आढ़ती सरसों की बोली लगाते नजर आए। जब आढ़तियों से गेहूं खरीद शुरू होने की तैयारियों को लेकर पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभी तो गेहूं की फसल कट रही है। मंडी में एक अप्रैल से सरकार ने खरीद शुरू करने के आदेश जारी किए हैं, लेकिन 10 अप्रैल के बाद ही आवक जोर पकड़ेगी। जब उनसे मंडी की समस्याओं के बारे में पूछा तो वहां मौजूद आढ़ती एसोसिएशन के सचिव अनूप बिजला ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या बरसात के समय में अनाज को बचाने की होती है। इस बार भी अप्रैल में बरसात हुई तो अनाज मंडी में रखा अनाज भीगना तय है। जगह की कमी के कारण गेहूं खुले में रखना मजबूरी होती है।
सड़कों पर भी डालना पड़ता है गेहूं
आढ़ती आरके गोयल और संतलाल ने बताया कि ढाई साल से नया शेड बनवाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। ऐसे में गेहूं खराब होने की पूरी आशंका है। 10 अप्रैल के बाद तो हर रोज 40 से 50 हजार क्विंटल गेहूं अनाज मंडी में आएगा। जगह कम पड़ने पर मजबूरी में सड़कों पर भी गेहूं डालनी पड़ेगी।
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पर्याप्त नहीं धक्का बस्ती में लगा डिस्पोजल
आढ़तियों के अनुसार अनाज मंडी में बरसाती पानी निकालने के लिए धक्का बस्ती में डिस्पोजल बना हुआ है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। बरसात आने पर हर बार गेहूं भीगता है। निचले इलाके में बरसाती पानी जमा होना तो आम बात है। रेस्ट हाउस की तरफ नए शेड की मांग भी इसलिए ही की जा रही है, ताकि कुछ बचाव हो सके।
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भाई हामनै कोई फायदा ना होया सरकार के आदेशां का
चाय की दुकान के पास बोरियों पर बैठे गांव खेड़ी बर्की के किसान धर्मपाल से जब फसलों की खरीद के मुद्दे पर बात की तो उनका दर्द छलक पड़ा। धर्मपाल ने ठेठ हरियाणवी में कहा कि भाई सरकार नै आदेश करे थे कि सरसों चार हजार रपिये क्विंटल खरीदांगे। पर इन आदेशां का हामनै कोई फायदा नहीं मिल्या। म्हारी सरसों तो 3200 तै 3400 रपियां तक ही बिकी सै। कुछ नी होणा, किसान तो सदां ए पीटता रहवैगा, चाहे कोई सरकार आ ज्यो।
फर्द के लिए चक्कर काट रहे किसान
पास बैठे शाहपुर के किसान राजेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकार नै 25 क्विंटल सरसों खरीदण की बात कही सै। जै किसे किसान के खेत म्ह 400 क्विंटल सरसों हो तो 375 क्विंटल का वो कै करैगा। 25 क्विंटल म्ह तै भी पूरी सरसों नहीं खरीद रहे। इसी तरह भूना के गांव ढाणी सांथला से आए किसान महेंद्र जांगड़ा ने कहा कि फर्द की शर्त ने भी परेशान कर दिया है। फर्द लाने के लिए कभी पटवारी तो कभी तहसीलदार के यहां चक्कर काट रहे हैं।


उठान टाइम से हो जाए, यही बहुत है
आढ़तियों का कहना था कि पानी, बिजली, शौचालय औरर सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं तो पर्याप्त हैं। बारदाने की भी इस समय कमी नहीं है। नियमों के मुताबिक 72 घंटे में उठान होना चाहिए, लेकिन आवक बढ़ने पर 15 दिन तक भी उठान नहीं होता है। प्रशासन उठान टाइम पर करवा दे, हमारे लिए यही बहुत है। सुरक्षा के लिए तो एसोसिएशन ने अपने स्तर पर रात में छह और दिन के लिए पांच चौकीदार रखे हुए हैं।

अनाज मंडी में कुल दुकानें - 350
अनाज मंडी में बूथ - 90 से 100
अनाज मंडी में शेड - 6
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