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सेक्टरवासियों के धरने में घुसी राजनीति , हंगामे के बाद हाथापाई पर उतरे
Updated Thu, 12 Apr 2018 01:48 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
इन्हांसमेंट के विरोध में धरने पर बैठे सेक्टरवासियों को राजनेता समर्थन करने आए तो धरने पर हंगामा हो गया। मामला हाथापाई तक पहुंचते पहुंचते थमा। रेजीडेंट एसोसिएशन जिला हिसार के प्रधान दलबीर किरमारा और सेक्टर 16-17 के महासचिव नरेंद्र पिलानिया में खूब कहासुनी हुई। दोनों एक दूसरे के साथ मारपीट पर उतारू हो गए। कुछ लोगों ने बीच-बचाव कराया।
धरने पर पहुंचे पूर्व मंत्री संपत सिंह ने कहा कि मैं किसी से डरकर समर्थन करने नहीं आया हूं। कुछ लोगों ने मीडिया में बयान दिया है कि जो राजनीति दल समर्थन नहीं करेंगे उनको सेक्टर में नहीं घुसने देंगे। यह मामला सेक्टर के लोगों का जनहित का मुद्दा है। इस कारण समर्थन करने आए। भाषण देने के बाद संपत सिंह चले गए। इसके बाद संबोधित करते हुए ऑल सेक्टर आरडब्ल्यूए के प्रधान दलबीर किरमारा ने कहा कि हमने तो सभी सीएम झुकाए हैं। जो लोग पहले मंत्री रहे वे भी इन्हांसमेंट के लिए जिम्मेदार हैं। दस साल तक कांग्रेस की सरकार भी रही। उस समय इन्हांसमेंट के मुद्दे का हल नहीं किया गया। आज के नेता विधानसभा और लोकसभा में आवाज उठाने की बजाए सदन को स्थगित कराने में लगे रहते हैं। अगर हम सेक्टरवासियों के समर्थन के लिए राजनेताओं के बहिष्कार का एलान नहीं करते तो राजनीतिक दल हमारा समर्थन करने नहीं आते। दलबीर किरमारा के बाद यशवीर मलिक ने संबोधित किया। धरना समाप्त होने के बाद सेक्टर 16-17 के महासचिव नरेंद्र पिलानिया ने आक्रोशित होकर दलबीर किरमारा की ओर आए। नरेंद्र पिलानिया ने कहा कि इस तरह से राजनेताओं का अपमान करने का अधिकार दलबीर किरमारा को किसने दिया। नरेंद्र पिलानिया ने हाथापाई का प्रयास भी किया। कुछ लोगों ने उन्हें मुश्किल से रोका।
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फर्जी गणना से लाखों नहीं वसूलने देंगे
धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान दलबीर किरमारा ने की। मंच संचालन महासचिव त्रिलोक बंसल व 16-17 के प्रधान जितेंद्र श्योराण ने किया। दलबीर किरमारा ने कहा कि सेक्टरवासियों पर डाली गई इन्हांसमेंट का हुडा विभाग के अधिकारी हिसाब दें। फर्जी गणना से सेक्टरवासियों को लाखों रुपये वसूलने का प्रयास हो रहा है। सेक्टरवासी पिछले पंद्रह दिनों से धरना दे रहे हैं।
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यह रहे मौजूद
धरने मे कुलदीप वत्स, अमित ग्रोवर, प्रवीण जैन, अमरलाल बूरा, रामनिवास आदमपुरिया, राकेश आर्य, कर्नल चत्तर सिंह गोयत, बलंवत बूरा, डॉ. बलबीर डांडी, सूबे सिंह लाठर, सुभाष जैन, मनोज सैनी, वासुदेव शर्मा, कुलबीर दुहन, रामभगत मलिक, सुजान सिंह बैनीवाल, एसवी आर्य, चंद्र रेडडु, दिनेश बिश्नोई, संदीप बामल, राजीव अस्थाना, प्रवीन खुराना, पायल बिस्वास, रोजी आदि मौजूद रहे।
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इन्होंने किया समर्थन
पूर्व मंत्री संपत सिंह, इनेलो के जिला प्रधान राजेन्द्र लितानी, बरवाला विधायक वेद नारंग, उकलाला विधायक अनूप धानक, शीला भयाण, अमित बूरा, माकपा की जिला सचिव शकुंतला जाखड़, कामरेड सुरेश, दिनेश सिवाच, बसपा की ओर से सुरेंद्र पंघाल, नागरिक मंच के जिलाध्यक्ष आरसी जग्गा, रणदीप सुरजेवाला के प्रतिनिधी राजेश संदलाना आदि ने समर्थन दिया।
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इन्हांसमेंट नोटिस सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ
पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार सेक्टरवासियों का खून चूसना बंद करे। सरकार इन्हांसमेंट के नोटिस तुरंत वापस लें। इन्हांसमेंट ने कई दिनों से नींद हराम कर रखी है। नोटिस सर्वोच्च न्यायालय के चरणजीत बजाज बनाम हरियाणा सरकार सीडब्ल्यूपी नंबर-1270 ऑफ 1985 डी/डी 8.7.1986 केस के फैसले के खिलाफ है। न्यायालय ने आदेश दिया था कि इन्हांसमेंट का बोझ रिहायशी प्लॉटों पर ना डालकर सेक्टरों में बची हुई व्यावसायिक भूमि को बेचकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। सेक्टर-15 पार्ट में व्यवसायिक उद्देश्य के लिए 100 एकड़ खाली पड़ी भूमि को बेचा जाए तो इन्हांसमेंट का भुगतान किया जा सकता है।
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हिसार।
इन्हांसमेंट के विरोध में धरने पर बैठे सेक्टरवासियों को राजनेता समर्थन करने आए तो धरने पर हंगामा हो गया। मामला हाथापाई तक पहुंचते पहुंचते थमा। रेजीडेंट एसोसिएशन जिला हिसार के प्रधान दलबीर किरमारा और सेक्टर 16-17 के महासचिव नरेंद्र पिलानिया में खूब कहासुनी हुई। दोनों एक दूसरे के साथ मारपीट पर उतारू हो गए। कुछ लोगों ने बीच-बचाव कराया।
धरने पर पहुंचे पूर्व मंत्री संपत सिंह ने कहा कि मैं किसी से डरकर समर्थन करने नहीं आया हूं। कुछ लोगों ने मीडिया में बयान दिया है कि जो राजनीति दल समर्थन नहीं करेंगे उनको सेक्टर में नहीं घुसने देंगे। यह मामला सेक्टर के लोगों का जनहित का मुद्दा है। इस कारण समर्थन करने आए। भाषण देने के बाद संपत सिंह चले गए। इसके बाद संबोधित करते हुए ऑल सेक्टर आरडब्ल्यूए के प्रधान दलबीर किरमारा ने कहा कि हमने तो सभी सीएम झुकाए हैं। जो लोग पहले मंत्री रहे वे भी इन्हांसमेंट के लिए जिम्मेदार हैं। दस साल तक कांग्रेस की सरकार भी रही। उस समय इन्हांसमेंट के मुद्दे का हल नहीं किया गया। आज के नेता विधानसभा और लोकसभा में आवाज उठाने की बजाए सदन को स्थगित कराने में लगे रहते हैं। अगर हम सेक्टरवासियों के समर्थन के लिए राजनेताओं के बहिष्कार का एलान नहीं करते तो राजनीतिक दल हमारा समर्थन करने नहीं आते। दलबीर किरमारा के बाद यशवीर मलिक ने संबोधित किया। धरना समाप्त होने के बाद सेक्टर 16-17 के महासचिव नरेंद्र पिलानिया ने आक्रोशित होकर दलबीर किरमारा की ओर आए। नरेंद्र पिलानिया ने कहा कि इस तरह से राजनेताओं का अपमान करने का अधिकार दलबीर किरमारा को किसने दिया। नरेंद्र पिलानिया ने हाथापाई का प्रयास भी किया। कुछ लोगों ने उन्हें मुश्किल से रोका।
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फर्जी गणना से लाखों नहीं वसूलने देंगे
धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान दलबीर किरमारा ने की। मंच संचालन महासचिव त्रिलोक बंसल व 16-17 के प्रधान जितेंद्र श्योराण ने किया। दलबीर किरमारा ने कहा कि सेक्टरवासियों पर डाली गई इन्हांसमेंट का हुडा विभाग के अधिकारी हिसाब दें। फर्जी गणना से सेक्टरवासियों को लाखों रुपये वसूलने का प्रयास हो रहा है। सेक्टरवासी पिछले पंद्रह दिनों से धरना दे रहे हैं।
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यह रहे मौजूद
धरने मे कुलदीप वत्स, अमित ग्रोवर, प्रवीण जैन, अमरलाल बूरा, रामनिवास आदमपुरिया, राकेश आर्य, कर्नल चत्तर सिंह गोयत, बलंवत बूरा, डॉ. बलबीर डांडी, सूबे सिंह लाठर, सुभाष जैन, मनोज सैनी, वासुदेव शर्मा, कुलबीर दुहन, रामभगत मलिक, सुजान सिंह बैनीवाल, एसवी आर्य, चंद्र रेडडु, दिनेश बिश्नोई, संदीप बामल, राजीव अस्थाना, प्रवीन खुराना, पायल बिस्वास, रोजी आदि मौजूद रहे।
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इन्होंने किया समर्थन
पूर्व मंत्री संपत सिंह, इनेलो के जिला प्रधान राजेन्द्र लितानी, बरवाला विधायक वेद नारंग, उकलाला विधायक अनूप धानक, शीला भयाण, अमित बूरा, माकपा की जिला सचिव शकुंतला जाखड़, कामरेड सुरेश, दिनेश सिवाच, बसपा की ओर से सुरेंद्र पंघाल, नागरिक मंच के जिलाध्यक्ष आरसी जग्गा, रणदीप सुरजेवाला के प्रतिनिधी राजेश संदलाना आदि ने समर्थन दिया।
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इन्हांसमेंट नोटिस सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ
पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार सेक्टरवासियों का खून चूसना बंद करे। सरकार इन्हांसमेंट के नोटिस तुरंत वापस लें। इन्हांसमेंट ने कई दिनों से नींद हराम कर रखी है। नोटिस सर्वोच्च न्यायालय के चरणजीत बजाज बनाम हरियाणा सरकार सीडब्ल्यूपी नंबर-1270 ऑफ 1985 डी/डी 8.7.1986 केस के फैसले के खिलाफ है। न्यायालय ने आदेश दिया था कि इन्हांसमेंट का बोझ रिहायशी प्लॉटों पर ना डालकर सेक्टरों में बची हुई व्यावसायिक भूमि को बेचकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। सेक्टर-15 पार्ट में व्यवसायिक उद्देश्य के लिए 100 एकड़ खाली पड़ी भूमि को बेचा जाए तो इन्हांसमेंट का भुगतान किया जा सकता है।