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Haryana: सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, बिना अनुमति के 4 वर्षीय BA-बीएड कोर्स शुरू कर छात्रों के भविष्य से खेला
Sat, 18 Oct 2025 08:26 AM IST
नवीन दलाल
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: नवीन दलाल
Updated Sat, 18 Oct 2025 08:26 AM IST
सार
अदालत ने कहा कि यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और अब यह तय करना आवश्यक है कि इस स्थिति के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार है और प्रभावित छात्रों को किस प्रकार से क्षतिपूर्ति दी जाएगी।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि राज्य के अधिकारियों ने बिना राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद की अनिवार्य स्वीकृति के चार वर्षीय बीए/बीएड कोर्स में छात्रों का दाखिला कर गंभीर लापरवाही की है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला राज्य सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कर्तव्य की घोर उपेक्षा का है जिन्होंने बिना अनुमति के डिग्री कोर्स शुरू कराया और सैकड़ों छात्रों के करियर से खिलवाड़ किया।
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अदालत ने कहा कि यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और अब यह तय करना आवश्यक है कि इस स्थिति के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार है और प्रभावित छात्रों को किस प्रकार से क्षतिपूर्ति दी जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से दायर जवाब में बताया गया कि सरकार ने 11 जुलाई 2020 को एनसीटीई को जो आवेदन भेजा था, वह वास्तव में आवेदन कहलाने योग्य भी नहीं था।
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उसमें संस्थानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं दी गई थीं और केवल बाद में देने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद राज्य ने कुरुक्षेत्र और गुरुग्राम स्थित दो नए शिक्षा संस्थानों में छात्रों का दाखिला शुरू कर दिया। अदालत ने पाया कि चूंकि एनसीटीई के नियमों में पूर्व प्रभाव से अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए इन पाठ्यक्रमों को मान्यता नहीं दी जा सकती।
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इस पर कोर्ट ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें, जिसमें यह स्पष्ट बताया जाए कि किन अधिकारियों की लापरवाही से यह स्थिति बनी और राज्य सरकार दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई तथा छात्रों को क्या मुआवजा देने की योजना बना रही है। मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर के लिए निर्धारित की गई है।