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सरकारी स्कूलों में बच्चों से बेगारी
रानियां/सिरसा/ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2013 11:56 PM IST
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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बच्चों से पढ़ाई की जगह काम करवाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
रानियां के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छह और सातवीं के बच्चों से स्कूल परिसर की साफ-सफाई करवाई जा रही है।
बीते शनिवार को फतेहाबाद जिले के गांव भडौलावाली के राजकीय मिडल स्कूल में तो शिक्षकों की इस लापरवाही से एक बच्चे की जान ही चली गई।
अध्यापक ने बच्चे को टहनियां काटने के लिए पेड़ पर चढ़ाया था। वहां से गिरकर बच्चे की मौत हो गई। मंगलवार को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने दो अध्यापकाें को निलंबित कर, एक के निलंबन के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग के निदेशक को सिफारिश की है।
वहीं, बहादुरगढ़ के गांव टांडाहेड़ी में भी तीन सितंबर को सरकार स्कूली में बच्चों से मिट्टी खुदवाने का मामला सामने आया था।
वहीं कुछ दिन पहले फरीदाबाद के एक स्कूल में बच्चों से काम कराने पर अध्यापकों का एक दिन का वेतन काट लिया गया था।
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाया कम और परिसर की सफाई ज्यादा करवाई जाती है। रानियां के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छह और सातवीं के बच्चे झाड़ू, कस्सी और बट्ठल उठाए देखने को मिलते हैं।
स्कूल पहुंचने पर सुबह-सुबह सफाई के बाद ही पढ़ाई शुरू होती है। उधर, बच्चों से परिसर की सफाई करवाना खंड स्तर के अधिकारियों की नजर में सामान्य-सी बात है।
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बता दें कि राज्य के कई अन्य स्कूलों में भी बच्चों से काम करवाने का मामला सामने आ चुका है।
स्कूल में सफाई कर्मचारी होने के बावजूद अध्यापक छात्रों से परिसर की सफाई करवाते हैं। अध्यापक बच्चों को पढ़ाने की बजाय उनसे सफाई करवाकर अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं।
उधर, अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, साफ-सफाई करने के लिए नहीं। अध्यापकों के इस रवैये के बाद स्कूलों के परिणाम का आंकलन खुद ही किया जा सकता है।
बच्चों के मुताबिक थोड़ी देरी से पंहुचने पर उन्हें स्कूल से बाहर कर दिया जाता है। सफाई करवाना तो रोजाना का कार्य है। गर्मी अधिक होने से बच्चे कई बार बेहोश भी हो चुके हैं। अभिभावकों ने प्रशासन से अध्यापकों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
स्कूल परिसर में थोड़ी गंदगी आदि होने पर कभी-कभार बच्चों से सफाई करवाई जाती है।
-महल सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी एवं प्राचार्य
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रानियां के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छह और सातवीं के बच्चों से स्कूल परिसर की साफ-सफाई करवाई जा रही है।
बीते शनिवार को फतेहाबाद जिले के गांव भडौलावाली के राजकीय मिडल स्कूल में तो शिक्षकों की इस लापरवाही से एक बच्चे की जान ही चली गई।
अध्यापक ने बच्चे को टहनियां काटने के लिए पेड़ पर चढ़ाया था। वहां से गिरकर बच्चे की मौत हो गई। मंगलवार को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने दो अध्यापकाें को निलंबित कर, एक के निलंबन के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग के निदेशक को सिफारिश की है।
वहीं, बहादुरगढ़ के गांव टांडाहेड़ी में भी तीन सितंबर को सरकार स्कूली में बच्चों से मिट्टी खुदवाने का मामला सामने आया था।
वहीं कुछ दिन पहले फरीदाबाद के एक स्कूल में बच्चों से काम कराने पर अध्यापकों का एक दिन का वेतन काट लिया गया था।
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाया कम और परिसर की सफाई ज्यादा करवाई जाती है। रानियां के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छह और सातवीं के बच्चे झाड़ू, कस्सी और बट्ठल उठाए देखने को मिलते हैं।
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स्कूल पहुंचने पर सुबह-सुबह सफाई के बाद ही पढ़ाई शुरू होती है। उधर, बच्चों से परिसर की सफाई करवाना खंड स्तर के अधिकारियों की नजर में सामान्य-सी बात है।
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बता दें कि राज्य के कई अन्य स्कूलों में भी बच्चों से काम करवाने का मामला सामने आ चुका है।
स्कूल में सफाई कर्मचारी होने के बावजूद अध्यापक छात्रों से परिसर की सफाई करवाते हैं। अध्यापक बच्चों को पढ़ाने की बजाय उनसे सफाई करवाकर अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं।
उधर, अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, साफ-सफाई करने के लिए नहीं। अध्यापकों के इस रवैये के बाद स्कूलों के परिणाम का आंकलन खुद ही किया जा सकता है।
बच्चों के मुताबिक थोड़ी देरी से पंहुचने पर उन्हें स्कूल से बाहर कर दिया जाता है। सफाई करवाना तो रोजाना का कार्य है। गर्मी अधिक होने से बच्चे कई बार बेहोश भी हो चुके हैं। अभिभावकों ने प्रशासन से अध्यापकों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
स्कूल परिसर में थोड़ी गंदगी आदि होने पर कभी-कभार बच्चों से सफाई करवाई जाती है।
-महल सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी एवं प्राचार्य