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बिना पंजीकरण के चल रहे हैं लैब
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Tue, 09 Jun 2015 12:59 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग इस बात को
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मानता भी है कि जिला में चल रही टेस्टिंग लैब का स्वास्थ्य विभाग के पास
कोई पंजीकरण नहीं है। जिले की अधिकांश टेस्टिंग लैब बिना रजिस्ट्रेशन की चल
रही है।
शहर में चल रहे टेस्टिंग लैब को या तो कोई डिप्लोमाधारी चला रहा है। या किसी डिप्लोमा की लाइसेंस ही किराए पर ले रखा है। नियमानुसार लैब एक डाक्टर ही चला सकता है लेकिन फतेहाबाद में एकआध उदहारण को छोड़ दें तो सभी लैब मनमाने तरीके से दुकानों की तरह चल रही है।
ऐसे में मरीजों की जांच रिपोर्ट सही आऐगी या गलत यह तो राम ही जाने। इतना ही नहीं फतेहाबाद में भी एक लैब से करवाया हुआ टेस्ट दूसरी लैब में करवाया जाए तो रिपोर्ट में अंतर आ जाता है।
एक सूक्ष्मदर्शी रखते ही उसे टेस्टिंग लैब का नाम दे दिया जाता है।
जिले भर में टेस्टिंग लैबों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। छोटे से कमरे में एक सूक्ष्मदर्शी रखते ही उसे लैब का नाम दे दिया जाता है।
जहां केवल सैंपल लेने का कार्य किया जाता है। सैंपल लेकर विभिन्न बीमारियों के टेस्ट कहीं ओर करवाए जाते हैं। इस कारण कई बार तो टेस्ट करवाकर मिलने वाली रिपोर्ट भी संदिग्ध होती है।
इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। उन्हें टेस्ट करवाने के लिए पैसे तो पूरे देने होते हैं, लेकिन रिपोर्ट की विश्वसनीयता नहीं रहती है।
सैंपल कलेक्शन सेंटर के नाम से बनी ये लैब
एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई जगह तो लैब केवल सैंपल कलेक्शन सेंटर बनी हुई हैं। लैब संचालक केवल सैंपल लेकर किसी दूसरी जगह से टेस्ट करवाकर रिपोर्ट देते हैं।
वहीं कई तो बिना जांच करवाए ही लोगों को रिपोर्ट थमा देते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाला इलाज जानलेवा साबित होता है। इसी कारण विशेषज्ञ अच्छी लैब से ही टेस्ट करवाए जाने की सलाह देते हैं।
आज के समय में हर बीमारी में कोई न कोई टेस्ट अवश्य करवाना पड़ता है। इस कारण कई जगह लोगों के विश्वास का गलत फायदा उठाया जा रहा है।
टेस्टों की गुणवत्ता में होगा सुधार
आईएमए हरियाणा के पूर्व अध्यक्ष एवं सर्जन डॉ. विरेंद्र सिवाच के अनुसार लैब का पंजीकरण होना अनिवार्य होना चाहिए। लैब रजिस्ट्रेशन होने से काफी हद तक टेस्टों की गुणवत्ता सुधरेगी।
क्योंकि रजिस्ट्रेशन से पूर्व आवश्यक मापदंडों का पालन करना होगा। स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर इसका निरीक्षण भी करना चाहिए। ताकि सही रिपोर्ट मिलने पर इलाज भी सही तरीके से होगा।
शहर में चल रहे टेस्टिंग लैब को या तो कोई डिप्लोमाधारी चला रहा है। या किसी डिप्लोमा की लाइसेंस ही किराए पर ले रखा है। नियमानुसार लैब एक डाक्टर ही चला सकता है लेकिन फतेहाबाद में एकआध उदहारण को छोड़ दें तो सभी लैब मनमाने तरीके से दुकानों की तरह चल रही है।
ऐसे में मरीजों की जांच रिपोर्ट सही आऐगी या गलत यह तो राम ही जाने। इतना ही नहीं फतेहाबाद में भी एक लैब से करवाया हुआ टेस्ट दूसरी लैब में करवाया जाए तो रिपोर्ट में अंतर आ जाता है।
एक सूक्ष्मदर्शी रखते ही उसे टेस्टिंग लैब का नाम दे दिया जाता है।
जिले भर में टेस्टिंग लैबों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। छोटे से कमरे में एक सूक्ष्मदर्शी रखते ही उसे लैब का नाम दे दिया जाता है।
जहां केवल सैंपल लेने का कार्य किया जाता है। सैंपल लेकर विभिन्न बीमारियों के टेस्ट कहीं ओर करवाए जाते हैं। इस कारण कई बार तो टेस्ट करवाकर मिलने वाली रिपोर्ट भी संदिग्ध होती है।
इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। उन्हें टेस्ट करवाने के लिए पैसे तो पूरे देने होते हैं, लेकिन रिपोर्ट की विश्वसनीयता नहीं रहती है।
सैंपल कलेक्शन सेंटर के नाम से बनी ये लैब
एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई जगह तो लैब केवल सैंपल कलेक्शन सेंटर बनी हुई हैं। लैब संचालक केवल सैंपल लेकर किसी दूसरी जगह से टेस्ट करवाकर रिपोर्ट देते हैं।
वहीं कई तो बिना जांच करवाए ही लोगों को रिपोर्ट थमा देते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाला इलाज जानलेवा साबित होता है। इसी कारण विशेषज्ञ अच्छी लैब से ही टेस्ट करवाए जाने की सलाह देते हैं।
आज के समय में हर बीमारी में कोई न कोई टेस्ट अवश्य करवाना पड़ता है। इस कारण कई जगह लोगों के विश्वास का गलत फायदा उठाया जा रहा है।
टेस्टों की गुणवत्ता में होगा सुधार
आईएमए हरियाणा के पूर्व अध्यक्ष एवं सर्जन डॉ. विरेंद्र सिवाच के अनुसार लैब का पंजीकरण होना अनिवार्य होना चाहिए। लैब रजिस्ट्रेशन होने से काफी हद तक टेस्टों की गुणवत्ता सुधरेगी।
क्योंकि रजिस्ट्रेशन से पूर्व आवश्यक मापदंडों का पालन करना होगा। स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर इसका निरीक्षण भी करना चाहिए। ताकि सही रिपोर्ट मिलने पर इलाज भी सही तरीके से होगा।