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Fatehabad News: बड़ोपल में बनेगा वन्यजीव ट्रीटमेंट सेंटर
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फतेहाबाद के बिश्नोई मंदिर में समाज व वन्यजीव एवं पर्यावरण प्रेमी बैठक करते हुए स्त्रोत आयोज
- फोटो : संवाद
फतेहाबाद। अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा के तत्वावधान में रविवार को बिश्नोई मंदिर में समाज और वन्यजीव प्रेमियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य गांव बड़ोपल में स्थापित होने वाले ब्रह्मलीन महंत राजेंद्रानंद स्मृति वन्यजीव ट्रीटमेंट सेंटर एवं पशु रोगालय के निर्माण और शिलान्यास से जुड़े विषयों पर चर्चा करना रहा।
पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2019 से लगातार प्रयासों के बाद भूमि उपलब्ध हुई और मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। केंद्र हरियाणा में वन्यजीवों के उपचार और संरक्षण में एक महत्वपूर्ण संस्थान साबित होगा। बैठक संत महंत प्रवणानंद महाराज हरिद्वार, आचार्य सत्यदेवानंद, कथावाचक रामकुमार और संदीप डारा की उपस्थिति में हुई जबकि राष्ट्रीय संयोजक धर्मसिंह खीचड़ ने इसे ऑनलाइन रूप से मॉनिटर किया।
प्रदेश अध्यक्ष विनोद कड़वासरा ने बताया कि प्रस्तावित भूमि में पांच फीट मिट्टी भराई की आवश्यकता है। इस कार्य को सामाजिक सहयोग से पूरा करने के लिए समिति का गठन किया गया, जो ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर, जेसीबी और रोलर जैसी मशीनों की व्यवस्था करेगी। बैठक में मुख्यमंत्री से शीघ्र शिलान्यास करवाने पर भी चर्चा हुई।
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बैठक में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड में प्रतिनिधित्व हेतु प्रतिनिधि चयन पर विचार किया गया। मानव-वन्यजीव संघर्ष, विशेषकर नीलगाय और जंगली सूअरों की समस्या पर मानवीय उपाय अपनाने तथा किसानों को मुआवजा योजनाओं की जानकारी देने का निर्णय लिया गया।
संगठन को मजबूत बनाने के लिए राज्य, जिला और खंड स्तर पर कार्यकारिणी का विस्तार किया गया। प्रदेश इकाई में चार उपाध्यक्ष चुने गए, जबकि फतेहाबाद जिले में विभिन्न खंड अध्यक्षों की नियुक्ति की गई। बैठक में हिसार के गांव मंगाली और उकलाना के गांव बुड्ढा खेड़ा की जीव रक्षा टीमों को गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। अंत में संतों ने वन्यजीव संरक्षण के कार्यों में समाज से सक्रिय सहयोग की अपील की।
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सामाजिक संस्थाएं करेंगी 250 एकड़ में घास की बुवाई
बैठक में गांव बड़ोपल, धांगड़ व आसपास के क्षेत्रों में काले हिरण सहित अन्य वन्यजीवों के लिए चारा और पानी की स्थायी व्यवस्था पर भी विचार किया गया। निर्णय लिया गया कि लगभग 250 एकड़ भूमि में सामाजिक सहयोग से घास की बुवाई, सिंचाई और देखभाल की व्यवस्था की जाएगी, जिससे वन्यजीवों को प्राकृतिक चारा मिल सके और किसानों की फसलों को नुकसान भी कम हो।
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रेस्क्यू टीम का होगा गठन
महासचिव विनोद काकड़ ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए गांव स्तर पर जीव संरक्षण एवं रेस्क्यू टीमों का गठन किया जाएगा। इन टीमों में स्वयंसेवक, निजी पशु चिकित्सक और जिम्मेदार नागरिक शामिल होंगे। घायल वन्यजीवों के बचाव और प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा तथा सूचना के लिए व्हाट्सएप समूह बनाए जाएंगे।
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संगठन को मजबूत करने के लिए राज्य, जिला और खंड स्तर पर कार्यकारिणी के विस्तार पर भी चर्चा हुई। प्रदेश इकाई में चार उपाध्यक्ष के रूप में विनोद खिलेरी (मल्लापुर), अनिल सिहाग (धांगड़), आनंद पूनिया (चौटाला) और सुरेश देहड़ू (सैणीवास) को चुना गया। वहीं फतेहाबाद जिले में भट्टू खंड अध्यक्ष अनिल खीचड़, फतेहाबाद खंड अध्यक्ष सुमित गोदारा, रतिया खंड अध्यक्ष अरविंद सियाग, नागपुर खंड अध्यक्ष अनिल कुमार, भुना खंड अध्यक्ष मांगेराम गोदारा और टोहाना खंड अध्यक्ष दलबीर डारा को नियुक्त किया गया।
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पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2019 से लगातार प्रयासों के बाद भूमि उपलब्ध हुई और मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। केंद्र हरियाणा में वन्यजीवों के उपचार और संरक्षण में एक महत्वपूर्ण संस्थान साबित होगा। बैठक संत महंत प्रवणानंद महाराज हरिद्वार, आचार्य सत्यदेवानंद, कथावाचक रामकुमार और संदीप डारा की उपस्थिति में हुई जबकि राष्ट्रीय संयोजक धर्मसिंह खीचड़ ने इसे ऑनलाइन रूप से मॉनिटर किया।
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प्रदेश अध्यक्ष विनोद कड़वासरा ने बताया कि प्रस्तावित भूमि में पांच फीट मिट्टी भराई की आवश्यकता है। इस कार्य को सामाजिक सहयोग से पूरा करने के लिए समिति का गठन किया गया, जो ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर, जेसीबी और रोलर जैसी मशीनों की व्यवस्था करेगी। बैठक में मुख्यमंत्री से शीघ्र शिलान्यास करवाने पर भी चर्चा हुई।
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बैठक में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड में प्रतिनिधित्व हेतु प्रतिनिधि चयन पर विचार किया गया। मानव-वन्यजीव संघर्ष, विशेषकर नीलगाय और जंगली सूअरों की समस्या पर मानवीय उपाय अपनाने तथा किसानों को मुआवजा योजनाओं की जानकारी देने का निर्णय लिया गया।
संगठन को मजबूत बनाने के लिए राज्य, जिला और खंड स्तर पर कार्यकारिणी का विस्तार किया गया। प्रदेश इकाई में चार उपाध्यक्ष चुने गए, जबकि फतेहाबाद जिले में विभिन्न खंड अध्यक्षों की नियुक्ति की गई। बैठक में हिसार के गांव मंगाली और उकलाना के गांव बुड्ढा खेड़ा की जीव रक्षा टीमों को गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। अंत में संतों ने वन्यजीव संरक्षण के कार्यों में समाज से सक्रिय सहयोग की अपील की।
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सामाजिक संस्थाएं करेंगी 250 एकड़ में घास की बुवाई
बैठक में गांव बड़ोपल, धांगड़ व आसपास के क्षेत्रों में काले हिरण सहित अन्य वन्यजीवों के लिए चारा और पानी की स्थायी व्यवस्था पर भी विचार किया गया। निर्णय लिया गया कि लगभग 250 एकड़ भूमि में सामाजिक सहयोग से घास की बुवाई, सिंचाई और देखभाल की व्यवस्था की जाएगी, जिससे वन्यजीवों को प्राकृतिक चारा मिल सके और किसानों की फसलों को नुकसान भी कम हो।
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रेस्क्यू टीम का होगा गठन
महासचिव विनोद काकड़ ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए गांव स्तर पर जीव संरक्षण एवं रेस्क्यू टीमों का गठन किया जाएगा। इन टीमों में स्वयंसेवक, निजी पशु चिकित्सक और जिम्मेदार नागरिक शामिल होंगे। घायल वन्यजीवों के बचाव और प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा तथा सूचना के लिए व्हाट्सएप समूह बनाए जाएंगे।
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संगठन को मजबूत करने के लिए राज्य, जिला और खंड स्तर पर कार्यकारिणी के विस्तार पर भी चर्चा हुई। प्रदेश इकाई में चार उपाध्यक्ष के रूप में विनोद खिलेरी (मल्लापुर), अनिल सिहाग (धांगड़), आनंद पूनिया (चौटाला) और सुरेश देहड़ू (सैणीवास) को चुना गया। वहीं फतेहाबाद जिले में भट्टू खंड अध्यक्ष अनिल खीचड़, फतेहाबाद खंड अध्यक्ष सुमित गोदारा, रतिया खंड अध्यक्ष अरविंद सियाग, नागपुर खंड अध्यक्ष अनिल कुमार, भुना खंड अध्यक्ष मांगेराम गोदारा और टोहाना खंड अध्यक्ष दलबीर डारा को नियुक्त किया गया।