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Fatehabad News: ये कैसा मातृत्व कैंप...बिना विशेषज्ञ हो रही गर्भवती महिलाओं की जांच
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फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल में मंगलवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर आयोजित किया गया, लेकिन शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टर की अनुपस्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
पार्किंग शेड के नीचे रजिस्ट्रेशन और बीपी-शुगर जांच की व्यवस्था की गई थी, लेकिन गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए महिला रोग विशेषज्ञ का कोई इंतजाम नहीं किया गया। दोनों महिला रोग विशेषज्ञ छुट्टी पर होने के कारण, कंसलटेंट डॉक्टर सुनीता सोखी ने गर्भवती महिलाओं की जांच की, जो विशेषज्ञ नहीं होने के बावजूद यह कार्य कर रही थीं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस शिविर का आयोजन पहले हर महीने की 9, 10 और 23 तारीख को किया जाता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर चार दिन कर दिया गया है और महीने के आखिरी दिन भी शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। शिविर का उद्देश्य हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान करना है, लेकिन विशेषज्ञ के बिना जांच की स्थिति पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
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नागरिक अस्पताल में मंगलवार को चर्म रोग विशेषज्ञ की ओपीडी के बाहर भी अव्यवस्था देखने को मिली। मरीजों की संख्या में वृद्धि के कारण धक्का-मुक्की तक हुई। सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। चर्म रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में मरीजों की संख्या 210 तक पहुंच गई थी, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ गई।
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पार्किंग शेड के नीचे रजिस्ट्रेशन और बीपी-शुगर जांच की व्यवस्था की गई थी, लेकिन गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए महिला रोग विशेषज्ञ का कोई इंतजाम नहीं किया गया। दोनों महिला रोग विशेषज्ञ छुट्टी पर होने के कारण, कंसलटेंट डॉक्टर सुनीता सोखी ने गर्भवती महिलाओं की जांच की, जो विशेषज्ञ नहीं होने के बावजूद यह कार्य कर रही थीं।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस शिविर का आयोजन पहले हर महीने की 9, 10 और 23 तारीख को किया जाता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर चार दिन कर दिया गया है और महीने के आखिरी दिन भी शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। शिविर का उद्देश्य हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान करना है, लेकिन विशेषज्ञ के बिना जांच की स्थिति पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
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नागरिक अस्पताल में मंगलवार को चर्म रोग विशेषज्ञ की ओपीडी के बाहर भी अव्यवस्था देखने को मिली। मरीजों की संख्या में वृद्धि के कारण धक्का-मुक्की तक हुई। सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। चर्म रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में मरीजों की संख्या 210 तक पहुंच गई थी, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ गई।