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Fatehabad News: होली पर डफ बजाने की परंपरा संजोए हैं रामसरा के ग्रामीण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Mar 2023 11:25 PM IST
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Villagers of Ramsara cherish the tradition of playing tambourine on Holi
फतेहाबाद के गांव रामसरा में होली के उपलक्ष्य में डफ बजाते ग्रामीण।
फतेहाबाद। उत्साह व भाईचारे के प्रतीक होली पर्व पर गांवों में डफ बजाने की परंपरा थी। मगर धीर-धीरे यह परंपरा अब सिमटने लगी है। वहीं गांव रामसरा के ग्रामीण आज भी इस परंपरा को संजोए हुए हैं और होली के दिन डफ बजा कर पारंपरिक गीत गाते हैं। गांव रामसरा में ग्रामीण शिवरात्रि के बाद ही गांव के रामदेव मंदिर में डफ बजाकर भजन कीर्तन गाना शुरू कर देते हैं जो होती तक चलता है।
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होली के त्योहार पर फाग गाने की परंपरा दशकों से चली आ रही है, हरियाणा और राजस्थान के गांवों में लोग फाग गाते हुए डफ बजाया करते थे। मगर आधुनिक युग में होली पर डफ बजाने की परंपरा अब धीरे-धीरे सिमटने लगी है। पहले फाल्गुन मास शुरू होने के साथ ही लोगों में होली के रंग चढ़ जाते थे। गांवों में शाम ढलते ही होली के पारंपरिक होली गीत गाने वालों की टोली एकजुट होकर डफ बजाकर गाना-बजाना शुरू कर देती थी। देर शाम तक देवी-देवताओं पर आधारित गीतों का दौर चलता रहता था। इसमें बुजुर्ग, बच्चे व युवा एक साथ बैठकर गीतों का आनंद लेते थे। पहले होली के दिन फाग गाने वालों की टोलियां घर-घर घूमकर गीत गाती थी। अब तो फाग गाने वालों व डफ की थाप सुनने के लिए लोगों के कान तरस गए हैं। अब इसकी जगह डीजे के अश्लील गानों ने ले ली है जिसे घर के सदस्यों के साथ सुना नहीं जा सकता है।
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गांव रामसरा में शिवरात्रि के बाद से ही रात को डफ बजाकर गाते हैं पारंपरिक भजन
हालांकि होली पर्व से पहले डफ बजाकर भजन आदि गाने की परंपरा गांव रामसरा के ग्रामीणों ने आज भी संजोकर रखा है। गांव के लोग शिवरात्रि के दिन से ही गांव के रामदेव मंदिर में डफ बजाकर पारंपरिक भजन-कीर्तन करना शुरू कर देते हैं। फाग तक यह कार्यक्रम चलता है और युवा व बच्चे डफ की थाप पर थिरकते नजर आते हैं। गांव के तीरूराम भांभू, मांगेराम शर्मा, पवन, सुनील, रोहताश, रवि फड़ोलिया, रामसिंह गोदारा आदि ने बताया कि होली पर्व पर डफ बजाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। हमारे बुजुर्ग भी इसमें भाग लेते थे और अब हम इस परंपरा को चलाए हुए हैं।
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परंपरा से दूर हो रहे युवा
रोजगार की तलाश में बड़े पैमाने पर ग्रामीण क्षेत्रों से युवा शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। कुछ मोबाइल ने बच्चों को इन परंपराओं से दूर कर दिया है। अब तो होली व फाग के दिन भी इतना महत्व नहीं दिया जाता। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में होलिका दहन होता है, लेकिन शहरी क्षेत्र में कुछेक हिस्सों को छोड़कर अब होलिका दहन भी कम हो गया है।
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