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खेतों में ही बसा दी कॉलोनी
fatehabad
Updated Sun, 08 Jun 2014 11:55 PM IST
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प्रदेश सरकार ने गांवों में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को प्लॉट और उस पर मकान तो बनाकर दे दिए, लेकिन बिजली और पानी की सुविधा आज तक नहीं मिल पाई है। पक्की सड़क की बात तो दूर, इन बस्तियों तक पहुंचने के लिए कच्चे रास्ते भी ठीक से नहीं बनें। देखने में लगता है कि जैसे इन बस्तियों को खेतों में बसा दिया गया है, जहां केवल पगडंडियों के सहारे ही पहुंचा जा सकता है।
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महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत गरीब परिवारों को सौ-सौ गज के प्लॉट आवंटित किए गए थे। सरकार ने इंदिरा आवास योजना के तहत इन प्लॉटों पर मकान भी बनाकर दे दिए। महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत इन कॉलोनियों को हुडा सेक्टरों की तर्ज पर विकसित करने का प्लान था, लेकिन हुआ इसके विपरीत। जिले में 172 गांवों में बनी इन बस्तियों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे इन्हें खेतों में बसा दिया गया है। थोड़ी सी बरसात आते ही यहां स्थिति बदहाल हो जाती हैै।
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211 प्लॉटों की रजिस्ट्री अभी तक नहीं --
जिले में 173 गांवों में सौ-सौ गज के प्लॉट के लिए जगह पंचायत के पास उपलब्ध थी। इन गांवाें में 6140 परिवारों को पात्र बनाकर उनको प्लाट आवंटित किए गए थे। गांव समैण का केस अदालत में होने के कारण यहां प्लाट आवंटित नहीं हो सका। शेष गांवाें में प्लॉट आवंटित कर दिए गए।
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5929 लोगों को प्लॉटाें की रजिस्ट्री भी कराकर दे दी थी। 211 प्लॉटाें की रजिस्ट्री अभी भी नहीं हो पाई है। प्रत्येक गांव के एक छोर पर ये बस्तियां बसी हैं। इन्हें अलग जगह आबाद करने के कारण वहां बिजली, पानी और सीवरेज की सुविधा पहले से उपलब्ध नहीं है। कई गांवाें में यह बस्तियां गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूरी पर बसी हैं।
काम चल रहा है -
इस बारे में डीडीपीओ सुमित कुमार ने बताया कि इन बस्तियों में सभी मूलभूत सुविधाएं दी जाएंगी। बिजली का प्रबंध बिजली निगम और पीने के पानी का प्रबंध जन स्वास्थ्य विभाग को करना है। सभी विभाग को इस बारे में पत्र लिखा जा चुका है। सड़कें बनाने का काम भी चल रहा है।
क्या कहते हैं गांव भिरड़ाना के लोग-:
असीं तां कई बार विधायक जरनैल सिंह को बिजली, पानी वास्ते मिल चुके हैं, परंतु सानू आश्वासन दे सिवा कुछ नहीं मिल रहे हैं। यह वाक्य गांव भिरड़ाना में महात्मा गांधी योजना के तहत मकान बना कर रह रही गुड्डी देवी ने कहे। गुड्डी ने बताया कि उन्हें महात्मा गांधी योजना के तहत 100 गज का प्लॉट मिला था। जिस पर रहने के लिए उन्होंने एक कमरा बना लिया, परंतु यहां पर उनके साथ पिछड़ों जैसा बर्ताव किया जा रहा है। यहां पर बिजली-पानी की कोई सुविधा नहीं है।
पीने का पानी उन्हें दो किलोमीटर दूर खेतों से लाना पड़ रहा है। वहीं, दर्शन और सुरजीत ने बताया कि इस कॉलोनी के दूर दूर तक बिजली की सप्लाई नहीं। ऐसा लगता है, जैसे किसी जंगल में रह रहे हैं। समस्या को लेकर विधायक जरनैल सिंह को मिल चुके हैं, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। कॉलोनी में 74 लाभार्थी को प्लॉट का लाभ मिला था। जिसमें से लगभग दस प्लॉट धारकों को छोड़कर सबने मकान तो बना लिए है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं आज तक नहीं मिली है।
क्या कहते हैं गांव अयाल्की के प्लॉट धारक
अयाल्की में गांव से बाहर रतिया रोड पर कॉलोनी बनी है। जहां पर न बिजली है और न ही पानी है। प्लॉट धारक तेलूराम, गुलाब सिंह, ज्ञानीराम और अजीत सिंह ने बताया कि लगभग डेढ़ साल पहले यहां पर महात्मा गांधी योजना के तहत चार लाभार्थियों को प्लॉट दिए गए थे। प्लाट देने के बाद प्रशासन उन्हें भूल गया। बिजली और पीनी के बिना उनका बुरा हाल है।
जिले के गांव समैण का मामला पहले कोर्ट में था अब केस निपट गया है। शीघ्र ही वहां प्लाट आवंटित कर दिए जाएंगे। जिला उपायुक्त ने पिछले सप्ताह बिजली निगम और जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक ली थी, जिसमें इन कॉलोनियों में बिजली, पानी और सीवरेज की व्यवस्था के निर्देश दिए गए थे।
सुमित कुमार, डीडीपीओ, फतेहाबाद।
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एस्टीमेट प्रशासन को भेजे गए: एसडीओ
बिजली निगम के अर्ध शहरी डिविजन के एसडीओ एसके नैन ने कहा कि बिजली निगम ने सभी गांव के एस्टीमेट तैयार कर लिए हैं। स्टेट लेवल पर फंड आने हैं। निगम के पास फंड आते ही टेंडर करा दिए जाएंगे। इसके बाद इन कॉलोनियों में बिजली पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।