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Fatehabad News: दुड़ाराम पर दूसरी बार भरोसा, लक्ष्मण नापा की टिकट कटी, दो दिन पहले पार्टी में आए बबली बने प्रत्याशी
Thu, 05 Sep 2024 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 05 Sep 2024 02:07 AM IST
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दूसरी बार फतेहाबाद से भाजपा उम्मीदवार बनाए जाने पर विधायक दुड़ाराम को लड्डू खिलाते शहरवासी।
फतेहाबाद। भाजपा की ओर से बुधवार देर शाम को प्रत्याशियों की जारी की गई सूची में जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों की घोषणा हो गई है। फतेहाबाद से पार्टी ने दूसरी बार मौजूदा विधायक दुड़ाराम पर ही भरोसा जताया है। वहीं, टोहाना से दो दिन पहले भाजपा में शामिल हुए पूर्व पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली को मैदान में उतारा गया है। रतिया के विधायक लक्ष्मण नापा की टिकट कट गई है। उनके स्थान पर पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है।
लोकसभा चुनाव में तीनों विधानसभा क्षेत्रों में हारी भाजपा के सामने जीत की कड़ी चुनौती रहेगी। दुड़ाराम 11 सितंबर को नामांकन दाखिल करेंगे। विधायक दुड़ाराम के पास लगातार दूसरी बार विधायक बनने और भाजपा को तीसरी बार जीत दिलाने की चुनौती रहेगी। अभी तक फतेहाबाद विधानसभा से चौधरी पोखरराम ही लगातार दो बार जीत सके हैं।
दरअसल, भाजपा के पास दस साल तक सत्ता में रहने के बावजूद फतेहाबाद से दुड़ाराम जैसा कोई मजबूत दावेदार नहीं है। यही उनकी टिकट का प्रमुख कारण रहा है। इसके अलावा बिश्नोई समाज के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई की पैरवी भी टिकट दिलाने में सहायक रही। दुड़ाराम ने पिछले चुनाव में जजपा प्रत्याशी रहे डॉ. वीरेंद्र सिवाच को 3300 वोटों से हराया था।
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उधर, भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं मौजूदा राज्यसभा सांसद सुभाष बराला के धुर विरोधी रहे देवेंद्र सिंह बबली को टिकट मिलने से टोहाना में राजनीति के नए समीकरण बनेंगे। देवेंद्र बबली पर भी भाजपा को टोहाना से दूसरी जीत दिलाने का दारोमदार रहेगा। पिछली बार देवेंद्र बबली ने जजपा की टिकट पर भाजपा के उम्मीदवार सुभाष बराला को 52,302 वोटों से करारी शिकस्त दी थी।
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पिछली बार हारी सुनीता दुग्गल पर इस बार जीत बरकरार रखने की चुनौती
पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल साल 2014 में भी भाजपा की टिकट पर रतिया से चुनाव लड़ चुकी हैं। उस चुनाव में वह इनेलो उम्मीदवार रविंद्र बलियाला से मात्र 453 वोटों से हार गई थी। इसके बाद पांच साल तक सुनीता दुग्गल सिरसा लोकसभा क्षेत्र से सांसद रही है। सांसद रहते भी उन्होंने रतिया क्षेत्र के दौरे जारी रखे। साल 2019 में भाजपा पहली बार रतिया विधानसभा क्षेत्र में जीत पाई थी। इस चुनाव में लगातार दूसरी बार भाजपा की जीत बरकरार रखने की चुनौती सुनीता दुग्गल के समक्ष रहेगी।
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विधायक और जिलाध्यक्ष ने जिसका विरोध किया, उसे ही मिली टिकट
दिलचस्प बात यह है कि रतिया से सुनीता दुग्गल को बाहरी बताकर कई दिनों से भाजपा कार्यकर्ताओं ने ही विरोध शुरू कर दिया था। खुद विधायक लक्ष्मण नापा और भाजपा जिलाध्यक्ष बलदेव ग्रोहा भी स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट दिए जाने की मांग कर रहे थे। बाकायदा कार्यकर्ताओं की ओर से प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली को पत्र लिखकर मौजूदा विधायक लक्ष्मण नापा, जिलाध्यक्ष बलदेव ग्रोहा या मुख्त्यार सिंह बाजीगर में से किसी एक को उम्मीदवार बनाने की मांग की गई थी। मगर इसके बावजूद हाईकमान ने सुनीता दुग्गल को टिकट थमा दी।
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दुड़ाराम
मजबूत पक्ष
1. बिश्नोई समाज से हैं। इस समाज का विधानसभा क्षेत्र में बड़ा वोट बैंक है।
2. दो बार पहले विधायक रह चुके हैं। ऐसे में निजी वोट बैंक भी अच्छा खासा है।
3. जिले के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं।
4. जिला मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय, 200 बेड का नया अस्पताल जैसे प्रोजेक्ट लाने में सफल रहे।
5. अपने ताऊ पूर्व सीएम स्व. भजनलाल की तरह स्वभाव से नरम हैं और जनता के बीच रहते हैं, इसका फायदा चुनाव में मिलने की संभावना रहेगी।
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दुड़ाराम
चुनौतियां
1. भाजपा संगठन में ही भीतरघात की चुनौती रहेगी।
2. मेडिकल कॉलेज, कचरा प्रबंधन प्लांट शिफ्ट होने से लोगों में नाराजगी।
3. पहले के मुकाबले ज्यादा पर्सनल काम नहीं करवा पाने से भी लोगों में रोष।
4. क्षेत्र में फैले नशे और सट्टे पर लगाम नहीं लगवा पाए।
5. किसानों व जाट समाज का सरकार के खिलाफ रोष।
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देवेंद्र सिंह बबली - मजबूत पक्ष
1. 17 सालों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहने से गांव-गांव में लोगों से संपर्क।
2. पंचायत मंत्री रहते करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाएं क्षेत्र में लेकर आए।
3. मेडिकल कॉलेज जैसे सबसे बड़े प्रोजेक्ट को टोहाना शिफ्ट करवाने में सफल रहे।
4. गांव-गांव में मजबूत टीम, जो चुनाव मैनेजमेंट में अहम भूमिका निभाएगी।
5. जरूरतमंदों की मदद के लिए आर्थिक सहायता भी देने में पीछे नहीं हटते।
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देवेंद्र बबली - चुनौतियां
1. भाजपा के कद्दावर नेता सुभाष बराला के साथ तालमेल बिठाना।
2. किसानों व पंचायतों का विरोध झेलना पड़ेगा।
3. मंत्री रहते कर्मचारियों पर निकाले गए गुस्से का पलटवार झेलना पड़ेगा।
4. भाजपा में पुराने कार्यकर्ताओं को अपने साथ चुनाव में लगा पाना।
5. कर्मचारी वर्ग की सरकार से नाराजगी को दूर कर पाना।
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सुनीता दुग्गल - मजबूत पक्ष
1. पढ़ी-लिखी महिला होना।
2. सांसद रहते जिले में भी कई विकास कार्यों के लिए ग्रांट दी।
3. अधिकारियों से काम करवाने में कुशलता।
4. महिला मतदाताओं के बीच लोकप्रियता।
5. सांसद रहते टिकट कटने के बावजूद पार्टी से जुड़े रहना।
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सुनीता दुग्गल - चुनौतियां
1. रतिया क्षेत्र में अपनी ही पार्टी में भीतरघात।
2. किसान संगठनों का विरोध।
3. सांसद रहते कोई बड़ा प्रोजेक्ट रतिया के लिए नहीं ला पाना।
4. फतेहाबाद या रतिया में स्थायी घर नहीं होना।
5. क्षेत्र में फैले नशे पर लगाम नहीं लगवा पाई।
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हाईकमान का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने दूसरी बार मुझ पर विश्वास जताया है। पार्टी ने सर्वे के आधार पर फिर से टिकट दी है। फिर से कमल का फूल खिलाएंगे। 11 सितंबर को नामांकन दाखिल करूंगा।
-दुड़ाराम, भाजपा उम्मीदवार, फतेहाबाद
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पार्टी के केंद्रीय व प्रदेश स्तरीय नेतृत्व का रतिया से विधानसभा प्रत्याशी बनाए जाने पर आभार व्यक्त करती हूं। निश्चित रूप से भाजपा को लगातार दूसरी बार रतिया से जीत मिलेगी।
-सुनीता दुग्गल, भाजपा उम्मीदवार, रतिया
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भाजपा हाईकमान ने टोहाना से मुझ पर जो भरोसा जताया है, उसके लिए उनके आभारी हैं। टोहाना क्षेत्र की जनता का पूर्ण समर्थन हमारे साथ है। टोहाना से भाजपा की बड़े बहुमत से जीत होगी।
-देवेंद्र सिंह बबली, भाजपा उम्मीदवार, टोहाना
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लोकसभा चुनाव में तीनों विधानसभा क्षेत्रों में हारी भाजपा के सामने जीत की कड़ी चुनौती रहेगी। दुड़ाराम 11 सितंबर को नामांकन दाखिल करेंगे। विधायक दुड़ाराम के पास लगातार दूसरी बार विधायक बनने और भाजपा को तीसरी बार जीत दिलाने की चुनौती रहेगी। अभी तक फतेहाबाद विधानसभा से चौधरी पोखरराम ही लगातार दो बार जीत सके हैं।
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दरअसल, भाजपा के पास दस साल तक सत्ता में रहने के बावजूद फतेहाबाद से दुड़ाराम जैसा कोई मजबूत दावेदार नहीं है। यही उनकी टिकट का प्रमुख कारण रहा है। इसके अलावा बिश्नोई समाज के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई की पैरवी भी टिकट दिलाने में सहायक रही। दुड़ाराम ने पिछले चुनाव में जजपा प्रत्याशी रहे डॉ. वीरेंद्र सिवाच को 3300 वोटों से हराया था।
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उधर, भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं मौजूदा राज्यसभा सांसद सुभाष बराला के धुर विरोधी रहे देवेंद्र सिंह बबली को टिकट मिलने से टोहाना में राजनीति के नए समीकरण बनेंगे। देवेंद्र बबली पर भी भाजपा को टोहाना से दूसरी जीत दिलाने का दारोमदार रहेगा। पिछली बार देवेंद्र बबली ने जजपा की टिकट पर भाजपा के उम्मीदवार सुभाष बराला को 52,302 वोटों से करारी शिकस्त दी थी।
पिछली बार हारी सुनीता दुग्गल पर इस बार जीत बरकरार रखने की चुनौती
पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल साल 2014 में भी भाजपा की टिकट पर रतिया से चुनाव लड़ चुकी हैं। उस चुनाव में वह इनेलो उम्मीदवार रविंद्र बलियाला से मात्र 453 वोटों से हार गई थी। इसके बाद पांच साल तक सुनीता दुग्गल सिरसा लोकसभा क्षेत्र से सांसद रही है। सांसद रहते भी उन्होंने रतिया क्षेत्र के दौरे जारी रखे। साल 2019 में भाजपा पहली बार रतिया विधानसभा क्षेत्र में जीत पाई थी। इस चुनाव में लगातार दूसरी बार भाजपा की जीत बरकरार रखने की चुनौती सुनीता दुग्गल के समक्ष रहेगी।
विधायक और जिलाध्यक्ष ने जिसका विरोध किया, उसे ही मिली टिकट
दिलचस्प बात यह है कि रतिया से सुनीता दुग्गल को बाहरी बताकर कई दिनों से भाजपा कार्यकर्ताओं ने ही विरोध शुरू कर दिया था। खुद विधायक लक्ष्मण नापा और भाजपा जिलाध्यक्ष बलदेव ग्रोहा भी स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट दिए जाने की मांग कर रहे थे। बाकायदा कार्यकर्ताओं की ओर से प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली को पत्र लिखकर मौजूदा विधायक लक्ष्मण नापा, जिलाध्यक्ष बलदेव ग्रोहा या मुख्त्यार सिंह बाजीगर में से किसी एक को उम्मीदवार बनाने की मांग की गई थी। मगर इसके बावजूद हाईकमान ने सुनीता दुग्गल को टिकट थमा दी।
दुड़ाराम
मजबूत पक्ष
1. बिश्नोई समाज से हैं। इस समाज का विधानसभा क्षेत्र में बड़ा वोट बैंक है।
2. दो बार पहले विधायक रह चुके हैं। ऐसे में निजी वोट बैंक भी अच्छा खासा है।
3. जिले के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं।
4. जिला मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय, 200 बेड का नया अस्पताल जैसे प्रोजेक्ट लाने में सफल रहे।
5. अपने ताऊ पूर्व सीएम स्व. भजनलाल की तरह स्वभाव से नरम हैं और जनता के बीच रहते हैं, इसका फायदा चुनाव में मिलने की संभावना रहेगी।
दुड़ाराम
चुनौतियां
1. भाजपा संगठन में ही भीतरघात की चुनौती रहेगी।
2. मेडिकल कॉलेज, कचरा प्रबंधन प्लांट शिफ्ट होने से लोगों में नाराजगी।
3. पहले के मुकाबले ज्यादा पर्सनल काम नहीं करवा पाने से भी लोगों में रोष।
4. क्षेत्र में फैले नशे और सट्टे पर लगाम नहीं लगवा पाए।
5. किसानों व जाट समाज का सरकार के खिलाफ रोष।
देवेंद्र सिंह बबली - मजबूत पक्ष
1. 17 सालों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहने से गांव-गांव में लोगों से संपर्क।
2. पंचायत मंत्री रहते करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाएं क्षेत्र में लेकर आए।
3. मेडिकल कॉलेज जैसे सबसे बड़े प्रोजेक्ट को टोहाना शिफ्ट करवाने में सफल रहे।
4. गांव-गांव में मजबूत टीम, जो चुनाव मैनेजमेंट में अहम भूमिका निभाएगी।
5. जरूरतमंदों की मदद के लिए आर्थिक सहायता भी देने में पीछे नहीं हटते।
देवेंद्र बबली - चुनौतियां
1. भाजपा के कद्दावर नेता सुभाष बराला के साथ तालमेल बिठाना।
2. किसानों व पंचायतों का विरोध झेलना पड़ेगा।
3. मंत्री रहते कर्मचारियों पर निकाले गए गुस्से का पलटवार झेलना पड़ेगा।
4. भाजपा में पुराने कार्यकर्ताओं को अपने साथ चुनाव में लगा पाना।
5. कर्मचारी वर्ग की सरकार से नाराजगी को दूर कर पाना।
सुनीता दुग्गल - मजबूत पक्ष
1. पढ़ी-लिखी महिला होना।
2. सांसद रहते जिले में भी कई विकास कार्यों के लिए ग्रांट दी।
3. अधिकारियों से काम करवाने में कुशलता।
4. महिला मतदाताओं के बीच लोकप्रियता।
5. सांसद रहते टिकट कटने के बावजूद पार्टी से जुड़े रहना।
सुनीता दुग्गल - चुनौतियां
1. रतिया क्षेत्र में अपनी ही पार्टी में भीतरघात।
2. किसान संगठनों का विरोध।
3. सांसद रहते कोई बड़ा प्रोजेक्ट रतिया के लिए नहीं ला पाना।
4. फतेहाबाद या रतिया में स्थायी घर नहीं होना।
5. क्षेत्र में फैले नशे पर लगाम नहीं लगवा पाई।
हाईकमान का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने दूसरी बार मुझ पर विश्वास जताया है। पार्टी ने सर्वे के आधार पर फिर से टिकट दी है। फिर से कमल का फूल खिलाएंगे। 11 सितंबर को नामांकन दाखिल करूंगा।
-दुड़ाराम, भाजपा उम्मीदवार, फतेहाबाद
पार्टी के केंद्रीय व प्रदेश स्तरीय नेतृत्व का रतिया से विधानसभा प्रत्याशी बनाए जाने पर आभार व्यक्त करती हूं। निश्चित रूप से भाजपा को लगातार दूसरी बार रतिया से जीत मिलेगी।
-सुनीता दुग्गल, भाजपा उम्मीदवार, रतिया
भाजपा हाईकमान ने टोहाना से मुझ पर जो भरोसा जताया है, उसके लिए उनके आभारी हैं। टोहाना क्षेत्र की जनता का पूर्ण समर्थन हमारे साथ है। टोहाना से भाजपा की बड़े बहुमत से जीत होगी।
-देवेंद्र सिंह बबली, भाजपा उम्मीदवार, टोहाना