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Fatehabad News: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाइयों की कमी हो दूर, जिला मुख्यालय में बने ट्रामा सेंटर
Wed, 14 Feb 2024 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 14 Feb 2024 12:58 AM IST
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फतेहाबाद का नागरिक अस्पताल।
फतेहाबाद। प्रदेश सरकार बजट पेश करने जा रही है। बजट में स्वास्थ्य को लेकर लोगों को खास उम्मीदें हैं। सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं न मिलने के कारण निजी में जाना पड़ रहा है। मरीजों को दवाइयां तक नहीं मिल रही है। रसूलपुर में मेडिकल कॉलेज बनना है लेकिन वह टेंडर प्रक्रिया में अटका हुआ है।
जिले में डॉक्टरों के 100 से ज्यादा पद खाली है। अस्पतालों में स्पेशलिस्ट तक नहीं है। सरकार कैंसर मरीजों और एचआईवी संक्रमित के लिए पेंशन की घोषणा कर चुकी है। लेकिन मिलनी शुरू नहीं हुई है। बजट को लेकर आम नागरिक, सामाजिक संस्था के पदाधिकारी हो या फिर पूर्व विधायक सभी की ये ही मांग है कि बिल्डिंग खड़ी करने से ज्यादा डॉक्टरों और दवाइयों की कमी को पूरा किया जाए। सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की सप्लाई वेयर हाउस से होती है। वेयर हाउस से दवाइयां न आने पर सिविल सर्जन कार्यालय अपने स्तर पर दवाइयों की खरीद करता है। लेकिन अब दवा एजेंसियां भी दवाइयों की सप्लाई देने से आनाकानी कर रही है। करीब सवा करोड़ रुपये बकाया है।
ये है जिले में डॉक्टरों की स्थिति
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के स्वीकृत पद : 174
कार्यरत डॉक्टर : 79
अधिकारियों के ये पद है खाली
सिविल सर्जन : पद खाली
उप सिविल सर्जन : 7 पद खाली
बजट को लेकर बोले, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी, बिल्डिंग बनाने से नहीं होता कुछ
सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा होनी चाहिए। लोगों को महंगे टेस्ट बाहर करवाने पड़ रहे है। अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में दी जाए। बेशक सरकार इन्हें पीपीपी मोड़ पर शुरू करें।
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- पंकज कुमार, स्थानीय निवासी
बिल्डिंग से ज्यादा डॉक्टरों की कमी दूर करने पर ध्यान दिया जाए। बिल्डिंग तो बना दी लेकिन जब डॉक्टर और संसाधान नहीं होंगे तो फायदा क्या होगा। जिला मुख्यालय में ट्रामा सेंटर बनाया जाए ताकि गंभीर मरीजों को उपचार मिल सकें और उन्हें जान न गंवानी पड़े।
हरदीप सिंह, अध्यक्ष, जिंदगी संस्था
सरकार दावा करती है कि स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही है। लेकिन जिला अस्पताल सिर्फ रेफर अस्पताल बनकर रह गया है। यहां पर डॉक्टर नहीं है और न ही जांच की सुविधाएं है। मरीजों को दवाई भी नहीं मिल रही है। सरकार बजट में स्वास्थ्य को लेकर विशेष ध्यान रखे और डॉक्टरों की कमी दूर करें।
- बलवान दौलतपुरिया, पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता
बजट में सरकार स्वास्थ्य कर्मियों का ध्यान रखे। विभाग में 70 फीसदी कर्मचारी एनएचएम के तहत तैनात है। मुख्यमंत्री ने सातवें वेतन आयोग की घोषणा की थी लेकिन अभी तक उसे अधिकारियों ने पूरा नहीं किया है। विभाग में खाली पदों को भरा जाए। खाली पदों के कारण कार्यरत कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ रहा है।
- विपिन शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हरियाणा
स्वास्थ्य को लेकर बजट बहुत अच्छा रहने वाला है। डॉक्टरों की कमी पूरी होगी। प्रदेश सरकार इसको लेकर लगी हुई है। जिला मुख्यालय के अस्पताल में सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी इसको लेकर प्रयास किए जा रहे है।
- दुड़ाराम, विधायक
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जिले में डॉक्टरों के 100 से ज्यादा पद खाली है। अस्पतालों में स्पेशलिस्ट तक नहीं है। सरकार कैंसर मरीजों और एचआईवी संक्रमित के लिए पेंशन की घोषणा कर चुकी है। लेकिन मिलनी शुरू नहीं हुई है। बजट को लेकर आम नागरिक, सामाजिक संस्था के पदाधिकारी हो या फिर पूर्व विधायक सभी की ये ही मांग है कि बिल्डिंग खड़ी करने से ज्यादा डॉक्टरों और दवाइयों की कमी को पूरा किया जाए। सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की सप्लाई वेयर हाउस से होती है। वेयर हाउस से दवाइयां न आने पर सिविल सर्जन कार्यालय अपने स्तर पर दवाइयों की खरीद करता है। लेकिन अब दवा एजेंसियां भी दवाइयों की सप्लाई देने से आनाकानी कर रही है। करीब सवा करोड़ रुपये बकाया है।
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ये है जिले में डॉक्टरों की स्थिति
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के स्वीकृत पद : 174
कार्यरत डॉक्टर : 79
अधिकारियों के ये पद है खाली
सिविल सर्जन : पद खाली
उप सिविल सर्जन : 7 पद खाली
बजट को लेकर बोले, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी, बिल्डिंग बनाने से नहीं होता कुछ
सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा होनी चाहिए। लोगों को महंगे टेस्ट बाहर करवाने पड़ रहे है। अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में दी जाए। बेशक सरकार इन्हें पीपीपी मोड़ पर शुरू करें।
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- पंकज कुमार, स्थानीय निवासी
बिल्डिंग से ज्यादा डॉक्टरों की कमी दूर करने पर ध्यान दिया जाए। बिल्डिंग तो बना दी लेकिन जब डॉक्टर और संसाधान नहीं होंगे तो फायदा क्या होगा। जिला मुख्यालय में ट्रामा सेंटर बनाया जाए ताकि गंभीर मरीजों को उपचार मिल सकें और उन्हें जान न गंवानी पड़े।
हरदीप सिंह, अध्यक्ष, जिंदगी संस्था
सरकार दावा करती है कि स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही है। लेकिन जिला अस्पताल सिर्फ रेफर अस्पताल बनकर रह गया है। यहां पर डॉक्टर नहीं है और न ही जांच की सुविधाएं है। मरीजों को दवाई भी नहीं मिल रही है। सरकार बजट में स्वास्थ्य को लेकर विशेष ध्यान रखे और डॉक्टरों की कमी दूर करें।
- बलवान दौलतपुरिया, पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता
बजट में सरकार स्वास्थ्य कर्मियों का ध्यान रखे। विभाग में 70 फीसदी कर्मचारी एनएचएम के तहत तैनात है। मुख्यमंत्री ने सातवें वेतन आयोग की घोषणा की थी लेकिन अभी तक उसे अधिकारियों ने पूरा नहीं किया है। विभाग में खाली पदों को भरा जाए। खाली पदों के कारण कार्यरत कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ रहा है।
- विपिन शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हरियाणा
स्वास्थ्य को लेकर बजट बहुत अच्छा रहने वाला है। डॉक्टरों की कमी पूरी होगी। प्रदेश सरकार इसको लेकर लगी हुई है। जिला मुख्यालय के अस्पताल में सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी इसको लेकर प्रयास किए जा रहे है।
- दुड़ाराम, विधायक