{"_id":"7e5b7b4346d894b117eda0586ef37125","slug":"there-are-no-operator-and-doctors-to-operate-heavi-machene-at-hospital-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अत्याधुनिक मशीनें है पर चलाने वाला कोई नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अत्याधुनिक मशीनें है पर चलाने वाला कोई नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Sun, 11 Oct 2015 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सरकार बने लगभग साल भर हो गए लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
खाली पड़े इन पदों पर न रेगुलर स्टाफ आया और न ही कंट्रैक्ट बेस पर दिया
गया।
जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल से दूसरे अस्पताल में धक्के खाने का मजबूर हो रहे हैं। उधर लाखों रुपये कीमत की आई मशीनें जंग खा रही हैं।
अकेले फतेहाबाद जिले की अगर हम बात करें तो यहां चार सीएचसी पर एक्सरे मशीनें तो हैं लेकिन इन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। फतेहाबाद सिविल अस्पताल में कंट्रैक्ट बेस पर रेडियोग्राफर काम चला रहा है। यही हालात सिविल अस्पताल फतेहाबाद की अल्ट्रासाउंड मशीन की है।
सिर्फ एक्सरे के चक्कर में होते हैं रोजना एक दर्जन मरीज रेफर
फतेहाबाद जिले के भूना, जाखल, भट्टू तथा फतेहाबाद सेक्टर तीन के पॉलीक्लीनिक में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक्सरे मशीनें लगवा दी गई। लेकिन विभाग के पास इसे चलाने वाला कोई रेडियोग्राफर ही नहीं है।
भूना, जाखल, भट्टू में इस समय हालात ऐसे हैं कि एक्सरे के चक्कर में मरीजों को फतेहाबाद व टोहाना के सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है।
आमतौर पर दुर्घटना या मारपीट के केस में फैक्चर आदि का पता लगाने के लिए एक्सरे करना पड़ता है। ऐसे में यहां पर सुविधा उपलब्ध न होने के कारण परेशान मरीजों को होना पड़ता।
एक साल से कमरे में ही बंद है एक्सरे मशीन
पॉलिक्लीनिक में एक साल पहले एक्सरे मशीन भेजी गई थी लेकिन इसे चलाने के लिए रेडियोग्राफर न होने के कारण यह कक्ष साल भर से बंद पड़ी है। नहीं चल पाने के कारण मरीज परेशान होकर इधर उधर भटकने को मजबूर हैं।
दो साल से बंद है अल्ट्रासाउंड मशीन
फतेहाबाद के सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन को चलाने वाला विशेषज्ञ नहीं है जिसका नतीजा यह है कि गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकना पड़ रहा है।
विभाग गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड के लिए प्राइवेट अस्पताल से मदद लेता है जिसके लिए विभाग की तरफ से अस्पताल को भुगतान किया जाता है।
लेकिन अन्य बीमारियों के लिए मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जेब हल्की करनी पड़ती है। विभाग को अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए कट्रैक्ट बेस पर भी कोई विशेषज्ञ नहीं मिल रहा है इसके पीछे कारण यह भी है कि सरकार द्वारा सख्त नियम बनाए गए हैं।
एक्सरे मशीन के लिए रेडियोग्राफर व अल्ट्रासाउंड के लिए विशेषज्ञ को लेकर कई जिलों में पद खाली पड़े हैं। विभाग कई बार इन पदों को भरने के लिए लिख चुका है। दोबारा से विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा ताकि मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
डा. अशोक चौधरी
सिविल सर्जन फतेहाबाद
जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल से दूसरे अस्पताल में धक्के खाने का मजबूर हो रहे हैं। उधर लाखों रुपये कीमत की आई मशीनें जंग खा रही हैं।
अकेले फतेहाबाद जिले की अगर हम बात करें तो यहां चार सीएचसी पर एक्सरे मशीनें तो हैं लेकिन इन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। फतेहाबाद सिविल अस्पताल में कंट्रैक्ट बेस पर रेडियोग्राफर काम चला रहा है। यही हालात सिविल अस्पताल फतेहाबाद की अल्ट्रासाउंड मशीन की है।
सिर्फ एक्सरे के चक्कर में होते हैं रोजना एक दर्जन मरीज रेफर
फतेहाबाद जिले के भूना, जाखल, भट्टू तथा फतेहाबाद सेक्टर तीन के पॉलीक्लीनिक में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक्सरे मशीनें लगवा दी गई। लेकिन विभाग के पास इसे चलाने वाला कोई रेडियोग्राफर ही नहीं है।
भूना, जाखल, भट्टू में इस समय हालात ऐसे हैं कि एक्सरे के चक्कर में मरीजों को फतेहाबाद व टोहाना के सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है।
आमतौर पर दुर्घटना या मारपीट के केस में फैक्चर आदि का पता लगाने के लिए एक्सरे करना पड़ता है। ऐसे में यहां पर सुविधा उपलब्ध न होने के कारण परेशान मरीजों को होना पड़ता।
एक साल से कमरे में ही बंद है एक्सरे मशीन
पॉलिक्लीनिक में एक साल पहले एक्सरे मशीन भेजी गई थी लेकिन इसे चलाने के लिए रेडियोग्राफर न होने के कारण यह कक्ष साल भर से बंद पड़ी है। नहीं चल पाने के कारण मरीज परेशान होकर इधर उधर भटकने को मजबूर हैं।
दो साल से बंद है अल्ट्रासाउंड मशीन
फतेहाबाद के सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन को चलाने वाला विशेषज्ञ नहीं है जिसका नतीजा यह है कि गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकना पड़ रहा है।
विभाग गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड के लिए प्राइवेट अस्पताल से मदद लेता है जिसके लिए विभाग की तरफ से अस्पताल को भुगतान किया जाता है।
लेकिन अन्य बीमारियों के लिए मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जेब हल्की करनी पड़ती है। विभाग को अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए कट्रैक्ट बेस पर भी कोई विशेषज्ञ नहीं मिल रहा है इसके पीछे कारण यह भी है कि सरकार द्वारा सख्त नियम बनाए गए हैं।
एक्सरे मशीन के लिए रेडियोग्राफर व अल्ट्रासाउंड के लिए विशेषज्ञ को लेकर कई जिलों में पद खाली पड़े हैं। विभाग कई बार इन पदों को भरने के लिए लिख चुका है। दोबारा से विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा ताकि मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
डा. अशोक चौधरी
सिविल सर्जन फतेहाबाद