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Fatehabad News: पराली की आग के धुएं ने हवा में घोला जहर
Mon, 21 Oct 2024 04:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 21 Oct 2024 04:29 AM IST
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गांव बड़ोपल में रविवार सुबह खेत की पराली में लगी आग बुझाता कर्मचारी।
फतेहाबाद। फतेहाबाद जिले में धान की कटाई का सीजन शुरू होने के साथ ही फसल अवशेष जलने के मामले भी लगातार आ रहे हैं। रविवार को पराली की आग के धुएं हवा में फैल रही है। पूरे दिन वातावरण में धुएं की परत लिपटी रही।
इस कारण दुपहिया वाहन चालकों को आंखों में जलन महसूस हुई तो वहीं सांस के मरीजों को भी सांस लेने में दिक्कत हुई। धुएं और अन्य कारणों से जिले में एक्यूआई 242 दर्ज किया गया है, जो हानिकारक स्थिति में पहुंच गया है। जिले में अभी तक हरसैक की ओर से 40 फायर लोकेशन भेजी जा चुकी हैं। इनमें से 20 जगह पर धान की फसल के अवशेष जलने की पुष्टि हो चुकी है। इन 20 मामलों में कृषि विभाग द्वारा किसानों पर 40,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
गांव अकावाली, ढाणी गोपाल, हुक्मावाली व नहला में पराली जलाने के मामले में कृषि विभाग द्वारा छह किसानों पर एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत पुलिस को दे दी गई है। प्रदेश सरकार और प्रशासन द्वारा पराली जलाने पर एफआईआर करवाने के आदेश जारी होने के अगले ही दिन रविवार को 4 जगहों पर पराली जलाने के मामले आ गए। जिले में सबसे ज्यादा पराली भूना खंड में जल रही है। फतेहाबाद डिविजन में फसल अवशेष जलाने के 19 मामले आए हैं जबकि टोहाना में 15 और रतिया में 6 मामले आए हैं।
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जिले के 33 गांव रेड जोन और 76 यलो जोन में
जिले के 271 गांवों में से 109 गांवों में पराली में आग लगाने की आशंका रहती है। प्रशासन की ओर से जिले के 33 गांवों को रेड जोन और 76 गांवों को यलो जोन में रखा गया है। यहां निगरानी के लिए भी विशेष टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक गांव में नोडल अधिकारी लगाया गया है। इसके अलावा सरपंचों, नंबरदारों, ग्राम सचिवों, पटवारियों को भी निगरानी टीमों में शामिल किया गया है। हालांकि, पिछले तीन-चार साल से लगातार बढ़ रही जागरूकता का भी असर दिखा है। पिछले साल 20 अक्तूबर तक जिले में फसल अवशेष जलाने के 91 मामले आए थे। मगर इस बार 50 फीसदी तक कम मामले आए हैं।
भूना में प्लांट होने के बावजूद अधिक जल रही पराली
विशेष बात यह है कि भूना में बायो एनर्जी प्लांट होने के बावजूद यहां सबसे अधिक पराली जल रही है। प्लांट का संचालन करने वाली कंपनी की ओर से खुद के बेलर किसानों के खेतों में भेजकर पराली की गांठें बनाई जा रही है। फिर भी इस क्षेत्र में पराली में आग लगाने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अब इस क्षेत्र में किसानों पर और सख्ती की जाएगी। साथ ही जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
यह रहती है एक्यूआई के हिसाब से वातावरण की स्थिति
0 से 50 एक्यूआई - बेहतर
51 से 100 एक्यूआई - संतोषजनक
101 से 200 एक्यूआई - मध्यम
201 से 300 एक्यूआई - घटिया
301 से 400 - बेहद घटिया
401 से 500 - गंभीर
मुंह पर मास्क लगाकर रखें मरीज
पराली की आग का धुआं वातावरण में छाए रहने से सांस के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। ऐसे मौसम में सांस के मरीजों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल करने की जरूरत है। सांस के रोगियों को मुंह पर मास्क लगा कर रखना चाहिए। ज्यादा जरूरी काम हो, तभी घर से निकलना चाहिए। -डॉ. मनीष टुटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद।
किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चल रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले मामले कम आए हैं। धान की पराली का प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। पिछले साल 11 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। -डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
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इस कारण दुपहिया वाहन चालकों को आंखों में जलन महसूस हुई तो वहीं सांस के मरीजों को भी सांस लेने में दिक्कत हुई। धुएं और अन्य कारणों से जिले में एक्यूआई 242 दर्ज किया गया है, जो हानिकारक स्थिति में पहुंच गया है। जिले में अभी तक हरसैक की ओर से 40 फायर लोकेशन भेजी जा चुकी हैं। इनमें से 20 जगह पर धान की फसल के अवशेष जलने की पुष्टि हो चुकी है। इन 20 मामलों में कृषि विभाग द्वारा किसानों पर 40,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
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गांव अकावाली, ढाणी गोपाल, हुक्मावाली व नहला में पराली जलाने के मामले में कृषि विभाग द्वारा छह किसानों पर एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत पुलिस को दे दी गई है। प्रदेश सरकार और प्रशासन द्वारा पराली जलाने पर एफआईआर करवाने के आदेश जारी होने के अगले ही दिन रविवार को 4 जगहों पर पराली जलाने के मामले आ गए। जिले में सबसे ज्यादा पराली भूना खंड में जल रही है। फतेहाबाद डिविजन में फसल अवशेष जलाने के 19 मामले आए हैं जबकि टोहाना में 15 और रतिया में 6 मामले आए हैं।
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जिले के 33 गांव रेड जोन और 76 यलो जोन में
जिले के 271 गांवों में से 109 गांवों में पराली में आग लगाने की आशंका रहती है। प्रशासन की ओर से जिले के 33 गांवों को रेड जोन और 76 गांवों को यलो जोन में रखा गया है। यहां निगरानी के लिए भी विशेष टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक गांव में नोडल अधिकारी लगाया गया है। इसके अलावा सरपंचों, नंबरदारों, ग्राम सचिवों, पटवारियों को भी निगरानी टीमों में शामिल किया गया है। हालांकि, पिछले तीन-चार साल से लगातार बढ़ रही जागरूकता का भी असर दिखा है। पिछले साल 20 अक्तूबर तक जिले में फसल अवशेष जलाने के 91 मामले आए थे। मगर इस बार 50 फीसदी तक कम मामले आए हैं।
भूना में प्लांट होने के बावजूद अधिक जल रही पराली
विशेष बात यह है कि भूना में बायो एनर्जी प्लांट होने के बावजूद यहां सबसे अधिक पराली जल रही है। प्लांट का संचालन करने वाली कंपनी की ओर से खुद के बेलर किसानों के खेतों में भेजकर पराली की गांठें बनाई जा रही है। फिर भी इस क्षेत्र में पराली में आग लगाने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अब इस क्षेत्र में किसानों पर और सख्ती की जाएगी। साथ ही जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
यह रहती है एक्यूआई के हिसाब से वातावरण की स्थिति
0 से 50 एक्यूआई - बेहतर
51 से 100 एक्यूआई - संतोषजनक
101 से 200 एक्यूआई - मध्यम
201 से 300 एक्यूआई - घटिया
301 से 400 - बेहद घटिया
401 से 500 - गंभीर
मुंह पर मास्क लगाकर रखें मरीज
पराली की आग का धुआं वातावरण में छाए रहने से सांस के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। ऐसे मौसम में सांस के मरीजों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल करने की जरूरत है। सांस के रोगियों को मुंह पर मास्क लगा कर रखना चाहिए। ज्यादा जरूरी काम हो, तभी घर से निकलना चाहिए। -डॉ. मनीष टुटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद।
किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चल रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले मामले कम आए हैं। धान की पराली का प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। पिछले साल 11 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। -डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, फतेहाबाद।