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Fatehabad News: तीन साल से ढेंचा के बीज पर सब्सिडी मिलने की योजना बंद

Thu, 02 Apr 2026 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 02 Apr 2026 11:38 PM IST
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The scheme of providing subsidy on Dhaincha seeds has been stopped for three years
जिले में ढेंचा की फसल को बुवाई करके हरी खाद तैयार करता किसान। फाइल फोटो
फतेहाबाद। भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए जिले के किसानों को सस्ता बीज नहीं मिल रहा है। पिछले तीन वर्षों से किसानों को हरी खाद ढेंचा, उड़द और मूंग के लिए हरियाणा बीज विकास निगम से मिलने वाला सब्सिडी के बीज की योजना बंद कर दी है।
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इनके स्थान पर सरकार ने अब प्रति एकड़ 1000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। किसान इस राशि को बढ़ाकर 5000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। हरियाणा सरकार ने पहले की तरह बीज पर सीधे सब्सिडी देने के बजाय अब किसानों से प्रोत्साहन राशि के लिए 15 अप्रैल से लेकर 16 मई के बीच आवेदन मांगे हैं। नई नीति के तहत, जो किसान अपने खेत में हरी खाद की बिजाई करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से 1000 रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। किसानों को बाजार से बीज खरीदने के लिए अपनी जेब से राशि खर्च करनी पड़ रही है। ऐसे में किसानों का हरी खाद के प्रति रुझान कम हो रहा है।
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लागत और सरकारी मदद में अंतर



किसान दिलजीत, रामस्वरुप, धर्मपाल और पवन कुमार आदि ने बताया कि खेती की लागत में डीजल और बीज के भाव में वृद्धि हुई है, जबकि सरकारी मदद बहुत कम है। वर्तमान में बाजार में ढेंचा का बीज लगभग 2500 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मिल रहा है। मूंग की बिजाई का खर्च भी लगभग 1000 रुपये प्रति एकड़ आता है। इसके बाद खेत की में मूंग की बिजाई का खर्च अलग है। सरकार को इसके लिए या तो बीज फ्री में उपलब्ध करवाना चाहिए या फिर प्रोत्साहन राशि को 1000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 5000 रुपये तक करना चाहिए।
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उर्वरता शक्ति को बढ़ाती है हरी खाद

कृषि तकनीकी अधिकारी डॉ. राजपाल ने बताया कि लगातार रासायनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। ढेंचा और मूंग जैसी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं। किसानों को यूरिया और डीएपी पर निर्भर न रहकर जैविक खाद को बढ़ावा देना चाहिए। इससे जमीन की उर्वरता शक्ति बढ़ती है। इसके लिए सरकार की ओर से प्रति एकड़ पर 1000 रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।

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सरकार केवल 1000 रुपये दे रही है, जो ढेंचा उगाने वाले किसानों के लिए बीज की कुल लागत का आधा भी नहीं है।



सरकार एक तरफ तो भूमि सुधार और जैविक खेती की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ हरी खाद के बीज पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म कर दी गई है। 1000 रुपये में ढेंचा का बीज भी नहीं आता, बिजाई और जुताई का खर्च अलग है।

चांदी राम, किसान



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प्रदेश सरकार पहले की तरह निशुल्क या उचित अनुदान पर बीज उपलब्ध करवाए। यदि सरकार प्रोत्साहन राशि ही देना चाहती है, तो इसे बढ़ाकर कम से कम 5000 रुपये प्रति एकड़ किया जाए ताकि किसान का बीज, खाद और डीजल का खर्च निकल सके।


रामनिवास, किसान।

:: रासायनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। ढेंचा और मूंग जैसी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं। किसानों को केवल यूरिया और डीएपी पर निर्भर रहना चाहिए। हरी खाद तैयार करने के लिए सरकार प्रति एकड़ पर 1000 रुपये की प्रोत्साहन दिया जाएगा।

डॉ. राजपाल, तकनीकी सहायक, कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
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