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दुनिया में भक्ति का रिश्ता ही सबसे उच्च व पवित्र : संत कंवर
Tue, 18 Feb 2025 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 18 Feb 2025 11:31 PM IST
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फतेहाबाद के सिरसा रोड़ स्थित नई अनाज मंडी के सामने राधा स्वामी सत्संग भवन में भिवानी के दिनोद आश
फतेहाबाद। सिरसा रोड स्थित नई अनाज मंडी के सामने राधा स्वामी सत्संग भवन में भिवानी के दिनोद आश्रम से संत कंवर साहब ने सत्संग किया। उन्होंने कहा की दुनिया में सब नाते रिश्ते झूठे हैं। भक्ति का नाता संत सतगुरु जोड़ते हैं।
संत ने कहा कि केवल उन्हीं में ताकत है कि वे इस दुनियादारी के नातों से आपको मुक्त करा सकें। इस दुनिया में मुर्दे की भांति रहो। सिर्फ किनारे बैठ कर आप मोती नहीं पा सकते। नाम रूपी मोती पाने के लिए तो भक्ति रूपी महासागर की गहराई में उतरना ही पड़ेगा। साध संगत को सत्संग वचन सुनाते हुए हुजूर कंवर साहेब ने फरमाया कि हृदय के दर्पण को हरिनाम से साफ करते रहो आपको परमात्मा का स्वरूप दिख जाएगा।
तन से सेवा, धन से दान और मन से नाम का सुमिरन करो। मीठा बोलना सीखो क्योंकि मीठे वचन से दुश्मन भी आपका मीत बन जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने ही द्वारा किये कर्मों को देखकर अंतकाल में पछताता है क्योंकि पहले उसने जीवन के मोल को जाना ही नहीं।
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पहले उसने अपने आप को शुद्ध व पवित्र किया ही नहीं। पहले इंसान हर रोज मरता रहा लेकिन उसने मर कर भी अमर होने का प्रयास ही नहीं किया। नशे विषयों से दूर रहो। परोपकार परमार्थ करो। माता पिता बड़े बुजुर्गों की सेवा करो।
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संत ने कहा कि केवल उन्हीं में ताकत है कि वे इस दुनियादारी के नातों से आपको मुक्त करा सकें। इस दुनिया में मुर्दे की भांति रहो। सिर्फ किनारे बैठ कर आप मोती नहीं पा सकते। नाम रूपी मोती पाने के लिए तो भक्ति रूपी महासागर की गहराई में उतरना ही पड़ेगा। साध संगत को सत्संग वचन सुनाते हुए हुजूर कंवर साहेब ने फरमाया कि हृदय के दर्पण को हरिनाम से साफ करते रहो आपको परमात्मा का स्वरूप दिख जाएगा।
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तन से सेवा, धन से दान और मन से नाम का सुमिरन करो। मीठा बोलना सीखो क्योंकि मीठे वचन से दुश्मन भी आपका मीत बन जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने ही द्वारा किये कर्मों को देखकर अंतकाल में पछताता है क्योंकि पहले उसने जीवन के मोल को जाना ही नहीं।
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पहले उसने अपने आप को शुद्ध व पवित्र किया ही नहीं। पहले इंसान हर रोज मरता रहा लेकिन उसने मर कर भी अमर होने का प्रयास ही नहीं किया। नशे विषयों से दूर रहो। परोपकार परमार्थ करो। माता पिता बड़े बुजुर्गों की सेवा करो।