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Fatehabad News: फतेहाबाद में बढ़ रही सेम समस्या 50 हजार एकड़ कृषि भूमि बेकार
Sun, 07 Sep 2025 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 07 Sep 2025 11:30 PM IST
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गांव मेहूवाला की सेमग्रस्त भूमि। संवाद
फतेहाबाद। जिले में सेमग्रस्त भूमि का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जलस्तर ऊंचा होने के कारण करीब 50 हजार एकड़ कृषि योग्य भूमि बर्बाद हो चुकी है। हल्की बारिश में भी जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे किसान लगातार नुकसान झेल रहे हैं।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए जिले के 10 गांवों के किसानों ने भूमि को दोबारा उपजाऊ बनाने के लिए प्रदेश सरकार से सोलर पंप प्रोजेक्ट लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि ड्रेन बनाकर पाइपलाइन डाली जाए, ताकि अतिरिक्त पानी की निकासी हो सके और जमीन फिर से खेती लायक बन सके।
कृषि विभाग के अनुसार, 36 गांवों की 50 हजार एकड़ भूमि सेमग्रस्त हो चुकी है। इनमें से 16 गांवों की 35,120 एकड़ भूमि पर पहले ही सोलर पंप लगाए जा चुके हैं। अब जिले के 10 और गांव मेहूवाला, खाराखेड़ी, काजलहेड़ी, कुम्हारिया, गोरखपुर, बैजलपुर, भोड़ा होशनाक, बनावाली, किरढ़ान और ढांड की 9,500 एकड़ भूमि और चपेट में आ रही है।
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ड्रेन बनाकर डाली जाए पाइपलाइन :
प्रभावित किसानों ने बताया कि कई वर्षों से इस भूमि पर कोई पैदावार नहीं हो रही। जमीन में पानी भरने से मिट्टी की उर्वरकता भी खत्म होती जा रही है। किसानों ने कहा कि अगर समय रहते सोलर पंप प्रोजेक्ट लागू कर, ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त नहीं किया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। हालांकि कृषि मृदा एवं लवणता विभाग ने इन गांवों में प्रोजेक्ट के भूमि और लगने वाले पंपों की संख्या का एस्टीमेट बनाया गया है।
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इन गांवों में है समस्या
गांव-सेमग्रस्त भूमि-आवश्यक पंप
मेहूवाला- 400-05
खाराखेड़ी-2000-20
काजलहेड़ी-1430-15
कुम्हारिया-1200-12
गोरखपुर-1500-15
बैजलपुर-500-05
भोड़ा होशनाक-200-03
बनावाली-1000-10
किरढ़ान-700-07
ढांड-700-07
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सेम की समस्या के कारण खेत में पिछले कई वर्षों से पैदावार नहीं हो रही है। प्रशासन को सेम का स्थायी समाधान कर पाइपलाइन डालनी चाहिए। ताकि भूमि को फिर से उपजाऊ बनाया जा सके।
-राम सिंह कड़वासरा किसान।
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सेम की समस्या होने से जमीन खराब हो चुकी है। सेमग्रस्त भूमि को ठीक करने के लिए प्रशासन से कई बार मांग की गई है लेकिन समाधान नहीं हो सका है। ऐसे में उनकी खेती प्रभावित हो रही है।
-लीलूराम, किसान।
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सेम की समस्या से ग्रस्त हो चुकी कृषि योग्य भूमि खराब हो चुकी है। बिना बारिश के ही इस जमीन पर दलदल बना रहता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो रही है।
-उमेद, किसान।
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कृषि योग्य भूमि बेकार होने के कारण उनको खेती छोड़नी पड़ रही है। पिछले 15 वर्षों से सेम की रकबा लगातार बढ़ रहा है। इस समस्या का समाधान प्रशासन को जल्द करना चाहिए।
-विक्रम किसान।
:: सेमग्रस्त भूमि में लगे सोलर पंप जिन गांवों में शुरू हुए हैं उनकी भूमि में काफी सुधार हुआ है। विभाग को अगर अनुमति मिलती है ते इन गांवों में भी सोलर पंप लग सकते हैं।
-राजेश कुमार, कृषि मृदा एवं लवणता विभाग, फतेहाबाद।
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इस गंभीर समस्या को देखते हुए जिले के 10 गांवों के किसानों ने भूमि को दोबारा उपजाऊ बनाने के लिए प्रदेश सरकार से सोलर पंप प्रोजेक्ट लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि ड्रेन बनाकर पाइपलाइन डाली जाए, ताकि अतिरिक्त पानी की निकासी हो सके और जमीन फिर से खेती लायक बन सके।
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कृषि विभाग के अनुसार, 36 गांवों की 50 हजार एकड़ भूमि सेमग्रस्त हो चुकी है। इनमें से 16 गांवों की 35,120 एकड़ भूमि पर पहले ही सोलर पंप लगाए जा चुके हैं। अब जिले के 10 और गांव मेहूवाला, खाराखेड़ी, काजलहेड़ी, कुम्हारिया, गोरखपुर, बैजलपुर, भोड़ा होशनाक, बनावाली, किरढ़ान और ढांड की 9,500 एकड़ भूमि और चपेट में आ रही है।
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ड्रेन बनाकर डाली जाए पाइपलाइन :
प्रभावित किसानों ने बताया कि कई वर्षों से इस भूमि पर कोई पैदावार नहीं हो रही। जमीन में पानी भरने से मिट्टी की उर्वरकता भी खत्म होती जा रही है। किसानों ने कहा कि अगर समय रहते सोलर पंप प्रोजेक्ट लागू कर, ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त नहीं किया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। हालांकि कृषि मृदा एवं लवणता विभाग ने इन गांवों में प्रोजेक्ट के भूमि और लगने वाले पंपों की संख्या का एस्टीमेट बनाया गया है।
इन गांवों में है समस्या
गांव-सेमग्रस्त भूमि-आवश्यक पंप
मेहूवाला- 400-05
खाराखेड़ी-2000-20
काजलहेड़ी-1430-15
कुम्हारिया-1200-12
गोरखपुर-1500-15
बैजलपुर-500-05
भोड़ा होशनाक-200-03
बनावाली-1000-10
किरढ़ान-700-07
ढांड-700-07
सेम की समस्या के कारण खेत में पिछले कई वर्षों से पैदावार नहीं हो रही है। प्रशासन को सेम का स्थायी समाधान कर पाइपलाइन डालनी चाहिए। ताकि भूमि को फिर से उपजाऊ बनाया जा सके।
-राम सिंह कड़वासरा किसान।
सेम की समस्या होने से जमीन खराब हो चुकी है। सेमग्रस्त भूमि को ठीक करने के लिए प्रशासन से कई बार मांग की गई है लेकिन समाधान नहीं हो सका है। ऐसे में उनकी खेती प्रभावित हो रही है।
-लीलूराम, किसान।
सेम की समस्या से ग्रस्त हो चुकी कृषि योग्य भूमि खराब हो चुकी है। बिना बारिश के ही इस जमीन पर दलदल बना रहता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो रही है।
-उमेद, किसान।
कृषि योग्य भूमि बेकार होने के कारण उनको खेती छोड़नी पड़ रही है। पिछले 15 वर्षों से सेम की रकबा लगातार बढ़ रहा है। इस समस्या का समाधान प्रशासन को जल्द करना चाहिए।
-विक्रम किसान।
:: सेमग्रस्त भूमि में लगे सोलर पंप जिन गांवों में शुरू हुए हैं उनकी भूमि में काफी सुधार हुआ है। विभाग को अगर अनुमति मिलती है ते इन गांवों में भी सोलर पंप लग सकते हैं।
-राजेश कुमार, कृषि मृदा एवं लवणता विभाग, फतेहाबाद।