{"_id":"60e88e148ebc3ec25207ce4e","slug":"the-plan-to-save-electricity-failed-the-solar-plant-did-not-run-even-for-five-days-in-five-years-fatehabad-news-rtk6168942187","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली बचाने की योजना फेल, नप में पांच साल में पांच दिन भी नहीं चला सोलर प्लांट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजली बचाने की योजना फेल, नप में पांच साल में पांच दिन भी नहीं चला सोलर प्लांट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजली बचाने के लिए अक्षय ऊर्जा विभाग की योजनाएं सरकारी विभागों में ही खरी नहीं उतर रही है। कहीं सोलर प्लांट लगे नहीं हैं तो जहां लगे हैं वहां काम नहीं कर रहे हैं। बिजली की खपत बढ़ रही है लेकिन इसे बचाने की योजनाएं धरातल पर सिरे नहीं चढ़ रही है। नगर परिषद कार्यालय के ऊपर लगा सोलर प्लांट इसका उदाहरण है। पांच साल पहले नगर परिषद में लगाया गया सोलर प्लांट पांच दिन भी नहीं चल पाया है। पांच सालों से प्लांट शुरू ही नहीं हो पाया है। अधिकारी प्लांट को शुरू करवाने के लिए चिट्ठी-चिट्ठी खेल रहे हैं। लेकिन न प्लांट शुरू हुआ है और न ही योजना सिरे चढ़ पाई है। सोलर प्लांट के बावजूद कार्यालय का हर माह हजारों रुपये का बिल नगर परिषद भर रहा है।
नगर परिषद कार्यालय के ऊपर साल 2016 में 10 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया गया था। प्लांट लगाने के लिए नगर परिषद ने एक लाख रुपये भरे थे और बाकी पर सब्सिडी मिली थी। प्लांट लगाने के बाद बैटरियों में फाल्ट के कारण ये पांच दिन भी नहीं चल पाया। लॉकडाउन से पहले नप ने इसे ठीक करवाने के लिए विभाग को लिखा। कंपनी के लोग आए लेकिन फिर भी ये शुरू नहीं हो पाया। हालात ये हैं कि बिजली सप्लाई जाने पर नप कार्यालय में कामकाज ठप्प हो जाता है। इसके अलावा बिजली बचाने की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पा रही है। संवाद
सोलर प्लांट लगाया गया : 2016 में
क्षमता : 10 किलोवाट
नप कार्यालय बिजली बिल का कर रहा भुगतान : 25 से 30 हजार (माह)
नप ने शहर में नहीं लगवाई स्ट्रीट सोलर लाइट
शहर में करीब ढाई हजार स्ट्रीट लाइट लगी हुई है। इसमें मुख्य रूप से हिसार-सिरसा रोड, भट्टू रोड, रतिया रोड, भूना रोड शामिल हैं। इसके अलावा शहर और वार्डों व पार्कों में लाइटें लगी हैं। लेकिन जानकर हैरानी होगी कि सोलर आधारित कोई भी स्ट्रीट लाइट नहीं है। शहर में अभी 4200 स्ट्रीट लाइटें और लगाने की योजना है। इसमें 900 पीले बल्ब भी बदले जाने हैं।
विज्ञापन
कोट
लोक निर्माण विभाग की तरफ से यहां पर सोलर प्लांट लगाया गया था। प्लांट खराब होने बारे संबंधित विभाग को लिखा था। कंपनी की तरफ से प्लांट ठीक करने वाले आए थे लेकिन शुरू नहीं हो पाया।
- सुमित चोपड़ा, एमई, नगर परिषद।
विज्ञापन
नगर परिषद कार्यालय के ऊपर साल 2016 में 10 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया गया था। प्लांट लगाने के लिए नगर परिषद ने एक लाख रुपये भरे थे और बाकी पर सब्सिडी मिली थी। प्लांट लगाने के बाद बैटरियों में फाल्ट के कारण ये पांच दिन भी नहीं चल पाया। लॉकडाउन से पहले नप ने इसे ठीक करवाने के लिए विभाग को लिखा। कंपनी के लोग आए लेकिन फिर भी ये शुरू नहीं हो पाया। हालात ये हैं कि बिजली सप्लाई जाने पर नप कार्यालय में कामकाज ठप्प हो जाता है। इसके अलावा बिजली बचाने की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पा रही है। संवाद
विज्ञापन
सोलर प्लांट लगाया गया : 2016 में
क्षमता : 10 किलोवाट
नप कार्यालय बिजली बिल का कर रहा भुगतान : 25 से 30 हजार (माह)
नप ने शहर में नहीं लगवाई स्ट्रीट सोलर लाइट
शहर में करीब ढाई हजार स्ट्रीट लाइट लगी हुई है। इसमें मुख्य रूप से हिसार-सिरसा रोड, भट्टू रोड, रतिया रोड, भूना रोड शामिल हैं। इसके अलावा शहर और वार्डों व पार्कों में लाइटें लगी हैं। लेकिन जानकर हैरानी होगी कि सोलर आधारित कोई भी स्ट्रीट लाइट नहीं है। शहर में अभी 4200 स्ट्रीट लाइटें और लगाने की योजना है। इसमें 900 पीले बल्ब भी बदले जाने हैं।
विज्ञापन
कोट
लोक निर्माण विभाग की तरफ से यहां पर सोलर प्लांट लगाया गया था। प्लांट खराब होने बारे संबंधित विभाग को लिखा था। कंपनी की तरफ से प्लांट ठीक करने वाले आए थे लेकिन शुरू नहीं हो पाया।
- सुमित चोपड़ा, एमई, नगर परिषद।