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Fatehabad News: खेजड़ली के 363 पर्यावरण शहीदों की याद में संस्था ने शुरू किया पौधरोपण अभियान
Sat, 12 Sep 2026 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 12 Sep 2026 11:21 PM IST
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फतेहाबाद में पौध रोपण करते हुए संस्था के पदाधिकारी
फतेहाबाद। राजस्थान के जोधपुर के समीप ग्राम खेजड़ली में पर्यावरण रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले 363 शहीदों की याद में जागो संस्था ने पौधरोपण अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत 21 सितंबर तक जिले के विभिन्न स्थानों पर 363 पौधे लगाए जाएंगे।
संस्था के सदस्यों ने शहीद स्मारक पार्क में खेजड़ी, बड़, पीपल, गुलमोहर, नीम, जरकंडा, बुगनबेल व सहजन के पौधे रोपे और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी ली। इस कार्य में जागो संस्था के प्रधान देवेंद्र दहिया, सुरेंद्र असीजा, प्रमोद बजाज और सेवा सिंह मुवाल के साथ जिंदगी संस्था के प्रधान हरदीप सिंह, मिथलेश रोहिला, भारत गोयल, अनिल चौधरी, अमरजीत मालवां, राजेंद्र व रमेश कंबोज ने सहयोग किया।
देवेंद्र सिंह दहिया और राजेश भादू ने बताया कि खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए 363 लोगों ने हंसते-हंसते अपने सिर कटवाकर शहादत दी थी। उन्हीं की याद में यह अभियान चलाया गया है। संस्था के सदस्यों ने रोष जताते हुए कहा कि सरकार ने पर्यावरण शहीदों के लिए 11 सितंबर का दिन तो निर्धारित कर दिया लेकिन इस अवसर पर कोई सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं होते हैं।
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उन्होंने मांग की कि इस दिन पौधरोपण के साथ स्कूलों में निबंध व भाषण प्रतियोगिताएं भी आयोजित होनी चाहिए ताकि नई पीढ़ी को प्रेरणा मिले। संस्था ने सरकार से मांग की है कि वन शहीद दिवस 11 सितंबर की बजाय भाद्रपद शुक्ल दशमी को मनाया जाए। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण प्रेमियों की ओर से हर साल इसी तिथि को खेजड़ली में मेला लगाया जाता है जो इस बार 21 सितंबर को है।
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संस्था के सदस्यों ने शहीद स्मारक पार्क में खेजड़ी, बड़, पीपल, गुलमोहर, नीम, जरकंडा, बुगनबेल व सहजन के पौधे रोपे और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी ली। इस कार्य में जागो संस्था के प्रधान देवेंद्र दहिया, सुरेंद्र असीजा, प्रमोद बजाज और सेवा सिंह मुवाल के साथ जिंदगी संस्था के प्रधान हरदीप सिंह, मिथलेश रोहिला, भारत गोयल, अनिल चौधरी, अमरजीत मालवां, राजेंद्र व रमेश कंबोज ने सहयोग किया।
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देवेंद्र सिंह दहिया और राजेश भादू ने बताया कि खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए 363 लोगों ने हंसते-हंसते अपने सिर कटवाकर शहादत दी थी। उन्हीं की याद में यह अभियान चलाया गया है। संस्था के सदस्यों ने रोष जताते हुए कहा कि सरकार ने पर्यावरण शहीदों के लिए 11 सितंबर का दिन तो निर्धारित कर दिया लेकिन इस अवसर पर कोई सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं होते हैं।
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उन्होंने मांग की कि इस दिन पौधरोपण के साथ स्कूलों में निबंध व भाषण प्रतियोगिताएं भी आयोजित होनी चाहिए ताकि नई पीढ़ी को प्रेरणा मिले। संस्था ने सरकार से मांग की है कि वन शहीद दिवस 11 सितंबर की बजाय भाद्रपद शुक्ल दशमी को मनाया जाए। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण प्रेमियों की ओर से हर साल इसी तिथि को खेजड़ली में मेला लगाया जाता है जो इस बार 21 सितंबर को है।