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नई शिक्षा नीति को शिक्षाविदों ने सराहा

Thu, 30 Jul 2020 11:15 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2020 11:15 PM IST
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The new educaion policy was appreciated by academics
केंद्र सरकार ने बुधवार को 34 साल के बाद नई शिक्षा नीति को अपनी स्वीकृति दे दी। नई शिक्षा नीति में पांचवीं कक्षा तक बच्चे अपनी मात्र भाषा में पढ़ पाएंगे। ऐसा पहली बार हो रहा है। बाहरवीं की परीक्षा में संकायों के हिसाब से फर्क को खत्म कर दिया गया है। नई शिक्षा नीति में बाहरवीं तक के छात्रों को ध्यान में रखते हुए नया शैक्षणिक कार्यक्रम घोषित किया गया है। नई शिक्षा नीति पर अमर उजाला ने जिला के शिक्षाविदों से बातचीत कर उनकी राय जानी।
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अब तक केंद्र सरकार के पास शिक्षा नाम से शिक्षा मंत्रालय ही नहीं था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय शिक्षा मंत्रालय का कामकाज देख रहा था। इस नीति में बदलाव यह हुआ है कि अब पहली बार शिक्षा मंत्रालय के अधीन देशभर की एजूकेशन की देखरेख की जा सकती है। -डॉ. माला उपाध्याय, प्राचार्य, डीएवी स्कूल टोहाना।
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नई शिक्षा नीति में सबसे खास पहलू यह है कि देशभर के 2 करोड़ बच्चों को मुख्य धारा में लाए जाने का एक मिशन रखा गया है। छठी कक्षा से इंटर्नशिप के साथ-साथ व्यवसायिक शिक्षा दी जाएगी। कोई बच्चा बीच में पढ़ाई छोड़ता है तो उसे भी सर्टिफि केट दिया जायेगा। केंद्र सरकार के इस बदलाव से देशभर के बच्चों को फायदा होगा। -गौरव भुटानी, डायरेक्टर, ग्रीन वैली स्कूल।
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6 से 9 वर्ष के बच्चे आमतौर पर पहली से तीसरी कक्षा में होते है। केन्द्र सरकार ने शिक्षा नीति में बदलाव किया है जिसके तहत यह मिशन शुरू किया जायेगा कि 3 से 6 साल का बच्चा एक ही तरीके से पढ़ाई कर सके। 1986 के बाद अब शिक्षा नीति बनाई गई है। यह देशहित में एक अच्छा फैसला है। -कर्मवीर ठाकुर, प्राचार्य, मिलिनियम स्कूल।

अभी तक आयु वर्ग के हिसाब से बच्चे या स्कूल संचालक अपनी मर्जी से पढ़ा रहे थे। नई शिक्षा नीति में इनके लिए प्री नर्सरी से पांचवीं तक पाठ्यक्रम तैयार करने व 5 से 8वीं तक 4 साल के लिए अलग से कार्यक्रम घोषित किया जायेगा। 5 से 6 वर्ष के बच्चों को स्कूल प्रणाली के साथ खेलों के जरिये भी शिक्षा दी जाएगी। छोटे बच्चों के लिए पढ़ने का मनोरंजक साधन होगा। -रणधीर पूनिया, प्राचार्य, मॉडल केएम स्कूल।
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