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Fatehabad News: शहर बचा लिया, ढाणियां संभालने वाला कोई नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jul 2023 11:42 PM IST
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The city was saved, there is no one to take care of the fields
फतेहाबाद के भूना रोड हाईवे से गांव बरसीन तक भरा बाढ़ का पानी
फतेहाबाद। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के दावों के बावजूद धरातल पर सच्चाई हकीकत से कोसों दूर है। बाढ़ से फतेहाबाद शहर को तो बचा लिया लेकिन फतेहाबाद से सटे भूना रोड पर 13 छोटे और बड़े गांवों के साथ करीब 100 ढाणियों के लोग आज भी बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें सात गांव व ढाणियां ऐसे हैं, जहां के लोग मेहनत-मजदूरी करके पेट पालते हैं। इन लोगों के लिए ढाणी रूपनगर के माता के मंदिर में चल रहे लंगर का ही सहारा है।
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जिला प्रशासन से अभी भी बाढ़ पीड़ितों को कोई विशेष मदद नहीं मिली है। अपने स्तर पर ये लोग गुजारा कर रहे हैं। हालात तो यह है कि हृदय रोगियों और गर्भवती महिलाओं को ट्रैक्टर के माध्यम से भूना मोड़ पर लाया गया और फिर वहां से अस्पताल लेकर लोग गए। ग्रामीणों में इस बात का रोष है कि उनके पास प्रशासन ने आकर कोई परिस्थितियां तक नहीं जानी हैं।र फिर वहां से अस्पताल लेकर लोग गए। ग्रामीणों में इस बात का रोष है कि उनके पास प्रशासन ने आकर कोई परिस्थितियां तक नहीं जानी हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी की टीम बुधवार को इन्हीं गांवों में दौरा करने के लिए पहुंची। भूना बाईपास पुल बंद होने के कारण धांगड़ सर्विस रोड होते हुए बिसला मोड़ पर पहुंचे। माजरा और धिड़ गांवों की ढाणियों में अभी तक पांच फुट तक पानी चढ़ा हुआ है। अधिकतर लोग ढाणियां छोड़ चुके हैं और जाे ठहरे हुए हैं, वो भय के साये में दिन गुजार रहे हैं। इसी रास्ते में ढाणी रूपनगर के मार्ग पर अभी भी पानी चढ़ा हुआ है। पानी भरे इस मार्ग पर दो से तीन फुट गड्ढे बने हुए हैं, यहां पहले से वॉलंटियर बैठे हैं, जो वाहन चालकों को गड्ढों की जानकारी दे रहे हैं।
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सड़क व खेतों में भरे पानी में कोई फर्क दिखाई नहीं दे रहा और वन-वे हो चुके इस मार्ग पर पानी के कारण कभी भी वाहन चालक पांच फुट पानी से भरे खेतों में गिर सकते हैं। इन ढाणियों में दिनभर बिजली नहीं रहती, रात को कुछ देर बिजली आती है और कट लग जाता है। रात में मच्छरों का कहर रहता है। इसलिए लोग शहर से मच्छरदानियां लाकर उमस भरी गर्मी में सोने को मजबूर हैं। वहीं बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब तक 30 से अधिक सांप पकड़ जा चुके हैं। संवाद

भूना रोड क्षेत्र में ये गांव प्रभावित

भूना रोड क्षेत्र में सबसे पहले बाढ़ का पानी आया था। यह पानी गांव भिरडाना से होते हुए धिड़, बोसवाल, रजाबाद, ढाणी साधवाली, ढाणी सरजा, ढाणी ज्वाला, धिड़, काताखेड़ी, ढाणी रूपनगर, ढाणी कुल्लमखेड़ा व बरसीन के खेतों तक पहुंच गया। यहां पर पहले पानी का बहाव आठ फुट तक था, जो अभी भी पांच फुट तक भरा हुआ है।



मजदूरों का सहारा बना माता जालफा मंदिर

इस क्षेत्र में ढाणी रूपनगर, ढाणी कुल्लमखेड़ा, ढाणी साधवाली, काताखेड़ी, धिड़, रजाबाद व बोसवाल के लोगों के पास कमाई का साधन केवल मजदूरी है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र होने के कारण यहां के लोगों को रोजी रोटी के लाले पड़े हुए हैं। इन लोगों के भोजन के लिए ढाणी रूपनगर में स्थित माता जालफा मंदिर में चल रहा लंगर ही सहारा बना हुआ है। मंदिर कमेटी के सदस्यों ने यहां पर धान की रोपाई करने आए करीब 50 प्रवासी मजदूरों को भी शरण दे रखी है, क्योंकि यह ढाणियों में फंस गए थे।



पीने का पानी भी नसीब नहीं लोगों को



ढाणी रूपनगर के पास ही गांव बलियाला से 12वें हिस्से में धान की देखरेख के लिए आया एक परिवार चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिरी ढाणी में हैं। हरनारायण व उसकी पत्नी किरणदीप ने बताया कि वह सड़क से करीब 100 फुट दूर पानी में घिरे हुए हैं। विधायक व प्रशासन का काफिला आता है और उनको देखे बिना ही निकल जाता है। उनके पास न कोई खाने पीने का साधन है। रात भर सांप उनकी ढाणी के आसपास घूमते रहते हैं। पीने के पानी के लिए भी उनको दूर तक जाना पड़ता है।

बाढ़ के कारण ढाणियां बिखरने के कगार पर

गांव बरसीन से सटी ढाणी निवासी अमन व जसपाल ने बताया कि जिस दिन पानी आया उससे पहले ढाणी को बचाने के लिए उन्होंने तटबंध बना लिए थे। बाढ़ के पानी का प्रवाह ऐसा था कि अब उनकी ढाणी की चहारदीवारी दरकने लगी हैं। छतों में दरारें आ गई हैं। बाढ़ का पानी जब आठ फुट तक था तो उन्होंने ड्रमों व जाली पैड की बोट बनाई और खाने पीने का सामान लेकर आए।




ढाणियों को बचाने के लिए तोड़ी चार सड़कें व माइनर

गांव बोसवाल के रजत व प्रशांत ने बताया कि जब उनके गांव की ओर पानी का तेज बहाव आया तो पानी ढाणियों के अंदर तक घुसने को हो गया था। इसलिए पानी को निकालने के लिए उनको रातोंरात पालसर माइनर व भिरडाना रोड पर चार स्थानों पर सड़क तोड़नी पड़ी, अगर ऐसा न करते तो जान माल का काफी नुकसान हो जाता।



कोट



यह बात आपके जरिये ही मेरे संज्ञान में आई है। मैं इन एरिया की स्थिति की जांच करवाती हूं। हरसंभव सहायता की जाएगी, किसी को परेशानी नहीं होने देंगे।



-मनदीप कौर, डीसी, फतेहाबाद
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