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Fatehabad News: बावड़ी को प्राचीन धरोहर घोषित करने पर व्यापार मंडल ने किया स्वागत
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टोहाना की बावड़ी के प्राचीन फोटो
टोहाना। शहर के वार्ड 19 में स्थित लंबे समय से उपेक्षा की शिकार बावड़ी के संरक्षण का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद लोगों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। नोटिफिकेशन के अनुसार दो महीने में इस बारे में सरकार के मुख्य सचिव को अपने सुझाव दे सकते हैं।
वार्ड 19 निवासी व्यापार मंडल के संरक्षक रमेश गोयल ने कहा कि यह बावड़ी वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी थी। दीवारों और छतों पर झाड़ियां व पेड़ उग आए थे। बड़े दरवाजों और दीवारों के अवशेष ही इसकी पहचान बने हुए थे। कुछ समय से स्थानीय लोग इसमें कचरा डालने लगे थे। जिससे यह स्थल उजाड़ हो रहा अब प्रदेश सरकार ने बावड़ी को संरक्षण में लेने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी किया है वो सराहनीय है।
वार्ड पार्षद नीरू सैनी, श्यामलाल, प्रेम के अनुसार वास्तुकला की दृष्टि से यह बावड़ी कैथल की बावड़ी से समानता रखती है। इसमें सुंदर डिजाइन, विशिष्ट नक्काशी और दूसरे मेहराब के मुख्य मेहराब में अनोखा वृत्ताकार स्वरूप देखने को मिलता है, जो उस काल की स्थापत्य शैली को दर्शाता है। अपनी वर्तमान जर्जर स्थिति के बावजूद यह बावड़ी क्षेत्र के समृद्ध इतिहास और स्थापत्य विरासत का प्रमाण मानी जाती है।
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प्रदेश सरकार की गजट अधिसूचना के तहत बावड़ी को हरियाणा प्राचीन तथा ऐतिहासिक स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1964 के अंतर्गत संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। इसके साथ ही बावड़ी के आसपास का क्षेत्र भी संरक्षित क्षेत्र माना जाएगा, जहां बिना अनुमति किसी प्रकार का निर्माण या बदलाव प्रतिबंधित रहेगा।
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ये है मान्यता
रमेश गोयल ने बताया कि माना जाता है कि इसका निर्माण लोदी शासकों के काल में राजा अनंग पाल के समय हुआ था। इन्होंने वर्ष 1451 से 1526 तक शासन किया। दिल्ली-मुल्तान व्यापार मार्ग पर स्थित यह बावड़ी उस समय यात्रियों और व्यापारियों के लिए जलस्रोत व विश्राम स्थल के रूप में कार्य करती थी। रमेश कुमार ने कहा कि हरियाणा व्यापार मंडल का प्रतिनिधिमंडल सरकार के मुख्य सचिव से मिलेगा और इस बावड़ी को ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल बनाने के बारे में सुझाव भी देगा
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वार्ड 19 निवासी व्यापार मंडल के संरक्षक रमेश गोयल ने कहा कि यह बावड़ी वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी थी। दीवारों और छतों पर झाड़ियां व पेड़ उग आए थे। बड़े दरवाजों और दीवारों के अवशेष ही इसकी पहचान बने हुए थे। कुछ समय से स्थानीय लोग इसमें कचरा डालने लगे थे। जिससे यह स्थल उजाड़ हो रहा अब प्रदेश सरकार ने बावड़ी को संरक्षण में लेने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी किया है वो सराहनीय है।
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वार्ड पार्षद नीरू सैनी, श्यामलाल, प्रेम के अनुसार वास्तुकला की दृष्टि से यह बावड़ी कैथल की बावड़ी से समानता रखती है। इसमें सुंदर डिजाइन, विशिष्ट नक्काशी और दूसरे मेहराब के मुख्य मेहराब में अनोखा वृत्ताकार स्वरूप देखने को मिलता है, जो उस काल की स्थापत्य शैली को दर्शाता है। अपनी वर्तमान जर्जर स्थिति के बावजूद यह बावड़ी क्षेत्र के समृद्ध इतिहास और स्थापत्य विरासत का प्रमाण मानी जाती है।
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प्रदेश सरकार की गजट अधिसूचना के तहत बावड़ी को हरियाणा प्राचीन तथा ऐतिहासिक स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1964 के अंतर्गत संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। इसके साथ ही बावड़ी के आसपास का क्षेत्र भी संरक्षित क्षेत्र माना जाएगा, जहां बिना अनुमति किसी प्रकार का निर्माण या बदलाव प्रतिबंधित रहेगा।
ये है मान्यता
रमेश गोयल ने बताया कि माना जाता है कि इसका निर्माण लोदी शासकों के काल में राजा अनंग पाल के समय हुआ था। इन्होंने वर्ष 1451 से 1526 तक शासन किया। दिल्ली-मुल्तान व्यापार मार्ग पर स्थित यह बावड़ी उस समय यात्रियों और व्यापारियों के लिए जलस्रोत व विश्राम स्थल के रूप में कार्य करती थी। रमेश कुमार ने कहा कि हरियाणा व्यापार मंडल का प्रतिनिधिमंडल सरकार के मुख्य सचिव से मिलेगा और इस बावड़ी को ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल बनाने के बारे में सुझाव भी देगा