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Fatehabad News: कपास की खेती का रकबा 10 साल में 30 फीसदी तक घटा

Mon, 09 Jun 2025 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 09 Jun 2025 11:31 PM IST
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The area under cotton cultivation has decreased by 30% in the last 10 years
गांव मेहूवाला में लहलहाती नरमे की फसल। संवाद
फतेहाबाद। कपास की खेती के प्रति किसानों का रुझान घटता जा रहा है। पिछले चार साल से जिले में कपास के रकबे में कमी आई हो रही है। यही नहीं पिछले करीब 10 सालों में 30 फीसदी रकबा कम हुआ है।
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किसानों का कहना है कि कपास की फसल जब पक कर तैयार होती है तो उस समय रोगों का प्रकोप होता है। इस रोग पर काई भी कीटनाशक दवा का असर नहीं होता। इससे किसानों का फसल पर खर्च अधिक होता है और उत्पादन बहुत कम हो रहा है, जिससे किसानों के लिए कपास की खेती घाटे का सौदा बनता जा रहा है। वहीं कपास पर मौसम की मार का असर सभी फसलों से अधिक होता है।
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फतेहाबाद जिला कपास के उत्पादन में राज्य में अग्रणी जिले में शामिल था। जिले का भट्टू और फतेहाबाद खंड में रेतीली जमीन होने के कारण यहां बड़े स्तर पर कपास की खेती होती रही है। 10 वर्ष पहले तक जिले में करीब 3 लाख एकड़ में कपास की बिजाई की जाती थी। वहीं इस बार जिले में कपास की बिजाई मात्र 90 हजार 630 एकड़ में हुई है। किसान कपास की खेती के स्थान पर गन्ने व धान का विकल्प अपना रहे हैं।
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प्रति एकड़ हो रहा है 4 से 6 क्विंटल का उत्पादन

कपास की खेती पर प्रति एकड़ करीब 15 हजार रुपये का खर्च होता है। कपास की फसल पकने के बाद चुगाई पर भी प्रति क्विंटल 1200 से लेकर 1500 रुपये का खर्च होता है। जबकि प्रति क्विंटल का भाव 7000 हजार से लेकर 7100 रुपये के बीच रहता है। इससे किसानों को कई बार नुकसान भी सहना पड़ता है।

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जिले में पिछले चार वर्षो से कपास बनी है घाटे का सौदा

साल 2021 व 22 में बारिश की कमी के कारण सूखाग्रस्त होने से कपास का उत्पादन कमी हुई। साल 2022 व 23 में बारिश की अधिकता के कारण कपास की फसल नष्ट हो गई थी। इससे कपास का उत्पादन प्रति एकड़ मात्र दो से चार क्विंटल तक हुआ था। साल 2023 व 24 में कपास गुलाबी सुंडी और 2024 व 25 में बारिश के कारण कपास का उत्पादन कम रहा। ऐसे में चार साल से लगातार हो रहे नुकसान के कारण किसानों का कपास की खेती से मोहभंग हुआ है।


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जिले में पिछले चार सालों में कपास का रकबा

साल-2021 व 22- 1,50,000

साल-2022 व 23-1,09,414

साल- 2023 व 24-79,590

साल- 2024 व 25-90,630

:: अमेरिकन कॉटन (नरमा) की फसल में पिछले दो सालों से गुलाबी सुंडी का प्रकोप रहा है। इससे किसानों का कपास के प्रति विश्वास कम हो गया है। वहीं कपास की खेती पर मौसम की मार सबसे अधिक रहती है।

-डॉ. बहादुर गोदारा, सहायक कृषि विकास अधिकारी, कृषि एवं कल्याण विभाग भट्टू कलां।
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