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Fatehabad News: बनगांव के सुरेंद्र साइक्लिंग में देश को पिछले तीन वर्षों से दिला रहे पदक
Mon, 23 Sep 2024 05:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 23 Sep 2024 05:44 AM IST
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अपनी के टीम के खिलाड़ियाें के साथ साइक्लिंग प्रशिक्षक सुरेंद्र जाखड़।
फतेहाबाद। जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर स्थित गांव बनगांव के सुरेंद्र जाखड़ साइक्लिंग में रुचि रखते हुए गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं। वर्ष 2017 में पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान से एक वर्ष का डिप्लाेमा करने के बाद सुरेंद्र एशियन साइक्लिंग चैंपियनशिप में आंध्र प्रदेश में प्रशिक्षक के पद पर चयनित हुए।
इसके बाद साल 2021 तक कर्नाटक में प्रशिक्षक के पद पर तैनात रहे और अब पिछले तीन वर्षों से भारतीय साइक्लिंग टीम में प्रशिक्षक हैं। वह भारतीय साइक्लिंग टीम को लगातार तीन वर्षों से पदक दिला रहे हैं। गांव में छुट्टी आने के बाद सुरेंद्र गांव के आसपास के युवाओं और निजी अकादमियों में जाकर युवाओं को साइक्लिंग के लिए प्रेरित करते हैं। इस कारण जिले से कई युवा साइक्लिंग के खेल में रूचि ले रहे हैं। उनका कहना है कि भारतीय साइक्लिंग टीम में ज्यादातर खिलाड़ी ग्रामीण क्षेत्र से ही हैं। साइक्लिंग में कम समय में भी कई युवाओं ने कामयाबी हासिल की है। ऐसे में युवाओं को खेल के साथ लगाव रखना चाहिए। खेलों के माध्यम से बढ़ते नशे को भी रोका जा सकता है।
खुद के पास साइकिल भी नहीं थी, आज सैकड़ों युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण
सुरेंद्र ने बताया कि उनके पिता बनवारी लाल एक किसान हैं। उनके परिवार में एक भाई और एक बहन हैं। ऐसे में जब उन्होंने साइक्लिंग के लिए अभ्यास शुरू किया था तो उनके पास रेसलिंग साइकिल भी नहीं थी। उन्होंने कई वर्षों के बाद साइकिल खरीदी थी। अब अगले महीने चेन्नई में होने वाली राष्ट्रीय साइक्लिंग प्रतियोगिता में भारतीय साइक्लिंग टीम के प्रशिक्षक के तौर पर मौजूद रहेंगे। वहीं, दिसंबर महीने में ओडिसा में होने वाली साइक्लिंग प्रतियाेगिता में भी उनकी टीम भाग लेगी।
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इसके बाद साल 2021 तक कर्नाटक में प्रशिक्षक के पद पर तैनात रहे और अब पिछले तीन वर्षों से भारतीय साइक्लिंग टीम में प्रशिक्षक हैं। वह भारतीय साइक्लिंग टीम को लगातार तीन वर्षों से पदक दिला रहे हैं। गांव में छुट्टी आने के बाद सुरेंद्र गांव के आसपास के युवाओं और निजी अकादमियों में जाकर युवाओं को साइक्लिंग के लिए प्रेरित करते हैं। इस कारण जिले से कई युवा साइक्लिंग के खेल में रूचि ले रहे हैं। उनका कहना है कि भारतीय साइक्लिंग टीम में ज्यादातर खिलाड़ी ग्रामीण क्षेत्र से ही हैं। साइक्लिंग में कम समय में भी कई युवाओं ने कामयाबी हासिल की है। ऐसे में युवाओं को खेल के साथ लगाव रखना चाहिए। खेलों के माध्यम से बढ़ते नशे को भी रोका जा सकता है।
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खुद के पास साइकिल भी नहीं थी, आज सैकड़ों युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण
सुरेंद्र ने बताया कि उनके पिता बनवारी लाल एक किसान हैं। उनके परिवार में एक भाई और एक बहन हैं। ऐसे में जब उन्होंने साइक्लिंग के लिए अभ्यास शुरू किया था तो उनके पास रेसलिंग साइकिल भी नहीं थी। उन्होंने कई वर्षों के बाद साइकिल खरीदी थी। अब अगले महीने चेन्नई में होने वाली राष्ट्रीय साइक्लिंग प्रतियोगिता में भारतीय साइक्लिंग टीम के प्रशिक्षक के तौर पर मौजूद रहेंगे। वहीं, दिसंबर महीने में ओडिसा में होने वाली साइक्लिंग प्रतियाेगिता में भी उनकी टीम भाग लेगी।
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