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Fatehabad News: पराली बनी उद्योगों की ताकत, खेतों में आग की जगह अब कमाई के नए रास्ते
Sat, 17 Oct 2026 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 17 Oct 2026 11:04 PM IST
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फतेहाबाद क्षेत्र में उद्योग के प्रयोग के लिए बनाई गई पराली की गांठें। स्रोत कृषि विभाग
फतेहाबाद। कभी खेतों में जलाया जाने वाला धान का फसल अवशेष अब उद्योगों के लिए उपयोगी कच्चा माल बन रहा है। जिले में पराली की गांठें खरीदकर बिजली उत्पादन, बायो एनर्जी, पेलेट निर्माण और बॉयलर में ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं।
औद्योगिक इकाइयों में पराली की बढ़ती मांग और किसानों को जागरूक करने के प्रयासों से फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा मिला है। इसका असर यह है कि इस साल अब तक जिले में पराली जलाने की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई है।
कृषि विभाग के तकनीकी सहायक राजपाल ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से किसानों को जागरूक करने और अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध करवाने से पराली प्रबंधन को प्रोत्साहन मिला है। इसके साथ ही पराली का औद्योगिक उपयोग बढ़ने से किसानों के सामने फसल अवशेष के निपटान का एक विकल्प भी उपलब्ध हुआ है।
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पांच साल में 94 फीसदी से अधिक कमी
जिले में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े इस बदलाव को दर्शाते हैं। वर्ष 2021 में फसल अवशेष जलाने की 1479 घटनाएं दर्ज की गई थीं। वर्ष 2022 में यह संख्या घटकर 767 और वर्ष 2023 में 579 रह गई। वर्ष 2024 में 130 घटनाएं दर्ज हुईं जबकि वर्ष 2025 में इनकी संख्या घटकर 88 रह गई। इस तरह पांच वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में 94 फीसदी से अधिक की कमी आई है।
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पराली की गांठों से किसानों को मिल रहा मुनाफा
जिले में इस वर्ष धान का रकबा करीब 3.20 लाख एकड़ है। किसानों से पराली की गांठें 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी जा रही हैं। प्रति एकड़ में बासमती धान में 18 से 20 क्विंटल और परमल में 35 से 45 क्विंटल पराली की गांठें बनती हैं। बेलर संचालक किसानों के खेतों से निशुल्क पराली की गांठें बनाकर उद्योगपतियों को बेच देते हैं। इससे किसानों को फसल अवशेष के निपटान का विकल्प मिलने के साथ उद्योगों को भी कच्चा माल उपलब्ध हो रहा है।
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700 बेलर संचालक खरीद रहे पराली की गांठें
वर्ष 2024-25 के दौरान जिले में 25,750 किसानों ने 2,28,589 एकड़ क्षेत्र में पराली प्रबंधन किया था। जिले में 700 के करीब बेलर संचालक पराली की गांठों की खरीद कर रहे हैं। जिनकी सहायता से किसान फसल अवशेषों को खेत में ही प्रबंधन करने या अन्य उपयोग के लिए एकत्र करने में सक्षम हो रहे हैं। सरकार की ओर से प्रति एकड़ 1200 रुपये का प्रोत्साहन भी किसानों को पराली प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
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:: पराली की गांठों का इस्तेमाल जिले के 20 उद्योगों में हो रहा है। जिसमें हर वर्ष करीब 73 लाख क्विंटल पराली की गांठों का प्रयोग किया जाता है। बायोमास, पराली को प्रोसेस करके कंप्रेस्ड बायो गैस, छोटी गांठें या पेलेट्स बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।
- डॉ. पवन बिश्नोई, सहायक कृषि अभियंता, फतेहाबाद।
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औद्योगिक इकाइयों में पराली की बढ़ती मांग और किसानों को जागरूक करने के प्रयासों से फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा मिला है। इसका असर यह है कि इस साल अब तक जिले में पराली जलाने की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई है।
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कृषि विभाग के तकनीकी सहायक राजपाल ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से किसानों को जागरूक करने और अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध करवाने से पराली प्रबंधन को प्रोत्साहन मिला है। इसके साथ ही पराली का औद्योगिक उपयोग बढ़ने से किसानों के सामने फसल अवशेष के निपटान का एक विकल्प भी उपलब्ध हुआ है।
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पांच साल में 94 फीसदी से अधिक कमी
जिले में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े इस बदलाव को दर्शाते हैं। वर्ष 2021 में फसल अवशेष जलाने की 1479 घटनाएं दर्ज की गई थीं। वर्ष 2022 में यह संख्या घटकर 767 और वर्ष 2023 में 579 रह गई। वर्ष 2024 में 130 घटनाएं दर्ज हुईं जबकि वर्ष 2025 में इनकी संख्या घटकर 88 रह गई। इस तरह पांच वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में 94 फीसदी से अधिक की कमी आई है।
पराली की गांठों से किसानों को मिल रहा मुनाफा
जिले में इस वर्ष धान का रकबा करीब 3.20 लाख एकड़ है। किसानों से पराली की गांठें 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी जा रही हैं। प्रति एकड़ में बासमती धान में 18 से 20 क्विंटल और परमल में 35 से 45 क्विंटल पराली की गांठें बनती हैं। बेलर संचालक किसानों के खेतों से निशुल्क पराली की गांठें बनाकर उद्योगपतियों को बेच देते हैं। इससे किसानों को फसल अवशेष के निपटान का विकल्प मिलने के साथ उद्योगों को भी कच्चा माल उपलब्ध हो रहा है।
700 बेलर संचालक खरीद रहे पराली की गांठें
वर्ष 2024-25 के दौरान जिले में 25,750 किसानों ने 2,28,589 एकड़ क्षेत्र में पराली प्रबंधन किया था। जिले में 700 के करीब बेलर संचालक पराली की गांठों की खरीद कर रहे हैं। जिनकी सहायता से किसान फसल अवशेषों को खेत में ही प्रबंधन करने या अन्य उपयोग के लिए एकत्र करने में सक्षम हो रहे हैं। सरकार की ओर से प्रति एकड़ 1200 रुपये का प्रोत्साहन भी किसानों को पराली प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
:: पराली की गांठों का इस्तेमाल जिले के 20 उद्योगों में हो रहा है। जिसमें हर वर्ष करीब 73 लाख क्विंटल पराली की गांठों का प्रयोग किया जाता है। बायोमास, पराली को प्रोसेस करके कंप्रेस्ड बायो गैस, छोटी गांठें या पेलेट्स बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।
- डॉ. पवन बिश्नोई, सहायक कृषि अभियंता, फतेहाबाद।