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ठहरा रहे होटल में, बिल थमा रहे भोजनालय का

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2022 11:30 PM IST
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Staying in the hotel, paying the bills of the restaurant
फतेहाबाद। शहर में जीएसटी बचाने के लिए बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। प्रशासन की नाक के नीचे शहर के अधिकांश होटल संचालक हर रोज सरकार को राजस्व का चूना लगा रहे हैं। होटल संचालक किसी भी ग्राहक को ठहरा तो होटल में ही रहे हैं, लेकिन बिल मांगने पर भोजनालय का बिल थमा देते हैं। जिन अधिकारियों की इस फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी है, वे कभी गहराई तक जाकर जांच करने की जहमत तक नहीं उठाते हैं। इस कारण हर महीने लाखों रुपये का राजस्व चोरी हो रहा है।
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दरअसल, किसी भी होटल में ठहरने पर एक हजार रुपये से अधिक के बिल पर 12 व 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। होटल संचालकों को भी यह जीएसटी भरने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती है। ऐसे में ग्राहक को भी 999 रुपये से कम का बिल थमा दिया जाता है। जो ग्राहक अनिवार्य रूप से एक हजार से भी ज्यादा का बिल मांगे तो उसे होटल की बजाय भोजनालय का बिल देकर इतिश्री कर दी जाती है।
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कई रसूखदारों के होटल, नहीं होती जांच
शहर में कई रसूखदारों के होटल हैं, जिनकी राजनीतिक पहुंच भी हैं। इस राजनीतिक पहुंच के कारण उनके होटलों में चल रहे फर्जीवाड़ों की जांच तक नहीं होती है। कई होटल संचालक तो ऐसे हैं, जिन्होंने भोजनालय चलाने वालों के साथ पार्टनरशिप की हुई है ताकि होटल में ठहरने वालों को बिल देना पड़े तो इसी भोजनालय से दिलवा दिया जाए।
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ऑनलाइन बुकिंग पर निर्धारित किराया ही देना पड़ता है
हालांकि, यह सारा फर्जीवाड़ा सिर्फ ऑफलाइन बुकिंग में ही होता है। अलग-अलग एप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग करवाने पर तो निर्धारित किराया ही देना पड़ता है। इसी कारण होटल संचालक को ऑनलाइन हुई बुकिंग पर जीएसटी भरना पड़ता है।
केस नंबर एक
रोहतक से आए एक निजी कंपनी के अधिकारी ने बताया कि वह जाट धर्मशाला के पास स्थित एक होटल में दो दिन ठहरे थे। एक दिन का किराया 1200 रुपये लिया गया। जब वह चेक आउट करके बिल मांगने लगे तो जीएसटी का हवाला दिया गया। उन्होंने पूरा बिल देने के लिए ही जोर दिया तो करीब एक घंटे बाद किसी भोजनालय का बिल पकड़ा दिया।

केस नंबर दो
सिरसा से सर्वे कार्य के लिए एक कर्मचारी ने बताया कि वह सिरसा रोड स्थित होटल में ठहरे थे। जब होटल के मैनेजर से बिल मांगा गया तो 18 प्रतिशत जीएसटी ज्यादा लगने की बात कहकर बिल 999 रुपये से कम का बनाकर दे दिया गया। इस विषय में काफी देर तक उनकी होटल मैनेजर के साथ बहस भी हुई।
अभी मैं आउट ऑफ स्टेशन हूं। इस विषय में फतेहाबाद आने के बाद बात करती हूं।
अंजू सिंह, डीईटीसी (सेल्स), फतेहाबाद
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