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भूमि की जानकारी देने के लिए बन रहे सॉइल हेल्थ कार्ड
fatehabad
Updated Sat, 07 Jun 2014 11:32 PM IST
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विभिन्न गांवों में सॉइल हेल्थ कार्ड के लिए मिट्टी के नमूने एकत्रित किए जा रहे हैं, जिनकी फतेहाबाद और कुलां में स्थापित विभागीय लैब में जांच की जा रही है और इन सॉइल हेल्थ कार्डाें में भूमि के कल्चर के बारे में बताया जाएगा। सॉइल हेल्थ कार्ड में यह भी दर्शाया जाएगा कि मिट्टी में किन तत्वों की कमी है और इन्हें कैसे दूर किया जा सकता है।
इसके साथ-साथ सॉइल हेल्थ कार्ड पर यह भी दर्शाया जाएगा कि किस प्रकार की फसल के योग्य भूमि है ताकि किसान वही विशेष फसल उगाकर अपना उत्पादन बढ़ा सके। अभी तक के बने सॉइल हेल्थ कार्डों में यह पाया गया है कि रतिया और जाखल के खेतों में भूमि में नाइट्रोजन की कमी देखी गई है। इसके साथ-साथ जिंक सल्फर की भी कई क्षेत्रों में कमी पाई गई है।
इसके लिए कृषि विभाग द्वारा सब्सिडी पर जिप्सम उपलब्ध करवाने की योजना चलाई जा रही है जिसमें किसानों को कृषि विभाग द्वारा जिप्सम पर 50-70 प्रतिशत की सब्सिडी पर जिप्सम उपलब्ध करवाया जाएगा। कृषि उप निदेशक अनूप सिंह ने किसानों से अपील कि वे फसल प्रबंधन के लिए समय समय पर कृषि अधिकारियों व कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लें और किसी भी प्रकार की बीमारी आदि पाए जाने पर तुरंत विभागीय अधिकारियों से संपर्क करें।
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उन्होंने किसानों से यह भी कहा कि वे फसलों में जरूरत अनुसार ही उर्वरकों व कीटनाशकों का प्रयोग करें। उर्वरकों व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग करने से भूमि की उर्वरकता शक्ति कम होती है। इसके साथ-साथ उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों व वैज्ञानिकों से कहा कि वे फसलों की नवीनतम तकनीकों के बारे में किसानों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दें और निरंतर किसानों से जुडे़ रहे। समय-समय पर फसलों में होने वाली बीमारियों के बारे में किसानों को सचेत करें। निश्चित रूप से फसल उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
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इसके साथ-साथ सॉइल हेल्थ कार्ड पर यह भी दर्शाया जाएगा कि किस प्रकार की फसल के योग्य भूमि है ताकि किसान वही विशेष फसल उगाकर अपना उत्पादन बढ़ा सके। अभी तक के बने सॉइल हेल्थ कार्डों में यह पाया गया है कि रतिया और जाखल के खेतों में भूमि में नाइट्रोजन की कमी देखी गई है। इसके साथ-साथ जिंक सल्फर की भी कई क्षेत्रों में कमी पाई गई है।
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इसके लिए कृषि विभाग द्वारा सब्सिडी पर जिप्सम उपलब्ध करवाने की योजना चलाई जा रही है जिसमें किसानों को कृषि विभाग द्वारा जिप्सम पर 50-70 प्रतिशत की सब्सिडी पर जिप्सम उपलब्ध करवाया जाएगा। कृषि उप निदेशक अनूप सिंह ने किसानों से अपील कि वे फसल प्रबंधन के लिए समय समय पर कृषि अधिकारियों व कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लें और किसी भी प्रकार की बीमारी आदि पाए जाने पर तुरंत विभागीय अधिकारियों से संपर्क करें।
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उन्होंने किसानों से यह भी कहा कि वे फसलों में जरूरत अनुसार ही उर्वरकों व कीटनाशकों का प्रयोग करें। उर्वरकों व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग करने से भूमि की उर्वरकता शक्ति कम होती है। इसके साथ-साथ उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों व वैज्ञानिकों से कहा कि वे फसलों की नवीनतम तकनीकों के बारे में किसानों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दें और निरंतर किसानों से जुडे़ रहे। समय-समय पर फसलों में होने वाली बीमारियों के बारे में किसानों को सचेत करें। निश्चित रूप से फसल उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।