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Fatehabad News: टोहाना की शिव नंदीशाला बनी समाज और गोसेवा में प्रेरणा का प्रतीक

Sun, 08 Mar 2026 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sun, 08 Mar 2026 11:18 PM IST
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Shiv Nandishala of Tohana became a symbol of inspiration in society and cow service
​शिव नंदीशाला में गाय। - फोटो : संवाद
टोहाना। शहर और आसपास के गांवों में बेसहारा बैलों और सांडों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं और समस्याएं सामने आ रही थीं। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए दस साल पहले हिसार तिराहा रोड पर शिव नंदीशाला की स्थापना की गई। आज यह प्रदेश की आत्मनिर्भर नंदीशाला बन चुकी है, जो गो सेवा के साथ-साथ गो उत्पाद, मानव सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रेरणा स्रोत बन गई है।
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शिव नंदीशाला के संयोजक धर्मपाल सैनी ने बताया कि वर्ष 2015 में शहर और आसपास के इलाकों में बेसहारा गोवंश की भरमार थी। दुर्घटनाओं और फसल नुकसान को देखते हुए उन्होंने बंसीलाल, दिलीप चंद, कर्मवीर सैनी, संजय कुमार और धर्मवीर के साथ मिलकर गोशाला की स्थापना की। भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष एवं टोहाना विधायक सुभाष बराला और एसडीएम डॉ. जेके आभीर ने भी इस मुहिम में सहयोग दिया।
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शुरूआत में शहर के 759 गोवंशों को नंदीशाला में लाया गया। गोशाला में इस समय लगभग 1600 गोवंश है और इनकी देखभाल के लिए लगभग 53 लोग कर्मचारी कार्य करते हैं। इसके अलावा गोशाला के पास पांच ट्रैक्टर मशीन व अन्य उपकरण हैं जिसका एक दिन का खर्च करीब 70 हजार रुपये आता है।
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इस खर्च को निकालने के लिए गोशाला जहां गो उत्पाद बनाती है उसके साथ-साथ लोगों को नंदीशाला से जोड़ने का प्रयास करती है ताकि दान आ सके। नगर परिषद की ओर से भी 70,000 रुपये महीना दिया जाता है। गोशाला में रामकुमार सैनी, सरदरा राम, महेंद्र सैनी, प्रेम कुमार, महावीर सिंह, बलजीत सैनी, ऋषिपाल, राजेश जैन, कृष्ण कुमार व छितर सैनी अपनी नियमित सेवाएं दे रहे हैं। संवाद

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दान के लिए चलाई विशेष मुहिम

संयोजक धर्मपाल ने बताया कि नंदीशाला को चलाने के लिए पैसों की आवश्यकता थी। हर दिन हरा चारा, लेबर, दवाइयां, शैड, पानी, खुरली व मशीन सब जरूरी था। इसके लिए एक आदमी एक चादर, एक आदमी एक-ईंट, एक आदमी एक रोटी व पुराने समान से लेकर सीमेंट, बजरी व लोहे की टीन दान देने की अपील की। क्षेत्र के लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर सहयोग किया। फिलहाल गोशाला से क्षेत्र के 35 गांव भी जुड़े हुए हैं। गांव वासियों के सहयोग से हर गांव में 10-10 सदस्यों की टीम बनाई जो गोवंश के भरण पोषण के लिए साल में हराचारा, तूड़ी, भूसा व दलिया के लिए गेहूं इकट्ठा करती है।

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आत्मनिर्भर बन रही नंदीशाला

गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के दुधारू गायों से मिलने वाले दूध से घी, मक्खन और अपशिष्ट पदार्थ जैसे गोबर-गोमूत्र से गोमूत्र अर्क, हवन करने के समिधा, हवन टिक्की, धूप, अगरबत्ती, दीये, कीटनाशक, फिनायल व खाद आदि तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा गोशाला में लाइब्रेरी व बुक बैंक भी है। यहां पर लगभग 300 बच्चे रोजाना फ्री पढ़ने के लिए आते हैं। इनमें 27 बच्चे यहां से पढ़कर सरकारी नौकरी पर हैं। नंदीशाला में ही महात्मा ज्योतिबा फुले बुक बैंक है जहां पर लोग अपने बच्चों की पुरानी किताबों को जमा करवाते हैं। जरूरतमंद बच्चों को वे किताबें फ्री दी जाती हैं।


- आठ एकड़ में बनी



गोशाला लगभग 8 एकड़ में बनी हुई है। इसमें -बड़े बाड़ों का निर्माण किया गया है। यहां 1600 गोवंश के लिए अलग अलग बाड़े बनाए गए हैं। इसमें गायों के बच्चों के लिए राधिका आवास, दुधारू गाय को कामधेनु आवास, बूढ़ी गायों को यशोदा आवास, सुंदर गायों को नंदिनी आवास व गर्भवती गाय को देवकी आवास का नाम देकर उनमें रखा जाता है। गोशाला में आधुनिक अस्पताल का निर्माण किया जाएगा जिसमें ऑपरेशन थिएटर से लेकर एक्स-रे व अन्य मशीनें भी होंगी।

शिव नंदीशाला में गाय।

शिव नंदीशाला में गाय।- फोटो : संवाद

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