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Fatehabad News: ढाई शताब्दी पुरानी खेजड़ी में बसती है मेहूवाला की विरासत, पुराने वृक्ष को वायु प्राण देवता में शामिल करने की मांग
Wed, 23 Sep 2026 10:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 23 Sep 2026 10:16 PM IST
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गांव मेहूवाला 250 वर्ष पुराने वृक्ष की सुरक्षा की मांग करते ग्रामीण। संवाद
फतेहाबाद। गांव मेहूवाला के ग्रामीणों ने करीब 250 वर्ष पुराने खेजड़ी के ऐतिहासिक वृक्ष को वायु प्राण देवता की श्रेणी में शामिल कर संरक्षित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह वृक्ष केवल प्राकृतिक संपदा है और गांव के इतिहास और पुरानी परंपराओं से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है।
ग्रामीण रमन, शंकरलाल, सुरजीत और रामस्वरूप ने बताया कि समय के साथ गांव का स्वरूप और आबादी का स्थान बदल गया। पुरानी बसावट की कई निशानियां भी खत्म हो गईं। लेकिन यह खेजड़ी का वृक्ष आज भी उस दौर की याद संजोए हुए है। करीब ढाई शताब्दी पुराना होने के कारण इसका ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व भी काफी अधिक है।
संरक्षण से सुरक्षित रहेगी विरासत : ग्रामीणों ने मांग की कि वन विभाग वृक्ष की स्थिति का निरीक्षण कर इसकी सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी तय करे। साथ ही इसे वायु प्राण देवता योजना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इससे भविष्य में भी वृक्ष सुरक्षित रह सकेगा और नई पीढ़ी गांव की इस प्राकृतिक धरोहर को देख सकेगी।
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ग्रामीणों ने बताया कि पंचायती भूमि पर स्थित वृक्ष के लिए संबंधित ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष 3000 रुपये मिलने का प्रावधान है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था का लाभ ऐसे प्राचीन वृक्षों के संरक्षण में लिया जाना चाहिए।
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ग्रामीण रमन, शंकरलाल, सुरजीत और रामस्वरूप ने बताया कि समय के साथ गांव का स्वरूप और आबादी का स्थान बदल गया। पुरानी बसावट की कई निशानियां भी खत्म हो गईं। लेकिन यह खेजड़ी का वृक्ष आज भी उस दौर की याद संजोए हुए है। करीब ढाई शताब्दी पुराना होने के कारण इसका ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व भी काफी अधिक है।
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संरक्षण से सुरक्षित रहेगी विरासत : ग्रामीणों ने मांग की कि वन विभाग वृक्ष की स्थिति का निरीक्षण कर इसकी सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी तय करे। साथ ही इसे वायु प्राण देवता योजना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इससे भविष्य में भी वृक्ष सुरक्षित रह सकेगा और नई पीढ़ी गांव की इस प्राकृतिक धरोहर को देख सकेगी।
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ग्रामीणों ने बताया कि पंचायती भूमि पर स्थित वृक्ष के लिए संबंधित ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष 3000 रुपये मिलने का प्रावधान है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था का लाभ ऐसे प्राचीन वृक्षों के संरक्षण में लिया जाना चाहिए।