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अस्पतालों में चीख-पुकार, बैठकों में शाबाशी, सड़कों पर उतर रहे तीमारदार

Thu, 29 Apr 2021 11:25 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 29 Apr 2021 11:25 PM IST
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Screaming in hospitals, thumbs up in meetings, timbers on the streets
शहर के अस्पतालों में चीख-पुकार मची है। ऑक्सीजन की कमी के चलते तीमारदार सड़कों पर उतर रहे हैं। डॉक्टरों को आधी रात में कभी एडीसी के घर तो कभी एसडीएम कार्यालय में जाकर ऑक्सीजन मांगनी पड़ रही है। ऐसी स्थितियों के बीच भी जिन जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच रहकर जिम्मेदारी संभालनी चाहिए, वो बैठकों में अधिकारियों को शाबाशियां देने में जुटे हुए हैं। अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी न केवल व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगा रही है, वहीं जनता की पीड़ा को और बढ़ा रही है। डीसी डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ प्रशिक्षण लेने के लिए 15 दिन से शहर से बाहर हैं। ऐसे में पीछे से पूरा प्रशासन बेलगाम हो चुका है। ऐसी स्थितियों में सबसे अधिक संकट कोरोना संक्रमित व उनके तीमारदार झेल रहे हैं।
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सांसद ने खुद माना सामंजस्य की कमी, दोबारा लेनी पड़ी बैठक
लोकसभा सांसद सुनीता दुग्गल ने भी माना है कि फतेहाबाद में अधिकारियों में सामंजस्य की कमी है। इसलिए उन्हें दोबारा बैठक लेनी पड़ी है। इससे पहले उन्होंने बुधवार को भी बैठक ली, लेकिन उसमें सभी अधिकारियों नहीं पहुंचे। इसलिए वीरवार को फिर से बैठक बुलाई गई, जिसमें विधायकों से लेकर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए।
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रात 12 बजे आईएमए को एसडीएम के साथ करनी पड़ी बैठक
शहर के सबसे बड़े निजी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के बाद अस्पताल प्रबंधक को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की मदद लेनी पड़ी। रात 11 बजे आईएमए का प्रतिनिधिमंडल एडीसी डॉ. मुनीष नागपाल के आवास पर पहुंचा। मगर बताया गया कि एडीसी हिसार गए हुए हैं। फोन पर बातचीत करने पर एडीसी ने एसडीएम से मिलने को कहा। इसके बाद आईएमए सदस्य लघु सचिवालय पहुंचे। जहां रात 12 बजे एसडीएम आए, फिर उनके साथ बैठक हुई। तब जाकर निजी अस्पताल को 20 ऑक्सीजन सिलिंडर और मिल पाए।
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अप्रैल महीने में ही 64 लोगों की चली गई जान
हालात ऐसे हैं कि अप्रैल महीने के 28 दिनों में ही 64 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से एक तो मात्र 20 साल के युवक की जान चली गई। इतनी भयावह स्थिति होने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी ऑक्सीजन वितरण की स्थिति को नहीं सुधार पाए हैं।

20 अप्रैल के बाद हर रोज मर रहे तीन या इससे अधिक संक्रमित
तिथि मौत
21 अप्रैल 3
22 अप्रैल 5
23 अप्रैल 3
24 अप्रैल 3
25 अप्रैल 8
26 अप्रैल 3
27 अप्रैल 8
28 अप्रैल 5
ये हैं प्रशासन के बड़े फेलियर
1. ऑक्सीजन वितरण व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे।
2. एडीसी से लेकर सीएमओ तक से संपर्क करना हो रहा मुश्किल।
3. डीसीओ फोन तक नहीं उठाते।
4. हर रोज मीडिया में जारी होने वाला हेल्थ बुलेटिन भी देरी से हो रहा जारी।
5. कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए नहीं कोई ठोस योजना।
6. हर रोज टूट रही धारा 144।
7. मास्क पहनने और सामाजिक दूरी रखने के लिए नहीं कोई सख्ती।
कोट
अधिकारियों में सामंजस्य की कमी तो है। इसके लिए ही बैठक लेनी पड़ी है। बैठक में पूरी गंभीरता से अधिकारियों को कोरोना संकट से निपटने के निर्देश दिए गए हैं। हर चीज का डाटा बेस मांगा गया है। जरूरत पड़ी तो दोबारा से बैठक लूंगी।
- सुनीता दुग्गल, सांसद, लोकसभा।
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