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पुराने कुएं को बनाया रिचार्ज बोर, 14 साल से नहीं गिरा भू-जल स्तर

Sun, 13 Jun 2021 11:16 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 13 Jun 2021 11:16 PM IST
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RAIN WATER HARWESTING IN FATHEABAD
आज किसानों के सामने जल संकट सबसे बड़ी चुनौती है। भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है और नहरी पानी की सप्लाई में कटौती की जा रही है। मगर किसान चाहें तो इस संकट को दूर किया जा सकता है। गांव बीसला के किसान धर्मबीर काजला ऐसा ही कर रहे हैं। उन्होंने खेत में बने पुराने कुएं को रिचार्ज बोर में तब्दील कर दिया। अब जैसे ही खेतों में बरसाती पानी भरता है, वे सारा पानी कुएं में उतार देेते हैं। इससे दो फायदा हो रहे हैं। एक तो खेतों में बरसाती पानी भरने से फसल बर्बाद नहीं होती। दूसरा फायदा ये हुआ कि उनके खेत के आसपास भू जल स्तर नहीं गिरा। जितने पानी का वह हर साल दोहन करते हैं, लगभग उतना ही पानी वापस जमीन में उतार देते हैं। इतना ही नहीं, उनके खेत में बने रिचार्ज बोर से आसपास के किसानों को भी फायदा नजर आता है।
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धर्मबीर काजला बताते हैं कि उनके क्षेत्र में मिट्टी चिकनी है। यदि किसी समय ज्यादा बारिश आ जाए तो जमीन आसानी से पानी को सोखती नहीं है। ऐसे में फसल खराब होने की चिंता रहती है। उस स्थिति में रिचार्ज बोर वरदान साबित हो रहा है। मार्च 2020 में खूब बारिश हुई थी। तब गेहूं की फसलों को नुकसान हो रहा था। उस समय भी सारा पानी इसी कुएं में उतारा गया। तब आसपास के किसानों की करीब 40 एकड़ गेहूं को खराब होने से बचा लिया गया था।
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14 साल पहले शुरू किया था बोर
धर्मबीर काजला बताते हैं कि क्षेत्र में पहले कुएं होते थे। बाद में सबसर्मीबल ट्यूबवेल लगा दिए। ज्यादातर लोगों ने कुएं मिट्टी भरकर बंद कर दिए। उनके खेत में भी इसी तरह कुआं बना हुआ था। उन्होंने उसे मिट्टी से भरने की बजाय जल संरक्षण का माध्यम बनाया। पिछले 14 साल से हर साल बरसाती पानी इस कुएं में डाला जाता है, जो नीचे चला जाता है। इससे उनका भू-जल स्तर नीचे नहीं गया, बल्कि उसी जगह बरकरार है।
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प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल जरूरी: धर्मबीर
किसान धर्मबीर कहते हैं कि हमें प्रकृति ने जो भी संसाधन दिए हैं, उनका सदुपयोग करना चाहिए। धान की फसल प्राकृतिक रूप से बरसात पर आधारित है। इसलिए बरसाती पानी का सदुपयोग करना चाहिए। वरना पीने के पानी को भी तरसना पड़ेगा। इस क्षेत्र में पानी का संकट बढ़ रहा है, जबकि हमारे पास पानी की कोई कमी नहीं है। बस पानी संरक्षित करने की आवश्यकता है।
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