{"_id":"5f99acb68ebc3eb8670bef06","slug":"polution-fatehabad-news-fatehabad-news-rtk580493914","type":"story","status":"publish","title_hn":"फतेहाबाद में खतरनाक स्तर पर पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फतेहाबाद में खतरनाक स्तर पर पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक
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पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं से फतेहाबाद शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बुधवार की सुबह ही 400 के पार हो गया। मंगलवार को देर रात 32 किसानों ने खेतों में पराली जलाई। जिस कारण बुधवार 9:00 बजे एक्यूआई 402 तक पहुंच गया। इसका असर बुधवार भी साफ तौर पर शहर के आसमान में देखने को मिला। दूसरी ओर किसानों की मुश्किलें भी कम होने का नाम नहीं ले रही। बुधवार को भी जिले में पराली जलाने के मसले में कई किसानों पर मुकदमा दर्ज करने की सूचना है।
कृषि विभाग को बुधवार को हरसैक द्वारा सेटेलाइट से ली गई 32 किसानों की पराली जलाने की लोकेशन मिली है। जिसके साथ ही हरसैक द्वारा भेजी गई लोकेशन कुल 417 तक पहुंच गई। जिनमें कृषि विभाग के निरीक्षण के दौरान 197 लोकेशन झूठी पाई गई। जहां पर आग लगी ही नहीं थी। बुधवार को 13 और किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाई गई। अब कुल 129 किसानों पर केस दर्ज हो चुका है।
मंगलवार रात 11:00 बजे से जिले का एक्यूआई स्तर 185 से 250 के बीच रहा। इस दौरान 32 किसानों ने अपने खेतों में पराली जलाई। जिसके बाद एक्यूआई का स्तर लगातार बढ़ता चला गया। बुधवार सुबह 9.30 बजे एक्यूआई का स्तर 402, 10:30 बजे 350, शाम 3:30 बजे 185 व इसके अलावा 250 से 260 के बीच में बना रहा।
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जिला प्रशासन का मानना है कि मंगलवार रात जरूर आसपास कई खेतों में पराली जलायी गई है। जिसके कारण एकाएक प्रदूषण स्तर में इतनी बढ़ोतरी हुई है क्योंकि इन दिनों किसी प्रकार की कोई आतिशबाजी भी नहीं हो रही है। ऐसे में पराली जलाने के अलावा कोई और कारण प्रदूषण बढ़ोतरी का नजर ही नहीं आता।
सदर पुलिस को दी शिकायत में कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से खेतों में फसल के अवशेष जलाने पर रोक लगाई गई है लेकिन टोहाना के गांव समैण, जमालपुर, कन्हड़ी, म्योंद कलां, भीमेवाला, भूना के सांचला, ढ़ाणी डूल्ट, टिब्बी, रतिया के दिवाना, अलीका, लाली इत्यादि गांवों में किसानों ने फसल के अवशेष को आग लगाई है।
बुधवार को हरसैक से आग जलाने की 32 और लोकेशन मिली है। जिसके लिए कमेटियां गांव जाकर जांच कर रही है। बुधवार को 5 और किसानों पर एफआई दर्ज करवाई गई। जिसके चलते अब 16 किसानों पर मामला दर्ज हो चुका है। किसानों को पराली ना जलाने के लिए जागरुक किया जा रहा है।
- डॉ. राजेश सिहाग, डीडीए फतेहाबाद।
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कृषि विभाग को बुधवार को हरसैक द्वारा सेटेलाइट से ली गई 32 किसानों की पराली जलाने की लोकेशन मिली है। जिसके साथ ही हरसैक द्वारा भेजी गई लोकेशन कुल 417 तक पहुंच गई। जिनमें कृषि विभाग के निरीक्षण के दौरान 197 लोकेशन झूठी पाई गई। जहां पर आग लगी ही नहीं थी। बुधवार को 13 और किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाई गई। अब कुल 129 किसानों पर केस दर्ज हो चुका है।
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मंगलवार रात 11:00 बजे से जिले का एक्यूआई स्तर 185 से 250 के बीच रहा। इस दौरान 32 किसानों ने अपने खेतों में पराली जलाई। जिसके बाद एक्यूआई का स्तर लगातार बढ़ता चला गया। बुधवार सुबह 9.30 बजे एक्यूआई का स्तर 402, 10:30 बजे 350, शाम 3:30 बजे 185 व इसके अलावा 250 से 260 के बीच में बना रहा।
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जिला प्रशासन का मानना है कि मंगलवार रात जरूर आसपास कई खेतों में पराली जलायी गई है। जिसके कारण एकाएक प्रदूषण स्तर में इतनी बढ़ोतरी हुई है क्योंकि इन दिनों किसी प्रकार की कोई आतिशबाजी भी नहीं हो रही है। ऐसे में पराली जलाने के अलावा कोई और कारण प्रदूषण बढ़ोतरी का नजर ही नहीं आता।
सदर पुलिस को दी शिकायत में कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से खेतों में फसल के अवशेष जलाने पर रोक लगाई गई है लेकिन टोहाना के गांव समैण, जमालपुर, कन्हड़ी, म्योंद कलां, भीमेवाला, भूना के सांचला, ढ़ाणी डूल्ट, टिब्बी, रतिया के दिवाना, अलीका, लाली इत्यादि गांवों में किसानों ने फसल के अवशेष को आग लगाई है।
बुधवार को हरसैक से आग जलाने की 32 और लोकेशन मिली है। जिसके लिए कमेटियां गांव जाकर जांच कर रही है। बुधवार को 5 और किसानों पर एफआई दर्ज करवाई गई। जिसके चलते अब 16 किसानों पर मामला दर्ज हो चुका है। किसानों को पराली ना जलाने के लिए जागरुक किया जा रहा है।
- डॉ. राजेश सिहाग, डीडीए फतेहाबाद।