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फतेहाबाद: 1956 में हिमाचल से विस्थापित लोगों ने बसाया था गांव नन्हेड़ी, इस बार अनुसूचित जाति का बनेगा सरपंच
Tue, 08 Nov 2022 03:29 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संजीव ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुलां, फतेहाबाद (हरियाणा)
संजीव ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुलां, फतेहाबाद (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 08 Nov 2022 03:29 AM IST
सार
फतेहाबाद में वर्ष 1956 में हिमाचल से विस्थापित होकर आए लोगों ने गांव नन्हेड़ी बसाया था। 1960 में बनी पंचायत में 62 साल में पहली बार अनुसूचित जाति का सरपंच बनेगा।
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गांव नन्हेड़ी में सुबह-सुबह चुनावी चर्चा करते ग्रामीण।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
फतेहाबाद जिले का गांव नन्हेड़ी बसा तो हरियाणा में है, लेकिन यहां धाक हिमाचलवासियों की है। गांव में पहाड़ की संस्कृति भी देखने को मिलती है। दरअसल, वर्ष 1956 में देश की पहली पंचवर्षीय योजना में भाखड़ा बांध के निर्माण के दौरान अस्तित्व में आई गोविंद सागर झील में हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर व उसके आसपास के गांव समा गए थे।
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इन गांवों के विस्थापित लोगों को केंद्र सरकार ने हरियाणा के हिसार, सिरसा व फतेहाबाद जिले में जमीन दी थी। उन्हीं परिवारों में से 130 परिवारों ने 1956 में फतेहाबाद जिले में आकर गांव नन्हेड़ी में बस गए थे। गांव की पंचायत 1960 में बनी। इन 62 सालों में पहली बार अनुसूचित जाति से सरपंच बनेगा। अब तक सामान्य वर्ग के लोगों ने ही चौधर संभाली है।
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अभी तक सरपंच पद के लिए कोई नामांकन नहीं
गांव में नौ वार्ड बने हुए हैं। गांव की आबादी करीब तीन हजार है, जबकि मतदाता 1750 है। नामांकन प्रक्रिया शुरू हुए दो दिन होने के बावजूद गांव नन्हेड़ी में अभी तक सरपंच पद के लिए किसी ने भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है। यूं तो कई उम्मीदवार सरपंच पद के दावेदारों के तौर पर सामने आ रहे हैं, लेकिन सही तस्वीर नामांकन के अंतिम दिन ही साफ हो पाएगी।
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गांव में अभी भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव
गांव नन्हेड़ी की पंचायत के गठन के 62 साल बाद भी ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है। गांव में मुख्य समस्या दूषित पानी निकासी की है। बारिश के दिनों में और ज्यादा स्थिति खराब हो जाती है। पानी निकासी के बेहतर प्रबंध नहीं है। इस बार के चुनाव में यह समस्या प्रमुख मुद्दा रहेगी।
हमारा गांव नन्हेड़ी हिमाचल से विस्थापित लोगों का बसाया हुआ है। गांव में हरियाणा व हिमाचल दोनों प्रदेशों की संस्कृति देखने को मिलती है। -काला सिंह, ग्रामीण
हमारे गांव में पहली बार अनुसूचित जाति से सरपंच बनेगा। अभी तक कोई नामांकन दाखिल नहीं हुआ है। धीरे-धीरे पंचायत चुनाव का पारा बढ़ रहा है। - सुखदेव सिंह, ग्रामीण
गांव में अभी भी मूलभूत सुविधाओं कमी है। दूषित पानी की निकासी न होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी हुई है। उम्मीद है कि नई पंचायत इस समस्या का समाधान करवाने का काम करेगी। -केवल सिंह, ग्रामीण