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नशे के गढ़ में साढ़े चार साल बाद भी शुरू नहीं हुआ ओएसटी सेंटर
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फतेहाबाद का नशा मुक्ति केंद्र।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। नशे के गढ़ में दलदल में फंस चुके युवाओं को बाहर निकालने के लिए पुलिस विभाग अभियान चला रहा है। काउंसिलिंग के जरिये मरीजों को नशा छोड़ने और उपचार लेने के लिए तैयार किया जा रहा है, लेकिन मरीजों को उपचार न मिलने के कारण पुलिस विभाग का अभियान सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। नशा छोड़ने वाले मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा है यहां तक कि दाखिल होने के लिए भी वेटिंग चल रही है। नशा लेने वाले मरीजों के लिए वर्ष 2018 में ओएसटी सेंटर खोला जाना था जो कि साढ़े चार साल बाद भी सिरे नहीं चढ़ पाया है। हालांकि इसको लेकर मुख्यालय की तरफ से दो बार मंजूरी भी मिल चुकी है।
इसको लेकर अब पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह ने सिविल सर्जन कार्यालय को पत्र लिखा है और ओएसटी सेंटर शुरू करने के लिए कहा है। यहां तक कि ये भी हवाला दिया गया है कि नशा मुक्ति केंद्र में डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जाए। चिकित्सकों की माने तो ओएसटी सेंटर में नशा छोड़ने वाले मरीजों की जांच के साथ-साथ काउंसिलिंग होगी। नशे की लत को खत्म करने के लिए मरीजों को डॉक्टर व स्टाफ अपनी निगरानी में दवा देंगे। दवा से मरीज को नशे की लत नहीं होगी। धीरे-धीरे मरीज की दवा डोज कम करके उसे नशे की लत को खत्म किया जाएगा। जो गोली दी जाएगी वह नशे की लत को खत्म करेगी। संवाद
रतिया से फतेहाबाद शिफ्ट हो चुका ओएसटी सेंटर
ओएसटी सेंटर वर्ष 2018 में शुरू होना था। स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने रतिया में ओएसटी सेंटर यानी ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी सेंटर खोलने की मंजूरी दी थी। सेंटर चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग फतेहाबाद ने डॉक्टर, नर्स, काउंसलर व डाटा मैनेजर के पदों पर भर्ती भी कर ली। जब दोबारा मंजूरी के लिए मुख्यालय में भेजा गया तो एसीएस ने मंजूरी नहीं दी। जबकि पंचकूला से आई टीम ने भर्ती प्रक्रिया को पूरा किया था। सिविल सर्जन कार्यालय ने 25 फरवरी 2020 को भर्ती रद्द कर दी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने रतिया की जगह फतेहाबाद जिला नागरिक अस्पताल में ओएसटी सेंटर खोलने की मंजूरी दे दी। लेकिन ओएसटी सेंटर खोलने के लिए दोबारा भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।
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तीन माह से सिविल सर्जन पद खाली
ओएसटी सेंटर शुरू न होने के पीछे वजह ये भी है कि यहां पर तीन माह से सिविल सर्जन का पद ही खाली है। उप सिविल सर्जन कार्यभार संभाल रही है। बताया जा रहा है कि ओएसटी सेंटर को लेकर भर्ती को लेकर फैसला होना है जो कि सिविल सर्जन के आने के बाद ही हो पाएगा।
सुबह 8 बजे ही बुक हो जाता है बेड, वेटिंग में मरीज
नशा मुक्ति केंद्र के हालात ये है कि मरीजों को दाखिल होने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। 10 बेड की मंजूरी है हालांकि तीन बेड महिलाओं और माइनर मरीज के लिए भी अलग से रिजर्व किए गए है। 10 में से अगर कोई मरीज डिस्चार्ज होता है तो साथ-साथ ही दूसरा मरीज दाखिल हो जाता है। सुबह ओपीडी शुरू होते ही खाली बेड बुक हो जाता है।
नशा मुक्ति केंद्र की स्थिति
रोजाना ओपीडी : 35 से 40
दाखिल हुए मरीज : 1051 (मई 2018 से अब तक)
मरीजों की मौत : 34 (दो महिलाएं भी शामिल)
कोट
नशा मुक्ति केंद्र में फिलहाल 12 मरीज दाखिल है। तीन बेड महिला मरीज के लिए रखे गए है। इसके अलावा माइनर मरीज के लिए भी बेड रिजर्व है। केंद्र में बेड की कमी के कारण दिक्कत आ रही है। मरीज जैसे ही डिस्चार्ज होता है दूसरे मरीज को दाखिल कर लिया जाता है।
-डॉ. गिरीश, इंचार्ज, नशा मुक्ति केंद्र
कोट
ओएसटी सेंटर पहले रतिया में खुलना था, इसको लेकर कर्मचारियों की भर्ती भी हो गई थी लेकिन बाद में रद्द कर दी गई। अब मुख्यालय की तरफ से ओएसटी सेंटर जिला मुख्यालय में शुरू करने के आदेश आए है। मुख्यालय की तरफ से दस्तावेज भी भेज गए हैं लेकिन अभी तक पहुंचे नहीं है।
-डॉ.हनुमान, उप सिविल सर्जन
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इसको लेकर अब पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह ने सिविल सर्जन कार्यालय को पत्र लिखा है और ओएसटी सेंटर शुरू करने के लिए कहा है। यहां तक कि ये भी हवाला दिया गया है कि नशा मुक्ति केंद्र में डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जाए। चिकित्सकों की माने तो ओएसटी सेंटर में नशा छोड़ने वाले मरीजों की जांच के साथ-साथ काउंसिलिंग होगी। नशे की लत को खत्म करने के लिए मरीजों को डॉक्टर व स्टाफ अपनी निगरानी में दवा देंगे। दवा से मरीज को नशे की लत नहीं होगी। धीरे-धीरे मरीज की दवा डोज कम करके उसे नशे की लत को खत्म किया जाएगा। जो गोली दी जाएगी वह नशे की लत को खत्म करेगी। संवाद
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रतिया से फतेहाबाद शिफ्ट हो चुका ओएसटी सेंटर
ओएसटी सेंटर वर्ष 2018 में शुरू होना था। स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने रतिया में ओएसटी सेंटर यानी ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी सेंटर खोलने की मंजूरी दी थी। सेंटर चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग फतेहाबाद ने डॉक्टर, नर्स, काउंसलर व डाटा मैनेजर के पदों पर भर्ती भी कर ली। जब दोबारा मंजूरी के लिए मुख्यालय में भेजा गया तो एसीएस ने मंजूरी नहीं दी। जबकि पंचकूला से आई टीम ने भर्ती प्रक्रिया को पूरा किया था। सिविल सर्जन कार्यालय ने 25 फरवरी 2020 को भर्ती रद्द कर दी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने रतिया की जगह फतेहाबाद जिला नागरिक अस्पताल में ओएसटी सेंटर खोलने की मंजूरी दे दी। लेकिन ओएसटी सेंटर खोलने के लिए दोबारा भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।
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तीन माह से सिविल सर्जन पद खाली
ओएसटी सेंटर शुरू न होने के पीछे वजह ये भी है कि यहां पर तीन माह से सिविल सर्जन का पद ही खाली है। उप सिविल सर्जन कार्यभार संभाल रही है। बताया जा रहा है कि ओएसटी सेंटर को लेकर भर्ती को लेकर फैसला होना है जो कि सिविल सर्जन के आने के बाद ही हो पाएगा।
सुबह 8 बजे ही बुक हो जाता है बेड, वेटिंग में मरीज
नशा मुक्ति केंद्र के हालात ये है कि मरीजों को दाखिल होने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। 10 बेड की मंजूरी है हालांकि तीन बेड महिलाओं और माइनर मरीज के लिए भी अलग से रिजर्व किए गए है। 10 में से अगर कोई मरीज डिस्चार्ज होता है तो साथ-साथ ही दूसरा मरीज दाखिल हो जाता है। सुबह ओपीडी शुरू होते ही खाली बेड बुक हो जाता है।
नशा मुक्ति केंद्र की स्थिति
रोजाना ओपीडी : 35 से 40
दाखिल हुए मरीज : 1051 (मई 2018 से अब तक)
मरीजों की मौत : 34 (दो महिलाएं भी शामिल)
कोट
नशा मुक्ति केंद्र में फिलहाल 12 मरीज दाखिल है। तीन बेड महिला मरीज के लिए रखे गए है। इसके अलावा माइनर मरीज के लिए भी बेड रिजर्व है। केंद्र में बेड की कमी के कारण दिक्कत आ रही है। मरीज जैसे ही डिस्चार्ज होता है दूसरे मरीज को दाखिल कर लिया जाता है।
-डॉ. गिरीश, इंचार्ज, नशा मुक्ति केंद्र
कोट
ओएसटी सेंटर पहले रतिया में खुलना था, इसको लेकर कर्मचारियों की भर्ती भी हो गई थी लेकिन बाद में रद्द कर दी गई। अब मुख्यालय की तरफ से ओएसटी सेंटर जिला मुख्यालय में शुरू करने के आदेश आए है। मुख्यालय की तरफ से दस्तावेज भी भेज गए हैं लेकिन अभी तक पहुंचे नहीं है।
-डॉ.हनुमान, उप सिविल सर्जन