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सरकारी स्कूलों में जनरेटर में तेल नहीं, न कंप्यूटर ठीक कराने का बजट
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गांवों में खराब हो रहे एजुसेट सिस्टम।
- फोटो : Fatehabad
शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों को हाईटेक बनाने का दावा कर रहा है। स्कूलों को डिजिटल बोर्ड, टैबलेट, कंप्यूटर दिए जा रहे हैं ताकि विद्यार्थी निजी स्कूलों का मुकाबला कर पाएं। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि स्कूलों में हाईटेक संसाधन आने के बाद भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। 10 साल पहले स्कूलों को दिए गए कंप्यूटरों को ठीक करवाने के लिए बजट ही नहीं आया। हालात ये हैं कि कंप्यूटरों पर धूल जमा हो चुकी है।
कंप्यूटर शिक्षा के लिए 10 साल में एक बार भी किताबें नहीं दी गई है। ये ही नहीं इन कंप्यूटरों को चलाने के लिए स्कूलों को लाखों रुपये कीमत का एक-एक जेनरेटर दिया गया। लेकिन इन जेनरेटरों को चलाने के लिए तेल का बजट नहीं मिला है। हालात ये हैं कि जनरेटर जर्जर हालत में हो चुके हैं। अब स्कूलों को डिजिटल बोर्ड और टैबलेट दिए जा रहे हैं लेकिन इन्हें चलाने के लिए स्कूलों में नेट की सुविधा ही नहीं है। ये ही शिक्षा विभाग की तरफ से टैबलेट और डिजिटल बोर्ड के लिए नेट की व्यवस्था ही नहीं की है। संवाद
स्कूलों को मिले थे 25-25 कंप्यूटर
शिक्षा विभाग ने वर्ष 2011 में मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा शुरू की थी। मिडिल और हाई स्कूलों को 25-25 कंप्यूटर दिए गए थे। इसके अलावा सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को 50-50 कंप्यूटर दिए गए। 25 कंप्यूटरों के साथ एक लैब शुरू हुई थी। लैब में कंप्यूटर के लिए यूपीएस दिए गए लेकिन अब इनकी बैटरी डेड हो चुकी हैं।
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जिले में स्कूलों की स्थिति
खंड स्कूल
फतेहाबाद 165
भट्टू 68
भूना 85
जाखल 52
रतिया 144
टोहाना 109
बिना नेट डिजिटल बोर्ड और टैबलेट कैसे चलें
जिले के 623 स्कूलों को शिक्षा विभाग ने टैबलेट जारी किए हैं। शिक्षकों को इन टैबलेट से ही काम निपटाना होगा। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि इन टैबलेट को चलाने के लिए नेट की जरूरत है लेकिन शिक्षा विभाग ने इसकी व्यवस्था नहीं की है। इसके अलावा स्कूलों को डिजिटल बोर्ड दिए गए हैं। शिक्षकों को इन बोर्ड पर काम करवाना होगा लेकिन इन्हें भी चलाने के लिए नेट की जरूरत है। शिक्षकों के पास सीमित नेट होता है। बिना नेट व्यवस्था के शिक्षक कैसे डिजिटल बोर्ड चला सकते हैं। दूसरी बड़ी समस्या यह है कि गांवों में नेटवर्क की भी समस्या रहती है।
एजुसेट, कहीं छतरी तो कहीं कैमरे गायब
सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग ने एजुसेट भेजकर आधुनिक शिक्षा की नींव रखने की कोशिश की थी। प्राइमरी स्कूलों को एजुसेट दिए गए थे। अब एजुसेट उपकरण के हालात ये हैं कि अब स्कूलों के कोने में पड़े धूल फांक रहे हैं। कहीं छतरी तो कहीं कैमरे गायब हो चुके हैं। इसके अलावा कई जगहों पर टीवी खराब हो चुके हैं।
कोट
शिक्षा विभाग ने स्कूलों को कंप्यूटर दिए लेकिन उसके बाद कभी भी मरम्मत के लिए बजट नहीं दिया गया है। हालात ये हैं कि कंप्यूटरों की विंडो खराब हो चुकी है। ये ही नहीं विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर से संबंधित किताबें जारी ही नहीं हुई हैं।
- आत्माराम, कंप्यूटर लैब सहायक।
कोट
शिक्षा विभाग बड़े स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदकर समय-समय पर विद्यालयों में भेजता रहता है। लेकिन इनके इन उपयोग के मासिक खर्च एवं मरम्मत का कोई प्रावधान नहीं रखता है। इसके कारण ये सभी उपकरण स्कूलों में पहुंचते ही बेकार पड़े रहते हैं। इसका कोई उपयोग नहीं हो पाता है। शिक्षा विभाग शिक्षकों पर अपने खर्च पर उपयोग करने के लिए दबाव डालता है यह ठीक नहीं है। उपकरण पहुंच के साथ ही मरम्मत और मासिक प्रयोग का बजट की व्यवस्था होनी चाहिए।
- देवेंद्र दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा।
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कंप्यूटर शिक्षा के लिए 10 साल में एक बार भी किताबें नहीं दी गई है। ये ही नहीं इन कंप्यूटरों को चलाने के लिए स्कूलों को लाखों रुपये कीमत का एक-एक जेनरेटर दिया गया। लेकिन इन जेनरेटरों को चलाने के लिए तेल का बजट नहीं मिला है। हालात ये हैं कि जनरेटर जर्जर हालत में हो चुके हैं। अब स्कूलों को डिजिटल बोर्ड और टैबलेट दिए जा रहे हैं लेकिन इन्हें चलाने के लिए स्कूलों में नेट की सुविधा ही नहीं है। ये ही शिक्षा विभाग की तरफ से टैबलेट और डिजिटल बोर्ड के लिए नेट की व्यवस्था ही नहीं की है। संवाद
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स्कूलों को मिले थे 25-25 कंप्यूटर
शिक्षा विभाग ने वर्ष 2011 में मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा शुरू की थी। मिडिल और हाई स्कूलों को 25-25 कंप्यूटर दिए गए थे। इसके अलावा सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को 50-50 कंप्यूटर दिए गए। 25 कंप्यूटरों के साथ एक लैब शुरू हुई थी। लैब में कंप्यूटर के लिए यूपीएस दिए गए लेकिन अब इनकी बैटरी डेड हो चुकी हैं।
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जिले में स्कूलों की स्थिति
खंड स्कूल
फतेहाबाद 165
भट्टू 68
भूना 85
जाखल 52
रतिया 144
टोहाना 109
बिना नेट डिजिटल बोर्ड और टैबलेट कैसे चलें
जिले के 623 स्कूलों को शिक्षा विभाग ने टैबलेट जारी किए हैं। शिक्षकों को इन टैबलेट से ही काम निपटाना होगा। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि इन टैबलेट को चलाने के लिए नेट की जरूरत है लेकिन शिक्षा विभाग ने इसकी व्यवस्था नहीं की है। इसके अलावा स्कूलों को डिजिटल बोर्ड दिए गए हैं। शिक्षकों को इन बोर्ड पर काम करवाना होगा लेकिन इन्हें भी चलाने के लिए नेट की जरूरत है। शिक्षकों के पास सीमित नेट होता है। बिना नेट व्यवस्था के शिक्षक कैसे डिजिटल बोर्ड चला सकते हैं। दूसरी बड़ी समस्या यह है कि गांवों में नेटवर्क की भी समस्या रहती है।
एजुसेट, कहीं छतरी तो कहीं कैमरे गायब
सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग ने एजुसेट भेजकर आधुनिक शिक्षा की नींव रखने की कोशिश की थी। प्राइमरी स्कूलों को एजुसेट दिए गए थे। अब एजुसेट उपकरण के हालात ये हैं कि अब स्कूलों के कोने में पड़े धूल फांक रहे हैं। कहीं छतरी तो कहीं कैमरे गायब हो चुके हैं। इसके अलावा कई जगहों पर टीवी खराब हो चुके हैं।
कोट
शिक्षा विभाग ने स्कूलों को कंप्यूटर दिए लेकिन उसके बाद कभी भी मरम्मत के लिए बजट नहीं दिया गया है। हालात ये हैं कि कंप्यूटरों की विंडो खराब हो चुकी है। ये ही नहीं विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर से संबंधित किताबें जारी ही नहीं हुई हैं।
- आत्माराम, कंप्यूटर लैब सहायक।
कोट
शिक्षा विभाग बड़े स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदकर समय-समय पर विद्यालयों में भेजता रहता है। लेकिन इनके इन उपयोग के मासिक खर्च एवं मरम्मत का कोई प्रावधान नहीं रखता है। इसके कारण ये सभी उपकरण स्कूलों में पहुंचते ही बेकार पड़े रहते हैं। इसका कोई उपयोग नहीं हो पाता है। शिक्षा विभाग शिक्षकों पर अपने खर्च पर उपयोग करने के लिए दबाव डालता है यह ठीक नहीं है। उपकरण पहुंच के साथ ही मरम्मत और मासिक प्रयोग का बजट की व्यवस्था होनी चाहिए।
- देवेंद्र दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा।

फतेहाबाद के सरकारी स्कूल में डीजल बजट न आने से कंडम हो रहे जनरेटर।- फोटो : Fatehabad

सरकारी स्कूल में धूल फांक रहे कम्प्यूटर सिस्टम।- फोटो : Fatehabad