हरियाणा: नई आफत बना ब्लैक फंगस, फतेहाबाद जिले में न इलाज और न ही दवा
हरियाणा सरकार की ओर से शनिवार को ही ब्लैक फंगस को अधिसूचित रोग घोषित किया गया है। निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी अस्पताल में ब्लैक फंगस का रोगी मिलने पर तुरंत इसकी रिपोर्ट जिले के सीएमओ को देनी होगी।
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कोरोना महामारी से अभी हरियाणा जूझ ही रहा है कि अब ब्लैक फंगस की आफत शुरू हो गई है। हालांकि, डॉक्टर मानते हैं कि यह कोरोना संक्रमण का ही परिणाम है, जिसमें ऑक्सीजन पाइप के लगातार इस्तेमाल के कारण नाक से इस बीमारी की शुरुआत होती है और बाद में इंफेक्शन बढ़ता जाता है। यही ब्लैक फंगस नाक के बाद आंखों के रास्ते से मस्तिष्क पर अटैक करता है।
अब समस्या ये है कि इस बीमारी का स्थानीय स्तर पर उपचार नहीं है। सिर्फ रोगियों के लिए ही नहीं, बल्कि चिकित्सकों के लिए भी ब्लैक फंगस नया अनुभव है। इससे पहले बहुत कम मरीजों में यह बीमारी होती है। इसलिए यहां पर मरीजों के उपचार की सुविधा की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। न ही कभी दवा मंगवानी पड़ी। यहां तक कि मेडिकल स्टोर्स पर भी इसकी दवा उपलब्ध नहीं है।
फिलहाल जिले में ब्लैक फंगस से पीड़ित एक महिला मिली है, जिसे रोहतक रेफर कर दिया गया। 45 साल की कोरोना पीड़ित महिला के नाक व आंखों के आसपास ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई दिए। मगर यहां पर चिकित्सकों के पास इसकी दवा ही नहीं थी। डॉक्टर ने कुछ दवा लिखकर दी और महिला के परिजनों को कहा गया कि ये दवा ले आओ। परिजनों ने शहर के कई मेडिकल स्टोर से पता किया, लेकिन दवा नहीं मिली। इसके बाद एक मेडिकल स्टोर के संचालक ने बाहर से मंगवाकर दी। करीब 2500 रुपये की दवा थी। दवा विक्रेता सिर्फ स्पेशल ऑर्डर पर ही मंगवाकर देते हैं। रूटीन में अपने पास नहीं रखते।
ब्लैक फंगस बीमारी का पहली बार केस आया है, इसलिए मेडिकल स्टोर्स पर इससे संबंधी दवा की कभी जरूरत ही नहीं पड़ी। अब भी किसी को जरूरत पड़ेगी तो बड़े शहरों से ही मंगवाकर देनी पड़ेगी। - महेंद्र सिंह, संचालक, मेडिकल स्टोर संचालक
फिलहाल हमारे पास दवा नहीं है: एसएमओ
फिलहाल अस्पताल में ब्लैक फंगस की दवा नहीं है। चूंकि इस तरह के कभी मरीज ही नहीं आए। अब यहां एक भी मरीज नहीं है। इसलिए दवा भी नहीं है। ऐसे केस कई शहरों में आ रहे हैं। ऐसे में सरकार के स्तर पर ही निर्णय लिया जाएगा कि दवा की आपूर्ति कैसे निर्धारित हो। - डॉ.राजेश चौधरी, एसएमओ, नागरिक अस्पताल