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नाम का जिला मुख्यालय, पिंक सिटी में सुविधाएं उपमंडल जैसी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jul 2022 12:21 AM IST
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Named district headquarters, facilities in Pink City like sub-division
शहर की सतीश कॉलोनी में टूटी सड़क पर हुआ जलभराव। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। पिंक सिटी के नाम से मशहूर फतेहाबाद शहर जिला बनने के 25 साल बाद भी पिछड़ापन दूर नहीं कर पाया है। नाम तो जिला मुख्यालय का है, लेकिन सुविधाएं आज भी उपमंडल जैसी ही हैं। शहर के विकास को लेकर गंभीरता से न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों ने कोई प्लान बनाया। बढ़ती आबादी के मुकाबले सुविधाएं नाकाफी साबित होने लगी हैं। साल 2011 में शहर की आबादी 77 हजार 770 थी, जो अब बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई है। नौकरीपेशा लोगों की भी काफी संख्या हैं, जो दिनभर शहर में रहते हैं, लेकिन शाम होते ही अपने घर चले जाते हैं। ऐसे में यहां के निवासी भी और आवाजाही करने वाले भी ओवरफ्लो सीवर से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
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समस्या यह है कि बढ़ती आबादी के मुकाबले शहर को विकसित नहीं किया जा रहा है। पार्किंग की जगह धीरे-धीरे खत्म होने लगी हैं। जीटी रोड पर तो पूरी तरह फुटपाथ को ही पार्किंग बना दिया गया है। सड़क तक पर गाड़ियां खड़ी रहती है। शहर के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण इंडस्ट्री की कमी और मार्केट का विकसित नहीं होना भी है। यहां जिला बनने के समय कॉटन फैक्टरियां होती थी, लेकिन अब वो भी नाममात्र रह गई हैं। इसके अलावा भी कोई बड़ी इंडस्ट्री यहां नहीं लगी। शहर में मार्केट के नाम पर सिर्फ धर्मशाला रोड, थाना रोड व चार मरला कॉलोनी ही है। यही कारण है कि थोड़ी सी ज्यादा खरीदारी करनी हो तो लोग सीधे 50 किलोमीटर दूर हिसार जाते हैं। संवाद
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25 साल में सिर्फ एक सेक्टर बसा, वो भी आधा
इन 25 सालों में शहर में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने यूं तो 22 सेक्टर काट रखे हैं। मगर इनमें से रिहायश सिर्फ सेक्टर तीन में बन पाई है। यहां भी मात्र 350 प्लॉटों पर लोगों ने घर बनाए हैं। यानी सेक्टर तीन भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है। सेक्टर बनने के बाद से सेक्टरवासी नहरी पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
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8 साल से बैंक स्कवायर का प्रोजेक्ट लटका
शहर में सुविधाओं के हाल ऐसे हैं कि पिछले आठ साल से बैंक स्कवायर का प्रोजेक्ट कागजों से बाहर नहीं निकला है। विशेष बात यह है कि यह मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा है। दरअसल, बैंक स्कवायर में सभी बैंकों को एक ही स्थान पर जगह उपलब्ध करवानी है। जहां पार्किंग से लेकर अन्य सुविधाएं बैंकों को मिलेगी। मगर यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ा है।
शहर में पुरानी गाड़ियों की बढ़ रही संख्या
इस समय शहर में पुरानी गाड़ियों की भी संख्या लगातार बढ़ रही है। दिल्ली एनसीआर में पुरानी गाड़ियों पर बैन लगने के साथ ही वहां से फतेहाबाद व साथ लगते अन्य जिलों में गाड़ियां पहुंच जाती है। शहर में प्रति एक हजार परिवारों में से 200 परिवारों के पास गाड़ियां हैं। अलग-अलग कंपनियों के शोरूम से हर महीने 110 नई गाड़ियों की बिक्री होती है।
25 साल से शहर के लिए नहीं बनाया ड्रेनेज प्लान
विडंबना है कि इन 25 सालों में शहर से बारिश के पानी की निकासी का ड्रेनेज प्लान तक नहीं बनाया गया है। यह जिम्मेदारी नगर परिषद प्रशासन की है। मगर इस पर कोई काम नहीं हुआ। लोगों के भारी विरोध के कारण पिछले साल सिर्फ जवाहर चौक व धर्मशाला रोड से निकासी के लिए चिल्ली क्षेत्र का प्रोजेक्ट बन पाया है। उस पर भी जनस्वास्थ्य विभाग ने काम किया है, सिर्फ पैसा नगर परिषद प्रशासन ने दिया है। बाकी पूरे शहर में बारिश का पानी सिर्फ सीवर लाइन के सहारे ही निकलता है।
ये भी कमियां....
जिला मुख्यालय आज भी रेल सेवा को तरस रहा है।
फतेहाबाद शहर में सरकारी महाविद्यालय तक नहीं है।
सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज भी शहर से 10 किलोमीटर दूर है।
रोडवेज में बसों की संख्या भी नहीं बढ़ी है।
बाजारों में अतिक्रमण की समस्या है।
नागरिक अस्पताल पर अत्याधिक दबाव है।
युवाओं के पास रोजगार का अभाव है।
कोट
शहर को विकसित करने के लिए कोई बेहतर प्लानिंग ही नहीं हुई है। आज तक ड्रेनेज सिस्टम का प्रोजेक्ट नहीं बनाया गया। बारिश में शहर झील बन जाता है। आबादी बढ़ रही है, लेकिन सुविधाएं नहीं।
-मोहनलाल नारंग, पार्षद, वार्ड नंबर 12
कोट
जब मैं 1982 में फतेहाबाद आया था, तब आउटर की कॉलोनियां नहीं थी। जिला तो बन गया, लेकिन आज भी उपमंडल जैसी ही हालत हैं। फतेहाबाद शहर से ज्यादा सुविधाएं तो टोहाना में हैं। इंडस्ट्री नहीं लग पाई। मार्केट भी विकसित नहीं हुई।
-देवेंद्र सिंह दहिया, शिक्षाविद्
कोट
फतेहाबाद शहर में न राजकीय कॉलेज है, न इंजीनियरिंग कॉलेज। सभी आसपास के गांवों में बना रखे हैं। मेडिकल कॉलेज तक भी शहर में बनने की आस नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी हिसार जाना पड़ता है।
-हरबंस लाल सेठी, प्रधान, वरिष्ठ नागरिक परिषद
कोट
जनता अगर अच्छा जनप्रतिनिधि चुनें, तभी विकास हो पाएगा। अच्छे उद्योग नहीं है, अच्छे संस्थान नहीं है। रोजगार के संसाधन नहीं है। परिवार सेवा के लिए तो लोग आएं, लेकिन जनता की सेवा नहीं हो रहे हैं।
-डॉ. वीरेंद्र सिवाच, वरिष्ठ चिकित्सक
कोट
मेरे विधायक कार्यकाल में सबसे बड़ा जलघर व एसटीपी बना। मल्टीपर्पज पार्किंग बनवाई, लेकिन इस पर भी प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा। भाजपा सरकार ने मेडिकल कॉलेज के नाम पर भी छलावा कर दिया। नया बस स्टैंड दो साल से बनकर तैयार है, लेकिन उसका उद्घाटन नहीं हुआ है। सरकार ने फतेहाबाद जिले को हरियाणा के नक्शे से बाहर ही कर रखा है। सीएम की घोषणाओं के भी काम पूरे नहीं हो रहे हैं।

-प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, पूर्व विधायक
कोट
प्रदेश सरकार फतेहाबाद शहर व जिले के विकास के लिए पूरी तरह कृतसंकल्पित है। जनता की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयास हो रहे हैं। मूलभूत सुविधाएं पहले से अधिक बढ़ी हैं।
-सुनीता दुग्गल, सांसद, लोकसभा

फतेहाबाद शहर का ड्रोन से लिया गया चित्र। फाइल फोटो

फतेहाबाद शहर का ड्रोन से लिया गया चित्र। फाइल फोटो- फोटो : Fatehabad

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