{"_id":"591755db4f1c1b85188512c2","slug":"mother-s-day-women-call-sasural-get-mother-love","type":"story","status":"publish","title_hn":"ससुराल में सास नहीं मिले मां का प्यार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ससुराल में सास नहीं मिले मां का प्यार
ब्यूरो अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Sun, 14 May 2017 12:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मां का रिश्ता बहुत की पवित्र होता है। विवाहिताएं भी अपनी ससुराल में सास को मां के रूप में देखना पसंद करती हैं। इसलिए वर्तमान में विवाहिताएं अपनी सास को सास की बजाय मां ही कहती हैं। इन विवाहिताओं का मानना है कि सास ही वह पवित्र मां है जो वैवाहिक जीवन के बाद सगी मां से भी बढ़कर प्यार देती है। मदर्स-डे पर विवाहिताओं ने अपने मन की बात कही तो कई तरह के विचार सामने आए।
भावना वशिष्ठ का कहना है कि यदि ससुराल में पति के अलावा सास अच्छी मिल जाए तो ससुराल में भी जीवन पूरी तरह से सुखमयी हो जाता है। ऐसे में पति के संग रिश्ता निभाने के साथ-साथ युवतियां अपनी सास को भी सच्चे दिल से दूसरी मां के रूप में स्वीकार कर लें तो विश्वास एवं प्रशंसा की पात्र बन सकती हैं।
कृष्णा देवी का मानना है कि युवतियों के दो परिवार होते हैं। एक वो जिसमें उसने जन्म लिया होता है और दूसरा जिसमें वह अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करती है। ऐसे में यदि युवतियां अपने ससुराल को ही एक परिवार की भांति मानकर सास को भी मां के रूप में स्वीकार करते हुए मां जैसा सम्मान दें तो वे पूरे परिवार व समाज की प्रशंसा का पात्र बन सकती हैं।
विज्ञापन
सुमन रानी का कहना है कि कन्याओं को इस दुनिया में केवल बेटी का ही नहीं, बल्कि बहन, पत्नी, मां और सास की भूमिका भी निभानी पड़ती है। यदि विवाहिताएं चाहती हैं कि बुजुर्ग अवस्था में भी उन्हें बेटी का सुख मिले तो उसे पहले अपनी सास को मां का दर्जा देकर जन्मदात्री मां की तरह मान-सम्मान देना चाहिए।
निर्मला देवी ने बताया कि माना जन्मदात्री मां का अहसान जीवन भर चुकाया नहीं जा सकता। लेकिन एक विवाहिता को कभी यह भी नहीं भूलना चाहिए कि उसकी जिंदगी के दूसरे चरण में सास ही मां की भूमिका निभाती है। धन्य हैं वो महिलाएं जो अपनी बहू को बेटी बनाकर रखते हैं और सगी बेटी जैसा प्यार देते हैं। ऐसी मां की ममता जननी से कम नहीं होती।
विज्ञापन
भावना वशिष्ठ का कहना है कि यदि ससुराल में पति के अलावा सास अच्छी मिल जाए तो ससुराल में भी जीवन पूरी तरह से सुखमयी हो जाता है। ऐसे में पति के संग रिश्ता निभाने के साथ-साथ युवतियां अपनी सास को भी सच्चे दिल से दूसरी मां के रूप में स्वीकार कर लें तो विश्वास एवं प्रशंसा की पात्र बन सकती हैं।
विज्ञापन
कृष्णा देवी का मानना है कि युवतियों के दो परिवार होते हैं। एक वो जिसमें उसने जन्म लिया होता है और दूसरा जिसमें वह अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करती है। ऐसे में यदि युवतियां अपने ससुराल को ही एक परिवार की भांति मानकर सास को भी मां के रूप में स्वीकार करते हुए मां जैसा सम्मान दें तो वे पूरे परिवार व समाज की प्रशंसा का पात्र बन सकती हैं।
विज्ञापन
सुमन रानी का कहना है कि कन्याओं को इस दुनिया में केवल बेटी का ही नहीं, बल्कि बहन, पत्नी, मां और सास की भूमिका भी निभानी पड़ती है। यदि विवाहिताएं चाहती हैं कि बुजुर्ग अवस्था में भी उन्हें बेटी का सुख मिले तो उसे पहले अपनी सास को मां का दर्जा देकर जन्मदात्री मां की तरह मान-सम्मान देना चाहिए।
निर्मला देवी ने बताया कि माना जन्मदात्री मां का अहसान जीवन भर चुकाया नहीं जा सकता। लेकिन एक विवाहिता को कभी यह भी नहीं भूलना चाहिए कि उसकी जिंदगी के दूसरे चरण में सास ही मां की भूमिका निभाती है। धन्य हैं वो महिलाएं जो अपनी बहू को बेटी बनाकर रखते हैं और सगी बेटी जैसा प्यार देते हैं। ऐसी मां की ममता जननी से कम नहीं होती।