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Fatehabad News: कुत्ते हुए आक्रमक... बधियाकरण की योजना डेढ़ साल कागजों में
Mon, 06 Jan 2025 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 06 Jan 2025 11:10 PM IST
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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में ही घूमता हुआ कुत्तों का झुंडसंवाद
फतेहाबाद। शहर में रोजाना 15 से 20 लोग कुत्तों के काटने के शिकार हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल में रोजाना ये लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन प्रशासन कुत्तों को पकड़कर उनके वैक्सीनेशन और बधियाकरण करने को लेकर गंभीर नहीं है।
डेढ़ साल पहले प्रस्ताव तैयार हुआ और टेंडर लगाए गए, लेकिन दो बार प्रयास के बाद एजेंसी नियम अनुसार नहीं आई तो प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। करीब 6 माह से दोबारा टेंडर लगाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। यही नहीं नगर परिषद पालतू कुत्तों का भी पंजीकरण नहीं कर पाया है। नगर परिषद के पास रिकॉर्ड नहीं है कि शहर में कितने पालतू कुत्ते हैं और किस नस्ल के हैं। अधिकारियों का कहना है कि उनके पास आवेदन आएगा तो पंजीकरण कर दिया जाएगा।
जबकि हालात ये है कि स्ट्रीट डॉग के अलावा पालतू कुत्ते भी लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। वर्ष 2023 और 2024 में दो मामले भी इसको लेकर दर्ज हो चुके हैं। जिसमें कुत्तों ने बच्चों पर हमला किया। इसके अलावा टोहाना में एक बुजुर्ग महिला की मौत हुई थी। इसमें भी आशंका जताई गई थी कि उसकी कुत्तों के हमले से मौत हुई है।
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- एक ही आ रही है एजेंसी, नहीं खोला गया टेंडर
कुत्तों को पकड़कर उनके टीकाकरण और बधियाकरण को लेकर दो बार टेंडर लगाया गया है, लेकिन एक ही एजेंसी आ रही है। पिछले साल फरवरी माह में जो एजेंसी आई थी उसने 1190 रुपये प्रति कुत्ते के हिसाब से रेट मांगा था। तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी द्वारा टेंडर खोलने की प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन मामला में शर्तों में उलझ गया था। इसके चलते प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया था। एजेंसी के पास कुत्तों को पकड़ने के लिए ट्रेंड स्टाफ के अलावा सेंटर होना भी जरूरी है जिसमें बधियाकरण के बाद रखा जा सके।
- नगर परिषद ने टेंडर को लेकर पहले ये लगाई थी शर्तें
- ठेकेदार को वर्क ऑर्डर मिलने के एक सप्ताह के अंदर ही टेंडर में दी गई नियम व शर्तों के अनुरूप नगर परिषद फतेहाबाद से इकरारनामा करना होगा।
- ठेके की अवधि एक वर्ष की होगी।
- ठेकेदार द्वारा कुत्ते पकड़ने के लिए जिन कर्मचारियों को रखा जाएगा, उन्हें पूर्व में कुत्ते पकड़ने का अनुभव होना चाहिए
- वेटरनरी डॉक्टर का प्रबंध ठेकेदार अपने स्तर पर करेगा।
- कुत्ते पकड़ने के साधन, एंटी रैबीज दवा, कुत्ते की खुराक, उसके बीमार होने पर इलाज के समय प्रयोग में लाई जाने वाली दवा आदि का प्रबंध ठेकेदार को अपने स्तर पर करना होगा।
- कुत्तों को रखने का स्थान, पानी, बिजली, ऑपरेशन थियेटर के लिए कमरा, पंखा, दवा रखने के लिए फ्रिज, सामान रखने के लिए अलमारी व फर्नीचर इत्यादि का प्रबंध ठेकेदार अपने स्तर पर करेगा।
- कुत्तों को पकड़ते समय कोई निर्दयता नहीं बरती जानी चाहिए। वर्ष 2001 व 2023 में दी गई हिदायतों का पालन करना होगा। इनके उल्लंघन के लिए ठेकेदार खुद जिम्मेदार होगा।
- ठेकेदार द्वारा जिस क्षेत्र से नर व मादा कुत्तों को पकड़ा जाएगा, उनका इन्द्राज रजिस्टर में करना होगा तथा ऑपरेशन उपरांत कुत्तों को पकड़े गए स्थान पर वापस छोड़ना होगा। स्थान की पहचान हेतु कुत्ते के गले में उस क्षेत्र के नाम का टैग लगा हो और वापस छोड़ने के उपरांत उस टैग को हटाना होगा।
- ठेकेदार के पास कुत्तों को पकड़ने के लिए खुद का वाहन होना चाहिए तथा वाहन के आगे नगर परिषद का बैनर लगा होना चाहिए।
- ठेकेदार के बिल की अदायगी पशुपालन विभाग के डॉक्टर व इस कार्य हेतु गठित की गई कमेटी के द्वारा सत्यापन उपरांत की जाएगी।
- कुत्तों को पकड़ने के लिए एजेंसी चिमटे व तार का प्रयोग नहीं करेगी।
- नसबंदी हेतु शल्यक्रिया से ठीक होने के उपरांत कुत्तों को कम से कम 4 दिन के लिए चयनित जगह पर रखा जाएगा।
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एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंचे लोग
माह टीका लगवाने पहुंचे लोग
मई 205
जून 25
जुलाई 190
अगस्त 151
नोट : ये आंकड़ा पिछले साल नागरिक अस्पताल में हुए टीकाकरण का है।
- पंजीकरण करवाने को लेकर जागरूक नहीं लोग
नगर निकाय ने पालतू कुत्तों के पंजीकरण को लेकर निर्देश दिए हुए हैं, लेकिन यहां एक भी कुत्ते का पंजीकरण नहीं हुआ है। इसके अलावा न ही किसी ने आवेदन किया है, जबकि शहर में डेढ़ हजार से ज्यादा पालतू कुत्ते हैं। यहां तक नगर परिषद द्वारा पालतू कुत्तों के मालिकों को नोटिस जारी नहीं किया गया है। नगर परिषद द्वारा वर्ष 2023-24 के इस कार्य के लिए 1 लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया था लेकिन कोई पंजीकरण नहीं हुआ है। वर्ष 2024-25 में पंजीकरण आय को घटाकर 50 हजार रुपये रखा गया है।
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पुलिस तक पहुंच चुके हैं मामले
केस एक : शहर के ग्रीन पार्क कॉलोनी में पिछले साल फरवरी माह में पालतू कुत्ते ने गुरुग्राम निवासी 10 वर्षीय बच्चे को काट लिया था। जिससे बच्चे के गंभीर चोटें आईं थी। इस मामले में कुत्ते के मालिक के खिलाफ शहर थाना में मामला भी दर्ज हो चुका है।
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केस दो : गांव मुस्सेअहली में भी वर्ष 2023 के नवंबर माह में मामला आया था। जब पालतू कुत्ते डेढ़ साल की बच्ची को उठाकर ले गए थे और बुरी तरह से काटा था। इस मामले में भी बच्ची के पिता चांदी की शिकायत पर कुत्तों के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
-टेंडर प्रक्रिया नगर परिषद के द्वारा की जानी है। पशुपालन विभाग की तरफ से कुछ रिपोर्ट मांगी गई थी वह दे दी गई थी। पता चला है कि एजेंसी न आने के कारण दिक्कत आ रही है।
- सुखविंद्र सिंह, उप निदेशक पशुपालन विभाग, फतेहाबाद।
- मेरे पास प्रस्ताव आएगा तो नियम अनुसार मंजूरी दे दी जाएगी। प्रोजेक्ट क्यों रुका हुआ है इस संबंध में ईओ से जानकारी लेने के बाद जो कार्रवाई है वह की जाएगी।
- संजय बिश्रोई, जिला नगर आयुक्त, फतेहाबाद।
- फोटो नंबर 14
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डेढ़ साल पहले प्रस्ताव तैयार हुआ और टेंडर लगाए गए, लेकिन दो बार प्रयास के बाद एजेंसी नियम अनुसार नहीं आई तो प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। करीब 6 माह से दोबारा टेंडर लगाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। यही नहीं नगर परिषद पालतू कुत्तों का भी पंजीकरण नहीं कर पाया है। नगर परिषद के पास रिकॉर्ड नहीं है कि शहर में कितने पालतू कुत्ते हैं और किस नस्ल के हैं। अधिकारियों का कहना है कि उनके पास आवेदन आएगा तो पंजीकरण कर दिया जाएगा।
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जबकि हालात ये है कि स्ट्रीट डॉग के अलावा पालतू कुत्ते भी लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। वर्ष 2023 और 2024 में दो मामले भी इसको लेकर दर्ज हो चुके हैं। जिसमें कुत्तों ने बच्चों पर हमला किया। इसके अलावा टोहाना में एक बुजुर्ग महिला की मौत हुई थी। इसमें भी आशंका जताई गई थी कि उसकी कुत्तों के हमले से मौत हुई है।
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- एक ही आ रही है एजेंसी, नहीं खोला गया टेंडर
कुत्तों को पकड़कर उनके टीकाकरण और बधियाकरण को लेकर दो बार टेंडर लगाया गया है, लेकिन एक ही एजेंसी आ रही है। पिछले साल फरवरी माह में जो एजेंसी आई थी उसने 1190 रुपये प्रति कुत्ते के हिसाब से रेट मांगा था। तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी द्वारा टेंडर खोलने की प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन मामला में शर्तों में उलझ गया था। इसके चलते प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया था। एजेंसी के पास कुत्तों को पकड़ने के लिए ट्रेंड स्टाफ के अलावा सेंटर होना भी जरूरी है जिसमें बधियाकरण के बाद रखा जा सके।
- नगर परिषद ने टेंडर को लेकर पहले ये लगाई थी शर्तें
- ठेकेदार को वर्क ऑर्डर मिलने के एक सप्ताह के अंदर ही टेंडर में दी गई नियम व शर्तों के अनुरूप नगर परिषद फतेहाबाद से इकरारनामा करना होगा।
- ठेके की अवधि एक वर्ष की होगी।
- ठेकेदार द्वारा कुत्ते पकड़ने के लिए जिन कर्मचारियों को रखा जाएगा, उन्हें पूर्व में कुत्ते पकड़ने का अनुभव होना चाहिए
- वेटरनरी डॉक्टर का प्रबंध ठेकेदार अपने स्तर पर करेगा।
- कुत्ते पकड़ने के साधन, एंटी रैबीज दवा, कुत्ते की खुराक, उसके बीमार होने पर इलाज के समय प्रयोग में लाई जाने वाली दवा आदि का प्रबंध ठेकेदार को अपने स्तर पर करना होगा।
- कुत्तों को रखने का स्थान, पानी, बिजली, ऑपरेशन थियेटर के लिए कमरा, पंखा, दवा रखने के लिए फ्रिज, सामान रखने के लिए अलमारी व फर्नीचर इत्यादि का प्रबंध ठेकेदार अपने स्तर पर करेगा।
- कुत्तों को पकड़ते समय कोई निर्दयता नहीं बरती जानी चाहिए। वर्ष 2001 व 2023 में दी गई हिदायतों का पालन करना होगा। इनके उल्लंघन के लिए ठेकेदार खुद जिम्मेदार होगा।
- ठेकेदार द्वारा जिस क्षेत्र से नर व मादा कुत्तों को पकड़ा जाएगा, उनका इन्द्राज रजिस्टर में करना होगा तथा ऑपरेशन उपरांत कुत्तों को पकड़े गए स्थान पर वापस छोड़ना होगा। स्थान की पहचान हेतु कुत्ते के गले में उस क्षेत्र के नाम का टैग लगा हो और वापस छोड़ने के उपरांत उस टैग को हटाना होगा।
- ठेकेदार के पास कुत्तों को पकड़ने के लिए खुद का वाहन होना चाहिए तथा वाहन के आगे नगर परिषद का बैनर लगा होना चाहिए।
- ठेकेदार के बिल की अदायगी पशुपालन विभाग के डॉक्टर व इस कार्य हेतु गठित की गई कमेटी के द्वारा सत्यापन उपरांत की जाएगी।
- कुत्तों को पकड़ने के लिए एजेंसी चिमटे व तार का प्रयोग नहीं करेगी।
- नसबंदी हेतु शल्यक्रिया से ठीक होने के उपरांत कुत्तों को कम से कम 4 दिन के लिए चयनित जगह पर रखा जाएगा।
एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंचे लोग
माह टीका लगवाने पहुंचे लोग
मई 205
जून 25
जुलाई 190
अगस्त 151
नोट : ये आंकड़ा पिछले साल नागरिक अस्पताल में हुए टीकाकरण का है।
- पंजीकरण करवाने को लेकर जागरूक नहीं लोग
नगर निकाय ने पालतू कुत्तों के पंजीकरण को लेकर निर्देश दिए हुए हैं, लेकिन यहां एक भी कुत्ते का पंजीकरण नहीं हुआ है। इसके अलावा न ही किसी ने आवेदन किया है, जबकि शहर में डेढ़ हजार से ज्यादा पालतू कुत्ते हैं। यहां तक नगर परिषद द्वारा पालतू कुत्तों के मालिकों को नोटिस जारी नहीं किया गया है। नगर परिषद द्वारा वर्ष 2023-24 के इस कार्य के लिए 1 लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया था लेकिन कोई पंजीकरण नहीं हुआ है। वर्ष 2024-25 में पंजीकरण आय को घटाकर 50 हजार रुपये रखा गया है।
पुलिस तक पहुंच चुके हैं मामले
केस एक : शहर के ग्रीन पार्क कॉलोनी में पिछले साल फरवरी माह में पालतू कुत्ते ने गुरुग्राम निवासी 10 वर्षीय बच्चे को काट लिया था। जिससे बच्चे के गंभीर चोटें आईं थी। इस मामले में कुत्ते के मालिक के खिलाफ शहर थाना में मामला भी दर्ज हो चुका है।
केस दो : गांव मुस्सेअहली में भी वर्ष 2023 के नवंबर माह में मामला आया था। जब पालतू कुत्ते डेढ़ साल की बच्ची को उठाकर ले गए थे और बुरी तरह से काटा था। इस मामले में भी बच्ची के पिता चांदी की शिकायत पर कुत्तों के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
-टेंडर प्रक्रिया नगर परिषद के द्वारा की जानी है। पशुपालन विभाग की तरफ से कुछ रिपोर्ट मांगी गई थी वह दे दी गई थी। पता चला है कि एजेंसी न आने के कारण दिक्कत आ रही है।
- सुखविंद्र सिंह, उप निदेशक पशुपालन विभाग, फतेहाबाद।
- मेरे पास प्रस्ताव आएगा तो नियम अनुसार मंजूरी दे दी जाएगी। प्रोजेक्ट क्यों रुका हुआ है इस संबंध में ईओ से जानकारी लेने के बाद जो कार्रवाई है वह की जाएगी।
- संजय बिश्रोई, जिला नगर आयुक्त, फतेहाबाद।
- फोटो नंबर 14