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उधार के राशन से बन रहा मिड-डे मील, 70-70 हजार रुपये के कर्जदार हुए स्कूल
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प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील लेते विद्यार्थी
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। एक तरफ तो सरकार स्कूलों को सभी सुविधाएं मुहैया करवाने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर जिले के सरकारी स्कूलों में तीन माह से मिड-डे मील का भोजन बनाने के लिए दाल, चीनी, दूध, मसालों के रुपये नहीं है। ये स्कूल गांव और शहर की राशन की दुकानों से उधार लेकर मिड-डे मील तैयार करवा रहे हैं। कई स्कूलों पर तो 70 हजार रुपये से ज्यादा का कर्ज हो गया है।
इसके पीछे कारण शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों को मिड-डे मील का बजट जारी न करना है। नवंबर से अभी तक स्कूलों को मिड-डे मील का बजट ही नहीं मिला है। यहां तक कि मिड-डे मील तैयार करने वाली कुक को भी तीन माह से वेतन नहीं मिला है। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है वहां ज्यादा दिक्कत आ रही है। शिक्षक अपनी जेब से रसोई गैस, दूध और सब्जी खरीद रहे हैं और बाकी राशन दुकान से उधार ले रहे हैं। हालात यहां तक हो रहे हैं कि स्कूलों को अब दुकानदार भी राशन उधार में देने में आनाकानी करने लगे हैं। शिक्षा विभाग अधिकारियों की माने तो हर साल 15 करोड़ रुपये मिड-डे मील राशन और तैयार करवाने पर खर्च होता है।
यह है मिड-डे मील का बजट
कक्षा पहली से पांचवीं के विद्यार्थी के लिए : 4 रुपये 48 पैसे
कक्षा छठी से आठवीं के विद्यार्थी के लिए : 6 रुपये 71 पैसे
कुक की तनख्वाह : 3500 रुपये प्रति माह
इन स्कूलों में है समस्या
स्कूल विद्यार्थी संख्या
प्राइमरी 386 44269
मिडल 86 29674
गांव भिरड़ाना द्वितीय के प्राइमरी स्कूल से रिपोर्ट
गांव भिरड़ाना के राजकीय प्राइमरी स्कूल द्वितीय में 319 विद्यार्थी हैं। मिड-डे मील इंचार्ज महाबीर प्रसाद का कहना है कि रसोई गैस को अपने स्तर पर जेब से नकदी देकर ले रहे है। सब्जी और दूध भी अपनी जेब से नकद देकर खरीद रहे है। राशन, मसाले, दाल, चीनी, घी आदि गांव की दुकान से उधार ले रहे हैं। 45 हजार रुपये दुकान वाले की उधार हो रही है और अपनी जेब से करीब 22 हजार रुपये लगा चुके हैं। स्कूल में पांच कुक है। इन्हें भी तीन माह से वेतन नहीं मिला है। दुकानदार से रोजाना उधार में राशन खरीदने में शर्म आने लगी है।
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स्कूल हिजरावां खुर्द से रिपोर्ट
हिजरावां खुर्द के प्राइमरी स्कूल में करीब 350 विद्यार्थी हैं। स्कूल की मिड-डे मील इंचार्ज रेणु कुमारी का कहना है कि पिछले तीन माह से बजट नहीं आया है। मिड-डे मील का राशन दुकान से उधार ले रहे हैं। कभी गांव से ही तो कभी शहर से उधार में राशन लाना पड़ रहा है। दुकानदार का करीब 70 हजार रुपये उधार हो गया है। दुकान वाला रोजाना उधार देने में आनाकानी करने लगा है। स्कूल में चार कुक है। तीन माह का इनका करीब 40 हजार रुपये बकाया पड़ा है।
राशन के लिए देता है विभाग
मिड-डे मील के लिए चावल और गेहूं शिक्षा विभाग खुद स्कूलों को भेजता है। मिड-डे मील में इस्तेमाल होने वाले दाल, चीनी, दूध, मसाले, इंधन खर्च के लिए विभाग प्रति विद्यार्थी के हिसाब से बजट देता है। इसके अलावा प्रति कुक को 3500 रुपये के हिसाब से बजट दिया जाता है। विद्यार्थियों के लिए रोजाना दोपहर का भोजन बनाना भी जरूरी है इसलिए शिक्षकों को दुकान से उधार लाकर व्यवस्था करनी पड़ रही है।
वर्जन
विभाग को बजट की तरफ ध्यान देना चाहिए। तीन माह से स्कूलों को मिड-डे मील का बजट नहीं मिला है। शिक्षक दुकानों से उधार ले रहे हैं जो कि शर्म की बात है। दुकानदार उधार देने में भी आनाकानी करने लगे हैं। कुक भी इसी पर निर्भर है, लेकिन तीन माह से इन्हें भी वेतन नहीं मिला है। विभाग को बल्कि एडवांस बजट जारी करना चाहिए।
- विकास टुटेजा, जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
वर्जन
निदेशालय के पास बजट डिमांड के लिए भेज रखा है। इस मामले में सोमवार को भी उच्च अधिकारियों से बात हुई है। उम्मीद है जल्द बजट स्कूलों को जारी हो जाएगा।
- देवेंद्र कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद
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इसके पीछे कारण शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों को मिड-डे मील का बजट जारी न करना है। नवंबर से अभी तक स्कूलों को मिड-डे मील का बजट ही नहीं मिला है। यहां तक कि मिड-डे मील तैयार करने वाली कुक को भी तीन माह से वेतन नहीं मिला है। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है वहां ज्यादा दिक्कत आ रही है। शिक्षक अपनी जेब से रसोई गैस, दूध और सब्जी खरीद रहे हैं और बाकी राशन दुकान से उधार ले रहे हैं। हालात यहां तक हो रहे हैं कि स्कूलों को अब दुकानदार भी राशन उधार में देने में आनाकानी करने लगे हैं। शिक्षा विभाग अधिकारियों की माने तो हर साल 15 करोड़ रुपये मिड-डे मील राशन और तैयार करवाने पर खर्च होता है।
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यह है मिड-डे मील का बजट
कक्षा पहली से पांचवीं के विद्यार्थी के लिए : 4 रुपये 48 पैसे
कक्षा छठी से आठवीं के विद्यार्थी के लिए : 6 रुपये 71 पैसे
कुक की तनख्वाह : 3500 रुपये प्रति माह
इन स्कूलों में है समस्या
स्कूल विद्यार्थी संख्या
प्राइमरी 386 44269
मिडल 86 29674
गांव भिरड़ाना द्वितीय के प्राइमरी स्कूल से रिपोर्ट
गांव भिरड़ाना के राजकीय प्राइमरी स्कूल द्वितीय में 319 विद्यार्थी हैं। मिड-डे मील इंचार्ज महाबीर प्रसाद का कहना है कि रसोई गैस को अपने स्तर पर जेब से नकदी देकर ले रहे है। सब्जी और दूध भी अपनी जेब से नकद देकर खरीद रहे है। राशन, मसाले, दाल, चीनी, घी आदि गांव की दुकान से उधार ले रहे हैं। 45 हजार रुपये दुकान वाले की उधार हो रही है और अपनी जेब से करीब 22 हजार रुपये लगा चुके हैं। स्कूल में पांच कुक है। इन्हें भी तीन माह से वेतन नहीं मिला है। दुकानदार से रोजाना उधार में राशन खरीदने में शर्म आने लगी है।
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स्कूल हिजरावां खुर्द से रिपोर्ट
हिजरावां खुर्द के प्राइमरी स्कूल में करीब 350 विद्यार्थी हैं। स्कूल की मिड-डे मील इंचार्ज रेणु कुमारी का कहना है कि पिछले तीन माह से बजट नहीं आया है। मिड-डे मील का राशन दुकान से उधार ले रहे हैं। कभी गांव से ही तो कभी शहर से उधार में राशन लाना पड़ रहा है। दुकानदार का करीब 70 हजार रुपये उधार हो गया है। दुकान वाला रोजाना उधार देने में आनाकानी करने लगा है। स्कूल में चार कुक है। तीन माह का इनका करीब 40 हजार रुपये बकाया पड़ा है।
राशन के लिए देता है विभाग
मिड-डे मील के लिए चावल और गेहूं शिक्षा विभाग खुद स्कूलों को भेजता है। मिड-डे मील में इस्तेमाल होने वाले दाल, चीनी, दूध, मसाले, इंधन खर्च के लिए विभाग प्रति विद्यार्थी के हिसाब से बजट देता है। इसके अलावा प्रति कुक को 3500 रुपये के हिसाब से बजट दिया जाता है। विद्यार्थियों के लिए रोजाना दोपहर का भोजन बनाना भी जरूरी है इसलिए शिक्षकों को दुकान से उधार लाकर व्यवस्था करनी पड़ रही है।
वर्जन
विभाग को बजट की तरफ ध्यान देना चाहिए। तीन माह से स्कूलों को मिड-डे मील का बजट नहीं मिला है। शिक्षक दुकानों से उधार ले रहे हैं जो कि शर्म की बात है। दुकानदार उधार देने में भी आनाकानी करने लगे हैं। कुक भी इसी पर निर्भर है, लेकिन तीन माह से इन्हें भी वेतन नहीं मिला है। विभाग को बल्कि एडवांस बजट जारी करना चाहिए।
- विकास टुटेजा, जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
वर्जन
निदेशालय के पास बजट डिमांड के लिए भेज रखा है। इस मामले में सोमवार को भी उच्च अधिकारियों से बात हुई है। उम्मीद है जल्द बजट स्कूलों को जारी हो जाएगा।
- देवेंद्र कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद