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Fatehabad News: गांव गोरखपुर की मंजीत का हरियाणा सीनियर महिला रणजी क्रिकेट टीम में छठी बार चयन
Wed, 16 Oct 2024 02:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 16 Oct 2024 02:34 AM IST
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मंजीत सिवाच
भूना। गांव गोरखपुर की मंजीत सिवाच का छठी बार हरियाणा सीनियर महिला रणजी क्रिकेट टीम में चयन हुआ है। सीनियर वर्ग की महिला क्रिकेट खिलाड़ी मंजीत अपनी टीम के साथ मंगलवार को गांव से लखनऊ के लिए रवाना हो गई। जहां 17 अक्तूबर को लखनऊ रेलवे टीम के साथ हरियाणा की टीम का टी-20 मैच होगा।
मंजीत सिवाच अपनी टीम के साथ रोहतक के लाली स्टेडियम में पिछले कई दिनों से अभ्यास कर रही थी। इससे पहले भी पांच बार वह रणजी क्रिकेट टीम में खेल चुकी हैं। मंजीत सिवाच को बचपन से ही शिक्षा के साथ खेलों का भी शौक था। पहले कबड्डी व बॉक्सिंग और अब क्रिकेट में प्रतिभा दिखा रही हैं।
खेलो इंडिया टीम में तीन साल पहले 64 किलो भारवर्ग की बॉक्सिंग टीम में उनका चयन हुआ था। मगर बंगलूरू में प्रतिद्वंदी खिलाड़ी के साथ प्रतियोगिता में संघर्ष के दौरान बाजू में चोट लगने के कारण नस फूलने लग गई। हालांकि, प्रतियोगिता में मंजीत को कांस्य पदक हासिल हुआ था। मंजीत ने अपना जज्बा व हौसला बरकरार रखा और बीसीसीआई की अंडर-19 आयु वर्ग क्रिकेट टीम में चयन हो गया।
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मंजीत सिवाच ने हैदराबाद में लगातार छह महीने से कैंप में क्रिकेट में बल्लेबाजी की कोचिंग ली। दाएं हाथ की बल्लेबाज मंजीत सिवाच ऑलराउंडर के तौर पर क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करती रही हैं।
शानदार प्रदर्शन करने पर हुआ चयन
वर्ष 2023 में अक्तूबर महीने में गुरुग्राम में महिला रणजी क्रिकेट कैंप के लिए ट्रायल का आयोजन हुआ था, जिसमें राज्यभर से 33 से अधिक महिला खिलाड़ी शामिल हुई थीं। इसमें तीन बार ट्रायल और क्रिकेट मैच में शानदार प्रदर्शन के बल पर मंजीत का चयन सीनियर वर्ग के लिए हुआ। मंजीत ने बताया कि उसका सपना रणजी क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन के साथ भविष्य में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलना है।
पिता किसान तो मां हैं गृहिणी
22 वर्षीय मंजीत सिवाच राजकीय महाविद्यालय हिसार में एमए इंग्लिश में द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा है। उनके पिता महेंद्र सिवाच किसान तथा माता सुंंदर देवी गृहिणी हैं। मंजीत सिवाच ने बताया कि बचपन में वह अपने बहन-भाइयों के साथ क्रिकेट खेला करती थी। वर्ष 2018 में कॉलेज में दाखिला लेने के बाद ही उन्हें पता चला कि लड़कियां भी क्रिकेट खेल सकती हैं, जिसके बाद वह कॉलेज की क्रिकेट टीम में शामिल हुईं। कॉलेज परिसर में साथी खिलाड़ियों के साथ प्रतिदिन सुबह तीन से चार घंटे अभ्यास करती थी। कोरोना काल के दौरान कॉलेज बंद होने पर भी उनकी तैयारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि घर के पास खाली प्लाॅट में भाई-बहनों के साथ क्रिकेट का अभ्यास जारी रखा।
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मंजीत सिवाच अपनी टीम के साथ रोहतक के लाली स्टेडियम में पिछले कई दिनों से अभ्यास कर रही थी। इससे पहले भी पांच बार वह रणजी क्रिकेट टीम में खेल चुकी हैं। मंजीत सिवाच को बचपन से ही शिक्षा के साथ खेलों का भी शौक था। पहले कबड्डी व बॉक्सिंग और अब क्रिकेट में प्रतिभा दिखा रही हैं।
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खेलो इंडिया टीम में तीन साल पहले 64 किलो भारवर्ग की बॉक्सिंग टीम में उनका चयन हुआ था। मगर बंगलूरू में प्रतिद्वंदी खिलाड़ी के साथ प्रतियोगिता में संघर्ष के दौरान बाजू में चोट लगने के कारण नस फूलने लग गई। हालांकि, प्रतियोगिता में मंजीत को कांस्य पदक हासिल हुआ था। मंजीत ने अपना जज्बा व हौसला बरकरार रखा और बीसीसीआई की अंडर-19 आयु वर्ग क्रिकेट टीम में चयन हो गया।
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मंजीत सिवाच ने हैदराबाद में लगातार छह महीने से कैंप में क्रिकेट में बल्लेबाजी की कोचिंग ली। दाएं हाथ की बल्लेबाज मंजीत सिवाच ऑलराउंडर के तौर पर क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करती रही हैं।
शानदार प्रदर्शन करने पर हुआ चयन
वर्ष 2023 में अक्तूबर महीने में गुरुग्राम में महिला रणजी क्रिकेट कैंप के लिए ट्रायल का आयोजन हुआ था, जिसमें राज्यभर से 33 से अधिक महिला खिलाड़ी शामिल हुई थीं। इसमें तीन बार ट्रायल और क्रिकेट मैच में शानदार प्रदर्शन के बल पर मंजीत का चयन सीनियर वर्ग के लिए हुआ। मंजीत ने बताया कि उसका सपना रणजी क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन के साथ भविष्य में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलना है।
पिता किसान तो मां हैं गृहिणी
22 वर्षीय मंजीत सिवाच राजकीय महाविद्यालय हिसार में एमए इंग्लिश में द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा है। उनके पिता महेंद्र सिवाच किसान तथा माता सुंंदर देवी गृहिणी हैं। मंजीत सिवाच ने बताया कि बचपन में वह अपने बहन-भाइयों के साथ क्रिकेट खेला करती थी। वर्ष 2018 में कॉलेज में दाखिला लेने के बाद ही उन्हें पता चला कि लड़कियां भी क्रिकेट खेल सकती हैं, जिसके बाद वह कॉलेज की क्रिकेट टीम में शामिल हुईं। कॉलेज परिसर में साथी खिलाड़ियों के साथ प्रतिदिन सुबह तीन से चार घंटे अभ्यास करती थी। कोरोना काल के दौरान कॉलेज बंद होने पर भी उनकी तैयारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि घर के पास खाली प्लाॅट में भाई-बहनों के साथ क्रिकेट का अभ्यास जारी रखा।