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छात्रा को अगवा कर शादी रचाने के दोषी को पांच साल की कैद
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फतेहाबाद। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व फास्ट ट्रैक कोर्ट के स्पेशल जज बलवंत सिंह की अदालत ने दसवीं कक्षा की छात्रा का अपहरण कर विवाह करने के दोषी युवक को पांच साल की कैद व चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, अदालत ने दोषी को बाल विवाह प्रतिषेध एक्ट की धारा 9 के तहत छह माह की कैद व 2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने बाल विवाह कराने वाले पाठी, सहयोग करने वाले सुखविंदर उर्फ बिल्लू व गुरुनाम सिंह को बाल विवाह प्रतिषेध एक्ट की धारा 10 के तहत छह-छह माह की कैद व दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
दोषी मनजीत के खिलाफ पुलिस ने 20 सितंबर 2020 को नाबालिग को बहला फुसलाकर अपने साथ ले जाने, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट तथा बाल विवाह प्रतिषेध एक्ट की धारा नौ व 10 के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने बाल विवाह करवाने वाले पाठी सुखविंदर सिंह तथा सहयोगी रहे सुखविंदर उर्फ बिल्लू व गुरुनाम सिंह के खिलाफ भी बाल विवाह अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता के पिता ने बताया कि 18 सितंबर 2020 को उसकी लड़की घर में सोई हुई थी, जब सुबह उसने देखा तो वह नहीं मिली, जिसकी हमने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
पीड़िता ने अदालत में दिए अपने बयान में बताया था कि आरोपी मनजीत ने उसे धमकी दी थी कि यदि वह उसके साथ नहीं गई तो वह उसका वीडियो वायरल कर देगा। इस कारण वह उसके साथ चली गई। वह अपने साथ अपने घर से 80 हजार रुपये और चार तोला सोना भी ले गई थी। आरोपी ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। फिर मनजीत के अंकल ने उन्हें चंडीगढ़ बुला लिया। 21 सितंबर 2020 को आरोपी गुरुनाम सिंह व सुखविदर सिंह ने उसकी मनजीत के साथ पाठी सुखविंदर सिंह के जरिये शादी करवा दी। उसने पाठी से कहा था कि उसकी उम्र 18 साल से कम है, लेकिन पाठी ने कहा कि उसे डरने की जरूरत नहीं है। हमने ऐसी कई शादियां करवाई हैं, जिसमें दुल्हन की उम्र 18 साल से कम थी।
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अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात आरोपी मनजीत सिंह को आईपीसी की धारा 366 व बाल विवाह प्रतिषेध एक्ट की धारा 9 के तहत दोषी करार दिया था। वहीं, अदालत ने बाल विवाह करने वाले पाठी सुखविंदर सिंह, बाल विवाह में सहयोगी रहे सुखविंदर उर्फ बिल्लू व गुरुनाम सिंह को बाल विवाह प्रतिषेध एक्ट की धारा 10 के दोषी करार दिया था।
पीड़िता को दो लाख का मुआवजा देने के आदेश
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व फास्ट ट्रैक कोर्ट के स्पेशल जज बलवंत सिंह की अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को सीआरपीसी की धारा 357ए के तहत दो लाख का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि इस राशि में से 75 प्रतिशत राशि बैंक में फीक्स डिपाजिट में जमा करवानी होगी और 25 प्रतिशत राशि पीड़िता को खर्च करने के लिए दी जाएगी।
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दोषी मनजीत के खिलाफ पुलिस ने 20 सितंबर 2020 को नाबालिग को बहला फुसलाकर अपने साथ ले जाने, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट तथा बाल विवाह प्रतिषेध एक्ट की धारा नौ व 10 के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने बाल विवाह करवाने वाले पाठी सुखविंदर सिंह तथा सहयोगी रहे सुखविंदर उर्फ बिल्लू व गुरुनाम सिंह के खिलाफ भी बाल विवाह अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता के पिता ने बताया कि 18 सितंबर 2020 को उसकी लड़की घर में सोई हुई थी, जब सुबह उसने देखा तो वह नहीं मिली, जिसकी हमने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
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पीड़िता ने अदालत में दिए अपने बयान में बताया था कि आरोपी मनजीत ने उसे धमकी दी थी कि यदि वह उसके साथ नहीं गई तो वह उसका वीडियो वायरल कर देगा। इस कारण वह उसके साथ चली गई। वह अपने साथ अपने घर से 80 हजार रुपये और चार तोला सोना भी ले गई थी। आरोपी ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। फिर मनजीत के अंकल ने उन्हें चंडीगढ़ बुला लिया। 21 सितंबर 2020 को आरोपी गुरुनाम सिंह व सुखविदर सिंह ने उसकी मनजीत के साथ पाठी सुखविंदर सिंह के जरिये शादी करवा दी। उसने पाठी से कहा था कि उसकी उम्र 18 साल से कम है, लेकिन पाठी ने कहा कि उसे डरने की जरूरत नहीं है। हमने ऐसी कई शादियां करवाई हैं, जिसमें दुल्हन की उम्र 18 साल से कम थी।
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अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात आरोपी मनजीत सिंह को आईपीसी की धारा 366 व बाल विवाह प्रतिषेध एक्ट की धारा 9 के तहत दोषी करार दिया था। वहीं, अदालत ने बाल विवाह करने वाले पाठी सुखविंदर सिंह, बाल विवाह में सहयोगी रहे सुखविंदर उर्फ बिल्लू व गुरुनाम सिंह को बाल विवाह प्रतिषेध एक्ट की धारा 10 के दोषी करार दिया था।
पीड़िता को दो लाख का मुआवजा देने के आदेश
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व फास्ट ट्रैक कोर्ट के स्पेशल जज बलवंत सिंह की अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को सीआरपीसी की धारा 357ए के तहत दो लाख का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि इस राशि में से 75 प्रतिशत राशि बैंक में फीक्स डिपाजिट में जमा करवानी होगी और 25 प्रतिशत राशि पीड़िता को खर्च करने के लिए दी जाएगी।