{"_id":"66facf656214a5ed5003a238","slug":"lawyers-shouted-slogans-against-dc-fatehabad-news-c-21-hsr1019-475848-2024-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: लघु सचिवालय में डीसी के खिलाफ वकीलों ने की नारेबाजी, कार्य रखा निलंबित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: लघु सचिवालय में डीसी के खिलाफ वकीलों ने की नारेबाजी, कार्य रखा निलंबित
Mon, 30 Sep 2024 09:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 30 Sep 2024 09:48 PM IST
विज्ञापन
फतेहाबाद के लघु सचिवालय परिसर में डीसी के खिलाफ प्रदर्शन करते अधिवक्ता।
फतेहाबाद। जिला बार एसोसिएशन के नेतृत्व में वकीलों ने डीसी मनदीप कौर के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को जिला बार एसोसिएशन ने सभी अदालतों में कार्य निलंबित (वर्क सस्पेंड) करके डीसी के खिलाफ रोष जताया। इसके बाद बार एसोसिएशन की जनरल हाउस की बैठक हुई।
बैठक में बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी के साथ डीसी की ओर से किए गए व्यवहार को लेकर पूरी जानकारी वकीलों के समक्ष रखी गई। बाद में बार एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप बैनीवाल व सचिव कमलेश वशिष्ठ के नेतृत्व में वकील न्यायिक परिसर से नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां डीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदेश सरकार से डीसी को बर्खास्त करने की मांग की। इस प्रदर्शन व नारेबाजी के दौरान डीसी अपने प्रथम तल पर स्थित कार्यालय में बैठी रही, जबकि वकीलों ने भूतल पर खड़े होकर अपना गुस्सा जताया।
बार एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप बैनीवाल ने आरोप लगाया कि डीसी का वकीलों से ही नहीं बल्कि आम जनता के साथ भी व्यवहार ठीक नहीं है। वकीलों का शिष्टमंडल मिलने आया तो भी सीधे मुंह बात नहीं की। जनसेवक होने के नाते उनकी ड्यूटी बनती है कि उचित समय पर कोर्ट लें। वकीलों ने कहा कि उन्होंने डीसी कोर्ट का काम रोक दिया है। आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक डीसी के व्यवहार ठीक करने को लेकर वकीलों की कोई संतुष्टि नहीं हो जाती है।
विज्ञापन
वकील 12 बजे आकर बैठते हैं, 5 बजे तक इंतजार करके चले जाते हैं
बार प्रधान ने आरोप लगाया कि हमारे वकील साथी दोपहर 12 बजे आकर बैठते हैं और कई बार शाम 5 बजे तक इंतजार करके चले जाते हैं। डीसी कह देती हैं कि आज कोर्ट नहीं लेंगी। हमारी न्यायिक अदालतें सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक लगातार काम करती हैं और कभी इस तरह का व्यवहार नहीं करती कि एक या दो घंटे न आएं। कोर्ट में वकील ऑफिसर ऑफ कोर्ट होता है, अगर वकील के साथ ऐसा व्यवहार करेंगे, तो आम जनता क्या उम्मीद करेगी। अगर हमारी मांगें पूरी नहीं होती तो यह आंदोलन और फैलेगा। डीसी समय रहते अपनी गलतियाें या भूल में सुधार कर लेंगी तो ठीक, नहीं तो वकील बिरादरी की तरफ से समझाने में हम कोई कमी नहीं छोड़ेंगे।
यह था पूरा मामला
बता दें कि शुक्रवार शाम को बार एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप बैनीवाल, सचिव कमलेश वशिष्ठ, वित्त सचिव महेंद्र बागड़िया ने सेशन जज को पत्र लिखकर कहा था कि पिछले कुछ दिनों से कई वकीलों से डीसी की कोर्ट का समय तय नहीं होने की शिकायतें मिल रही थी। शुक्रवार को डीसी की कोर्ट के रीडर ने दोपहर 12 बजे आने के लिए कहा। वकील तय समय पर पहुंच गए लेकिन डीसी दोपहर 1.30 बजे तक नहीं आईं। इसके बाद रीडर ने वकीलों को दोपहर बाद 3 बजे आने को कह दिया। उस समय भी वकील इंतजार करते रहे, लेकिन डीसी 4 बजे तक नहीं आईं। इसके बाद वकीलों से सूचना पाकर बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी डीसी से मिलने उनके कार्यालय पहुंची। कार्यकारिणी ने डीसी से केसों की सुनवाई के लिए कोर्ट का समय तय करने का आग्रह किया ताकि वकील अपने सिविल और सेशन कोर्ट के केसों की भी सुनवाई पर जा सकें। आरोप है कि तभी डीसी ने कह दिया कि आप लोग मेरा समय खराब कर रहे हैं। मैं केस मेरे समय और शेड्यूल के हिसाब से सुनूंगी। इसके बाद डीसी अपने ऑफिस से चली गई। इससे नाराज बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वकीलों के साथ बैठक की और डीसी कोर्ट के बहिष्कार का फैसला ले लिया।
इसमें मेरे से क्या पूछना है। उन्हीं से पूछ लीजिए। मनदीप कौर, डीसी, फतेहाबाद
विज्ञापन
बैठक में बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी के साथ डीसी की ओर से किए गए व्यवहार को लेकर पूरी जानकारी वकीलों के समक्ष रखी गई। बाद में बार एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप बैनीवाल व सचिव कमलेश वशिष्ठ के नेतृत्व में वकील न्यायिक परिसर से नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां डीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदेश सरकार से डीसी को बर्खास्त करने की मांग की। इस प्रदर्शन व नारेबाजी के दौरान डीसी अपने प्रथम तल पर स्थित कार्यालय में बैठी रही, जबकि वकीलों ने भूतल पर खड़े होकर अपना गुस्सा जताया।
विज्ञापन
बार एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप बैनीवाल ने आरोप लगाया कि डीसी का वकीलों से ही नहीं बल्कि आम जनता के साथ भी व्यवहार ठीक नहीं है। वकीलों का शिष्टमंडल मिलने आया तो भी सीधे मुंह बात नहीं की। जनसेवक होने के नाते उनकी ड्यूटी बनती है कि उचित समय पर कोर्ट लें। वकीलों ने कहा कि उन्होंने डीसी कोर्ट का काम रोक दिया है। आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक डीसी के व्यवहार ठीक करने को लेकर वकीलों की कोई संतुष्टि नहीं हो जाती है।
विज्ञापन
वकील 12 बजे आकर बैठते हैं, 5 बजे तक इंतजार करके चले जाते हैं
बार प्रधान ने आरोप लगाया कि हमारे वकील साथी दोपहर 12 बजे आकर बैठते हैं और कई बार शाम 5 बजे तक इंतजार करके चले जाते हैं। डीसी कह देती हैं कि आज कोर्ट नहीं लेंगी। हमारी न्यायिक अदालतें सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक लगातार काम करती हैं और कभी इस तरह का व्यवहार नहीं करती कि एक या दो घंटे न आएं। कोर्ट में वकील ऑफिसर ऑफ कोर्ट होता है, अगर वकील के साथ ऐसा व्यवहार करेंगे, तो आम जनता क्या उम्मीद करेगी। अगर हमारी मांगें पूरी नहीं होती तो यह आंदोलन और फैलेगा। डीसी समय रहते अपनी गलतियाें या भूल में सुधार कर लेंगी तो ठीक, नहीं तो वकील बिरादरी की तरफ से समझाने में हम कोई कमी नहीं छोड़ेंगे।
यह था पूरा मामला
बता दें कि शुक्रवार शाम को बार एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप बैनीवाल, सचिव कमलेश वशिष्ठ, वित्त सचिव महेंद्र बागड़िया ने सेशन जज को पत्र लिखकर कहा था कि पिछले कुछ दिनों से कई वकीलों से डीसी की कोर्ट का समय तय नहीं होने की शिकायतें मिल रही थी। शुक्रवार को डीसी की कोर्ट के रीडर ने दोपहर 12 बजे आने के लिए कहा। वकील तय समय पर पहुंच गए लेकिन डीसी दोपहर 1.30 बजे तक नहीं आईं। इसके बाद रीडर ने वकीलों को दोपहर बाद 3 बजे आने को कह दिया। उस समय भी वकील इंतजार करते रहे, लेकिन डीसी 4 बजे तक नहीं आईं। इसके बाद वकीलों से सूचना पाकर बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी डीसी से मिलने उनके कार्यालय पहुंची। कार्यकारिणी ने डीसी से केसों की सुनवाई के लिए कोर्ट का समय तय करने का आग्रह किया ताकि वकील अपने सिविल और सेशन कोर्ट के केसों की भी सुनवाई पर जा सकें। आरोप है कि तभी डीसी ने कह दिया कि आप लोग मेरा समय खराब कर रहे हैं। मैं केस मेरे समय और शेड्यूल के हिसाब से सुनूंगी। इसके बाद डीसी अपने ऑफिस से चली गई। इससे नाराज बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वकीलों के साथ बैठक की और डीसी कोर्ट के बहिष्कार का फैसला ले लिया।
इसमें मेरे से क्या पूछना है। उन्हीं से पूछ लीजिए। मनदीप कौर, डीसी, फतेहाबाद