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हरियाणा का कश्मीर चंद्र डंकी रूट से गया इटली: घायल होने के बाद वतन लौटकर शुरू किया कारोबार, अब कमा रहा लाखों

Sat, 08 Feb 2025 11:42 AM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद/सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद/सिरसा Published by: नवीन दलाल Updated Sat, 08 Feb 2025 11:42 AM IST
सार

युवाओं में विदेश में बसकर कारोबार शुरू करने की ललक देखने को मिलती है। जिले के कई परिवार यूके, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में बसे हुए हैं। इसके बावजूद कई युवा विदेश जाने आस छोड़कर अपने घर से ही लाखों रुपये प्रतिमाह कमा रहे हैं।

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Kashmir Chandra of Haryana went to Italy via Donkey Route, returned to his country and started business
गांव मानकपुर निवासी कश्मीर चंद्र - फोटो : संवाद

विस्तार

यूरोप के कई देशों में गांव मानकपुर निवासी कश्मीर चंद्र ने 20 साल तक हाड़तोड़ मेहनत की। अधिक कमाई के चक्कर में डंकी रूट के जरिये इटली में प्रवेश किया। इटली में करीब 18 से 19 साल तक खेत-खलिहान में काम किया। हादसे में घायल होने के बाद अपने वतन लौटकर मुर्गी फार्म (पोल्ट्री फार्म) खोला। इस कारोबार के जरिये सालाना करीब 50 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है।

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गांव मानकपुर निवासी कश्मीरचंद्र ने बताया कि वह गांव हिजरावां में फर्नीचर का काम करता था। अच्छी कमाई की चक्कर में वर्ष 1994 में वह यूक्रेन चला गया। फिर यहां से फिर पौलेंड पहुंचा। यहां से वह जर्मनी गया। करीब दो साल तक रेस्टोरेंट में काम किया। इसके बाद वह डंकी रूट के जरिये इटली पहुंचा।
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यहां पर करीब 18 से 19 साल तक खेतों में काम किया। यहां पर दुर्घटना में घायल होने के बाद वर्ष 2015 में वापस अपने घर आ गया था। यहां पर उसने खेती शुरू की। इसके साथ ही मुर्गी फॉर्म शुरू किया। मुर्गी फॉर्म से उसे अब अच्छी कमाई हो रही है। उसने बताया कि यदि कामयाबी पाने की इच्छा है तो विदेश जाने के स्थान पर देश में ही कारोबार कर युवा अच्छी कमाई कर सकते हैं।

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युवाओं में विदेश में बसकर कारोबार शुरू करने की ललक देखने को मिलती है। जिले के कई परिवार यूके, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में बसे हुए हैं। इसके बावजूद कई युवा विदेश जाने आस छोड़कर अपने घर से ही लाखों रुपये प्रतिमाह कमा रहे हैं। इन्ही में शुमार कालांवाली के हरलाभ सिंह पोल्ट्री फार्म से दो लाख रुपये महीना कमा रहे हैं। युवाओं को हरलाभ सिंह की कामयाबी से प्रेरणा लेने की जरूरत है।

हरलाभ सिंह (34) ने बताया कि उसके बचपन में ही पिता गुरपाल सिंह की मृत्यु हो गई थी। मां ने ही तीन भाइयों को बेहतर शिक्षा दी और पालन पोषण किया। खेतीबाड़ी करते हुए बीकॉम किया। इसके बाद एमकॉम और बीएड की। कई रिश्तेदार ऑस्ट्रेलिया, यूके और कनाडा गए हुए थे। मन करता था कि मैं भी विदेश जाऊं। इसको लेकर डेढ़ साल तक प्रयास किया। इसके बाद मन किया कि अब अपना ही कोई काम किया जाए।

हरलाभ सिंह ने बताया कि उसने दोस्त जसबीर के साथ मिलकर सिंघपुरा में तीन कनाल में पोल्ट्री फार्म शुरू की। शुरुआत में दोनों ने ढाई-ढाई लाख रुपये खर्च कर काम शुरू किया। हालांकि डीलर अच्छा नहीं मिलने के कारण आमदनी बेहतर नहीं होती थी। इसके बाद दोस्त ने दो वर्ष पहले झींगा फार्म खोल लिया। ऐसे में पूर्ण रूप से पोल्ट्री फार्म हरलाभ सिंह के पास आ गया।

एजेंसी बदली तो हुआ फायदा

हरलाभ सिंह ने बताया कि शुरुआत में ज्यादा लाभ नहीं मिलने के चलते पोल्ट्री फार्मिंग में बदलाव किया। डबवाली की एजेंसी के साथ संपर्क किया। फीड से लेकर चूजे तक वह उपलब्ध करवाते हैं। उनका पालन पोषण व दवाओं का खर्च हमारा होता है। रखरखाव का 30 से 40 हजार रुपये के लगभग खर्च होते हैं। दवाओं का खर्च 20 हजार के आसपास होता है। 40 दिन की पूरी प्रक्रिया होती है और दो लाख रुपये प्रतिमाह की आय हो जाती है। मौजूदा समय में तीन कनाल में 14000 चूजे रखे हुए हैं। उसने बताया कि कंपनी से 10 प्रतिशत कमीशन मिलता है। ऐसे में देखभाल करने से बेहतर कमाई हो जाती है।

शायद विदेश में इतना कमाई नहीं कर पाते
उसने बताया कि अब दो लाख रुपये महीना कमाता हूं। परिवार के साथ रहता हूं। इतना शायद विदेश में नहीं कमा पाता। परिवार से भी दूर रहना पड़ता। डेढ़ एकड़ जमीन है। अब पोल्ट्री फार्म को बड़ा करने की योजना बना रहा हूं तो कमाई भी ज्यादा हो जाएगी। हरलाभ सिंह ने बताया कि भारत में फूड के रूप में अंडा और चिकन की मांग बनी रहती है।

बैंक से लेकर पोल्ट्री फार्म में की नौकरी
हरलाभ सिंह ने बताया कि पोल्ट्री फार्म शुरू करने से पहले पोल्ट्री से जुड़ी एजेंसी के अकाउंट विभाग में नौकरी की। उस दौरान उनके साथ में फील्ड में जाता था और पोल्ट्री से जुड़ी जानकारी ली। वहीं, निजी बैंक के सेल्स विभाग में भी नौकरी की।

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